एक कहानी (कविता)*---- मुरलीधर मिश्र

एक कहानी (कविता)

*---- मुरलीधर मिश्र

परिंदों ने घर थोड़े मांगा था। 
बस एक घोंसला बनाने की 
अस्थाई जगह  मांगी थी ।
अभी तिनके चोंच में उड़ा के लाया था 
तुम उठे उस पर झाड़ू मार दिये।
दूर डाल पर बैठा  देख रहा था 
 डबडबाई पत्नी को समझा रहा था 
जाने दो यह नगर छोड़ देते हैं ।
कहीं वानप्रस्थ करते हैं 
घोंसला कहीं और बना लेते हैं ।
 अण्डे वहीं दे लेना 
चूजे वहीं पाल लेना 
त्याग में ही सुख है 
आशा में दुःख है 
किसी की शरण नहीं
अपने में जी लेते हैं ।

रचनाकार -- मुरलीधर मिश्र वाराणसी/देवरिया

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