*पंडित अवसरवादी**------ पंडित जमदग्निपुरी*
*पंडित अवसरवादी*
*------ पंडित जमदग्निपुरी*
यूपी दरोगा भर्ती में एक प्रश्न पूंछा गया है। अवसरवादी का पर्याय। उसमें चार उत्तर है।जिसमें बच्चों को एक पर सही का निशान लगाना है।पहला है पंडित दूसरा है अवसरवादी।तीसरा निष्कपट।चौथा है सदाचारी। प्रश्न ही इतना दुष्टतापूर्ण है जिससे ब्राह्मण बिलबिला जाये।
यह अपराध अक्षम्य है। सरकार अपराधी को सिर्फ चेतावनी दी है।यदि यही किसी और जाति के लिए पूंछा गया होता तो अबतक बवाल हो जाता।पर्चा बनाने वाला गुनहगार है।उसपर रासुका लगना चाहिए। लेकिन सिर्फ चेतावनी मतलब यहां भी आरक्षण। सवर्ण करें तो गलती पिछड़े दलित करें तो भूल।गजब का खेल हो रहा है। मैं मान लिया सरकार ने नहीं ब्यूरोक्रेसी ने किया।तो ब्यूरोक्रेसी किसके अधीन है। संज्ञान में आने बाद उस टीम के ऊपर कठोरतम कार्यवाही नहीं हुई।इससे सरकार की मंशा हम सवर्ण समाज के प्रति साफ झलकती है। हमलोग अब सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गये हैं।मान सम्मान सरकार सब छीन रही है। सवर्ण आज भारत में तीसरे स्थान का नागरिक रह गया है।
पहले पर मुसलमान दूसरे पर दलित पिछड़े तीसरे पर हम हैं। मुसलमान यहां गाजा ईरान के लिए प्रदर्शन कर सकता है।देश जला सकता है।वैसे ही दलित पिछड़े लोग सवर्ण को दिन रात गरिया सकते हैं।गाली देने के बाद मन भर गया तो जेल में डलवा सकते हैं।मगर सवर्ण केवल सहन कर सकता है।वह यहां अपने अधिकार के लिए प्रदर्शन भी नहीं कर सकता।ये सरकार सवर्ण को अपना गुलाम मानती है।
यह महान हिन्दू वादी सरकार जब जब सत्ता में आई हम हिन्दुओं को ही तितर बितर करने का प्रयास किया है। हमीं पर सारे अलगाववादी नियम लगाई है। चाहे मंडल कमीशन हो, चाहे एस सी एस टी में कठोरता हो,चाहे प्रमोशन में आरक्षण हो,चाहे अब ये युजीसी हो।सभी नियम हिन्दू को विघटित करने वाले हैं।लगभग ६०% हिन्दू आवादी को छांटकर यह सरकार यह बताना चाह रही है कि हम सत्ता पर चिपके रहने के लिए सब में बंटवारा कर देंगे।और सवर्ण समाज को अपनी जूती बनाकर रखेंगे।तभी तो ऐसे ऐसे काले कानून सवर्ण समाज पर थोपे जा रहे हैं।इनकी सवर्णों के प्रति कुंठित मानसिकता को जब गौर से देखते हैं तो पाते हैं जैसे हम सवर्ण १६ वीं सदी में हैं,जब अधिकांश भारत मुगलों के कब्जे में था।तब भी सारी सहूलियत मुसलमान के लिए थी।अब भी है।उस जमाने में सभी हिन्दुओं की कोई सुनवाई नहीं होती थी।मगर कमाई का हिस्सा बादशाह को देना पड़ता था। मंदिर से टैक्स लिया जाता था। आज भी लिया जा रहा है।मस्जिद को अनुदान मिलता था।अब भी दिया जा रहा है।तीर्थकर लिया था,अब भी लिया जाता है।मौलवी को पगार दी जाती थी,अब भी दी जा रही है।हज सब्सिडी दी जाती थी,वह आज भी अनवरत जारी है।तब फर्क ये था कि सभी हिन्दू थे,अब सभी हिन्दू नहीं रह गये।अब दलित पिछड़े और सवर्ण हैं।तब मुसलमान को ही सब अधिकार थे।अब अधिकार दलित पिछड़ों को मिला है।सवर्ण अब भी गुलाम ही है।
अब आप सब सोचेंगे अरे हम तो आजाद हैं।तो देख लीजिए।भारत जब से आजाद हुआ तब से लेकर आज तक कोई बता दे कि सवर्ण ने कभी अपने लिए आंदोलन किया हो।मगर जब किया तो करने नहीं पाया।उसके सभी अगुवाई करने वाले अगुवा गृह बंदी बना दिए गये।यदि आजाद होते तो बंदी बनाये जाते।जैसे सभी अपने हक के लिए आंदोलन करते हैं,वैसे हम क्यों नहीं कर पाये।यही दर्शाता है कि सवर्ण केवल टैक्स भरे सरहद पर जाकर ऐसे देश के लिए लड़ें। जिसमें उसको जीने का भी अधिकार नहीं है।अपने हित के लिए आंदोलन करने का भी अधिकार नहीं है।जाति से जाति लड़ाकर सत्ता में बने रहने के लिए सभी सरकारों ने हम सवर्णों का बस दोहन की हैं,और कर रही हैं ।हमें हिन्दू समाज से अलग कर हमसे सौतेला व्यवहार करती चली आ रही हैं। आजादी के लिए लड़ें मरे हम। आजादी के बाद से लगभग ६० वर्षों तक मजा ली कांग्रेस।उसे हटाकर इनको लाये तो ये हमारा गर्दन ही दाब रहे हैं। हिन्दू एकता के नाम पर चुनकर दिल्ली के राजा बने।मगर बादशाह हो गये।और हम सवर्ण समाज वालों को गुलाम बना दिए। इसीलिए तो हमारे शांति पूर्ण आंदोलन को भी नहीं होने दिए।और सवर्ण समाज में भी फूट डालने के लिए पंडित अवसरवादी जैसे प्रश्न परीक्षा में पुंछवा रहे हैं।अब सोचना सवर्ण समाज को है कि गुलामी ही करोगे।या अपना अस्तित्व बचाओगे।अभी तो अवसरवादी के लिए पंडित पूंछा गया है।कल को गद्दारी के लिए कहीं ठाकुर बनिया लाला भी पूंछ लिए जायें तो उसके लिए भी तैयार रहिए। घुसखोर पंडित सिनेमा बनाया जा रहा है और रीलीज भी करवाई जा रही है।अब पता चला कि ए घुसखोर पंडित पिक्चर क्यों रिलीज हुई।ए युजीसी की तैयारी थी।भला बताइए पंडित क्यों घुसखोरी करेगा।पं.बिना पूंछे बिना कहे किसी को कुछ बताता ही नहीं।तो घुस किसलिए मांगेगा।मतलब साफ है। सवर्ण एक न हो पायें।और ये अपनी युजीसी लागू कर लें। इसलिए कालनेमि से सभी सवर्ण सावधान हो जाओ।और अपना मान सम्मान बचाने के लिए सभी सवर्ण मिलकर आरक्षण खत्म करवाने में आंदोलनकारियों को सपोट करो।अन्यथा वो दिन दूर नहीं कि हम अभी आधे गुलाम हैं।आगे गुलाम ही हो जायें। इसलिए अभी नहीं तो कभी नहीं।लोहा गर्म है।
पं.जमदग्निपुरी
धन्यवाद भाई
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