*कुछ लोग बना लिए आपदा को अवसर।बिल्ली के भाग्य से टूट गई सिकहर।।*
*कुछ लोग बना लिए आपदा को अवसर।
बिल्ली के भाग्य से टूट गई सिकहर।।*
इस समय लगभग पूरा विश्व संकट के दौर से गुजर रहा है।कई देश युद्ध की चपेट में हैं।अक्सर वे देश युद्ध की चपेट में हैं।जहाॅं से अधिकाधिक एनर्जी पूरे विश्व को मिलती है।उन्हीं देशों में युद्ध भस्मासुर बनकर विराजमान हो गया है।कई तेल कुएं तालाब हो गये हैं।सप्लाई चेन बरवाद हो गई है।जिससे भारत सहित तमाम देश वगैर युद्ध के ही संकट में आ गये हैं। क्योंकि तेल गैस आदि की सप्लाई बाधित हो गई है।फिर भी चींजे चल रही हैं।आपदा आई है तो जायेगी भी।जो आता है वो जाता है।यही प्रकृति का नियम है।और अकाट्य सत्य भी है।
मगर कुछ चालबाज जैसे व्यक्ति व राजनीतिक दल ऐसे ही अवसरों की तलाश में रहते हैं।सभी जान रहे हैं कि उत्पादन यदि कम होगा तो सप्लाई पर असर पड़ेगा ही पड़ेगा।जो कि इस समय कमोवेश पूरे विश्व में है।लेकिन कुछ लोग बिल्ली की तरह इसी ताक में रहते हैं कि कब सिकहर टूटे।और कब मलाई खाऊॅं।ऐसे लोग आपदा आते ही लग जाते हैं अपने काम पर।बिल्ली जैसे ही सिकहर टूटने पर झपट्टा मारती है।वैसे ही कुत्सित मानसिकता वाले आपदा आने पर अफवाह फ़ैलाने में लग जाते हैं।और देशविरोधी गतिविधियों से सरकार और जनता को परेशानी में डाल देते हैं। बहुत अधिक समय नहीं बीता है। कोरोना काल में ऐसी मानसिकता वालों के चलते अनेक जिन्दगियां काल के गाल में समा गईं। बसहुतायत लोग इन अफवाहों के चलते घर से बेघर हो गये। नौकरियां चली गई।सिर्फ अफवाह के चलते।ए सब भारत में ही बहुत होता है।यहाॅं का विपक्ष आपदा आते ही खुद आपदा बन जाता है।इसलिए दिन रात ईश्वर से प्रार्थना करने में लगा रहता है।जैसे ही आई आपदा।इनका सिस्टम ऐक्टिव हो जाता है।और इनके लोग अवैध भंडारण शुरू करके अफवाह फ़ैलाने में सिद्दत से लग जाते हैं।और मजे की बात यह कि अफवाह फैला कर आनंदित भी खुब होते हैं।इनको तो बस एन केन प्रकारेण सरकार को बदनाम करना होता है।और जनता को परेशान कर अधिक से अधिक कठिनाई पैदा करना रहता है।और कामयाब भी होते हैं। क्योंकि जनता इनके बहकावे में आ जाती है।और बदहवास होकर दौड़ने लगती है।कल नहीं मिलेगा,ए सोचकर उपयोग से अधिक भंडारण करने लगती है।जिससे चीजें बाजार में मॅहगी बिकने लगती हैं।और आपूर्ति घट जाती है।ए होता है बस अफवाह के चलते। जिसमें व्यापारी और विपक्ष का तो फायदा हो जाता है।उनके लिए आपदा दीवाली होकर आती है।और सरकार व जनता के लिए आफत बन जाती है।जनता लूटी जाती है।और सरकार भी कुछ कर नहीं पाती।जबतक करती है।तबतक बहुत सारा पानी शिर से पार हो जाता है।जितनी तेजी से अफवाह फ़ैलाने वाले अफवाह फैलाते हैं।यदि सरकार चाहे तो उससे भी तेजी से रोक सकती है।मगर ऐसा होता नहीं है। सरकार शायद तब तक तमाशा ही देखती है।जबतक पानी शिर के ऊपर से बह न जाय।
ऐसा नहीं है कि सरकार कर नहीं सकती,कर सकती है।मगर करती नहीं है। अटल बिहारी वाजपेई जी के शासन काल में एक दिन नमक देश में नहीं है।ऐसी अफवाह फैली।बगैर सोशल मिडिया के उस समय उक्त खबर जंगल में लगी आग की तरह फैली।बात शासन तक पहुॅंची।शासन ऐक्टिव हुआ।और दोपहर जाते जाते स्थिति सरकार के हाॅंथ में आ गई।अफरा तफरी का जो माहौल बना वो बस कुछ ही देर में सब सही हो गया। क्योंकि सरकार ने सही समय पर सही काम किया।ऐसे हर सरकार को करना चाहिए।अफवाह भी अनायास नहीं फैलती।और अचानक एक बार नहीं यह बार बार फैलती है।इसके लिए हर सरकार को सदैव तत्पर रहना चाहिए। क्योंकि यह विपक्षियों का प्रमुख हथियार है। इसलिए सरकार को ऐसे अवसरों के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।जिससे समाज में अफरा तफरी का माहौल न उत्पन्न हो पाये। लेकिन सरकार भी गजब की है।ऐसी स्थिति बार बार उत्पन्न होती है।फिर भी सरकार इसके लिए तैयार क्यों नहीं रहती,ए बात आज तक समझ में नहीं आई।कोरोना काल में अफवाह से ही इस सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी फिर उससे सबक लेते हुए इस विषय पर कोई ठोस काम नहीं की।
प्राकृतिक आपदा को छोड़ दें तो मानव निर्मित हर काम की खबर सरकार के पास होती ही है।अब उसे रोंकने का प्रयास न करे तो ये सरकार की कमी है।हर सरकार को पता था कि यदि इरान अमेरिका आदि युद्ध में गये तो एनर्जी का संकट आ सकता है।संकट आने पर अफवाह का भी बाजार गर्म होगा।इसके लिए सरकार को सतर्क रहना चाहिए।जो कि नहीं हुई। सरकार जनता से कह रही है कि किसी चीज की कमी नहीं है।इधर बाजार में व्यापारी और विपक्ष मिलकर नहीं है का अफवाह उड़ाकर जनता से दस दस गुना अधिक रूपया ऐंठ रहे हैं।अब गैस को ही ले लीजिए। सरकार कह रही आपूर्ति अब भी बराबर है।पर जनता पा ही नहीं रही है। एजेंसियां माल नहीं है।यह कहके जनता को परेशान कर रही हैं। दसियों दिन से कितनों ने गैस बुक कर रखी है,पर डिलीवरी नहीं मिल रही है।तो जाहिर सी बात है जनता परेशान होगी ही होगी।जो कि हो रही है।और बिल्ली के भाग्य जगेगी ही जगेगी,जो कि जाग गई है।
सरकार को चाहिए कि इस पर तत्काल कार्रवाई करके चींजों को अव्यवस्थित न होने दें।और जनता को भी चाहिए की संकट की घड़ी में सरकार का सहयोग करे।अफवाहों पर ध्यान कम दे।जनता को भी चाहिए कि देश पर आये हुए संकटों से लड़े।संकट पर और संकट पैदा न करे।नमक से नमक नहीं खाया जाता।आपदा को और विपदा नहीं बनाना चाहिए।और न ही पूरी तरह सरकार पर ही आश्रित होना चाहिए।आपदा को अवसर बनाना चाहिए।जैसे कोरोना काल में हम लोगों ने अवसर बनाया। लोगों ने बहुत कुछ नया करना सीखा।जिनको कुछ नहीं आता था वो भी आनलाईन काम करने लगे।पैसे का लेन देन आनलाईन करने लगे।उसी तरह कोई आपदा आये तो उससे संयम से निपटने के लिए विचार करना चाहिए।एक कहावत है।आंधी आने पर आंधी के गुजर जाने तक इंतजार करना चाहिए।क्योंकि आंधी क्षणिक है।वैसे ही विपत्ति अधिक दिन तक नहीं टिकती।इसलिए विपत्ति से सकुशल निकलने की राह खोजनी चाहिए।हाय तौबा मचाने से नुकसान के सिवा कुछ नहीं मिलेगा। रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि
धीरज धरिय त उतरिहिं पारू।
नाहीं तो डूबिहिं सब परिवारू।।
आशय ये है कि आपदा में धीरज ही हम सबका हथियार होना चाहिए।और नये विकल्प तैयार करने के बारे में विचार करना चाहिए।अफवाहों से दूर रहना चाहिए। बिल्ली के भाग्य को न जगाना चाहिए।और न ही अपनी विपदा को बढ़ाना चाहिए।धैर्य रखना चाहिए। सरकार को कोसने से अच्छा है नये विकल्प तलाशना चाहिए।
पं.जमदग्निपुरी
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