जानिए सपनों की हकीकत–क्षमा सिंह, योग प्रशिक्षक
जानिए सपनों की हकीकत
–क्षमा सिंह, योग प्रशिक्षक
सपने हर कोइ देखता है कुछ सपने असली जैसे लगते हैं और कुछ भावुक होते हैं ज्यादातर सपने जागते ही गायब हो जाते हैं सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिमाग आखिर सपने बनाता ही क्यों है, और उनमें से ज्यादातर हमारी यादाश्त क्यों मिट जाते हैं । वैज्ञानिको का कहना है कि सपने देखना इस बात से गहराई से जुड़े होते हैं कि सोते समय हमारा दिमाग यादों,इमोशंस और जानकारियों को कैसे प्रोसेस करता है
सपने कब आते हैं?
सपने ज्यादातर नींद के उस फेज में आते हैं जिसे रैपिड आई मूवमेंट स्लीप कहते हैं। इस दौरान दिमाग लगभग उतना ही एक्टिव होता है जितना जागते समय होता है। ब्रेन स्कैन से पता चलता है कि यादाश्त,इमोशन और कल्पना से जुड़े दिमाग के कई हिस्से बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं।
दिमाग में सपने कैसे बनते हैं?
दिमाग के अन्दर कई हिस्से मिलकर सपने बनाते हैं। हिप्पोकैम्पस दिन भर की यादों को प्रोसेस करने में मदद करता है। उसी समय एमिग्डाला बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है,एमिग्डाला डर और यादों को प्रोसेस करने का भावनात्मक केन्द्र है । यही वजह है कि सपनों में अक्सर डर,उत्साह या घबराहट जैसी भावनाएं होती हैं।
सपने को सेव नहीं कर पाता दिमाग
'आरइएम' स्लीप के दौरान नारएपिनेफ्रीन का स्तर कम होता है। इसलिए दिमाग सपनों के अनुभवों को लम्बी अवधि की यादाश्त में भेजने में मुश्किल महसूस करता है। आसान शब्दों में कहें तो दिमाग सपने का अनुभव तो करता है, लेकिन उसे ठीक से सेव नहीं कर पाता,एक और कारण यह है कि यादें बनाने वाले हिप्पोकैम्पस, सपने देखते समय अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा होता है, अगर यादों को ठीक से एनकोड नहीं किया जाए, जो जागने के बाद सपनों की डिटेल्स जल्द ही धुंधली हो जाती है और हमारा दिमाग वापस अपनी सामान्य जागने वाली गतिविधियों में लग जाता है।
सपनों को लेकर क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
वैज्ञानिकों का मानना है कि सपने दिमाग की यादों को व्यवस्थित करने और भावनाओं को प्रोसेस करने में मदद कर सकते हैं। जब हम सो रहे होते हैं तो दिमाग दिन भर के अनुभवों के टुकड़ों को फिर से चलाता है और उन्हें पुरानी यादों और कल्पना के साथ मिला देता है। ये टुकड़े मिलकर उन कहानियों का रूप ले लेते हैं, जिन्हें हम सपनों के तौर पर अनुभव करते हैं।
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