कुंभ मेले का मूलतत्त्व जनसामान्य तक पहुँचाने का राष्ट्रीय शास्त्रार्थ महासभा एवं युव विद्वत् ने सम्मेलन के समापन पर लिया संकल्प।
कुंभ मेले का मूलतत्त्व जनसामान्य तक पहुँचाने का राष्ट्रीय शास्त्रार्थ महासभा एवं युव विद्वत् ने सम्मेलन के समापन पर लिया संकल्प।
नासिक। शास्त्र सभा में विज्ञानों द्वारा कहा गया कि प्रायः नशा करने वाले तथाकथित युवाओं द्वारा संतो की छवि नष्ट करने वाले बाबा अथवा केवल नेत्र-सौंदर्य से आकर्षित कर माला बेचने वाली महिलाओं जैसे प्रसंगों को अत्यधिक प्रचारित कर कुंभमेले की छवि को अक्सर विकृत रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस पृष्ठभूमि में अमृत-तत्त्व की अनुभूति कराने वाले कुंभमेले के वास्तविक मूलतत्त्व को नासिक में वर्ष 2027–28 में होने वाले कुंभमेले के दौरान जनसामान्य तक पहुँचाने का संकल्प राष्ट्रीय शास्त्रार्थ महासभा एवं युवा विद्वत् सम्मेलन के समापन अवसर पर व्यक्त किया गया।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नासिक परिसर तथा महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय महासभा में देशभर से विद्वान एवं युवा शास्त्रार्थी प्रतिभागी हुए।समापन समारोह में कुंभमेला अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत भक्ति चरण दास महाराज, महासभा के अध्यक्ष तथा गोवा की श्रीविद्या पाठशाला के प्रधानाचार्य महामहोपाध्याय पं. देवदत्त पाटील, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नासिक परिसर के निदेशक प्रो. नीलाभ तिवारी, गोदावरी प्रतिष्ठान के सचिव रवींद्र पैठणे, प्रो. जयंत भातांबरेकर, श्रृंगेरी मठ के व्यवस्थापक रामगोपाल अय्यर तथा वरिष्ठ संपादक विश्वास देवकर उपस्थित थे।महंत भक्ति चरण दास महाराज ने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से नासिक में कुंभमेले के शास्त्र पर्व का शुभारंभ हुआ है। शास्त्र सभा की अध्यक्षता करते हुए प्रो. नीलाभ तिवारी ने कहा कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के माध्यम से आगामी कुंभमेले में विविध संस्कृत संस्थाओं के सहयोग से संस्कृत के प्रचार-प्रसार हेतु व्यापक कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ हि उन्होंने आग्रह किया कि नाशिक कुम्भ में धर्म, संस्कृति, संस्कृत और शास्त्रों के विषय जन सामान्य तक पहुंचे इसके लिए समाज को जागृत होना होगा ।प्रो. जयंत भातांबरेकर ने इस कार्य के लिए उद्योग जगत से सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।यह महासभा श्रृंगेरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री भारती तीर्थ महास्वामी एवं श्री विधुशेखर भारती स्वामी के आशीर्वाद तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी की प्रेरणा से आयोजित की गई।प्रो. नीलाभ तिवारी और वे.मू. रवींद्र पैठणे के मार्गदर्शन में डॉ. कुमार भट्ट, डॉ. विद्याधर प्रबल, दत्तात्रेय पैठणे, वे.मू. गोविंद पैठणे, शिवप्रसाद शुक्ला और प्रणाली कोळपकर आदि ने आयोजन का संयोजन किया।
तीन दिवसीय संमेलन में म. म. पं. देवदत्त पाटील, पं.गुरुराज कलकुर, पं. राजेश्वर देशमुख, पं.रंगनाथ गणाचारी, पं.दत्तभार्गव टेंगसे, पं.डा. गणेश्वर नाथ झा, पं.पुष्कर देवपुजारी, पं.पी.आर.वासुदेवन् आदि शास्त्रार्थ निरीक्षकों ने मार्गदर्शन किया । शास्त्र सभा में 40 से अधिक युव विद्वान सहभागी हुए ।कार्यक्रम के अंत में सहभागी विद्वानों एवं शास्त्रार्थियों को महावस्त्र, स्मृतिचिह्न तथा धनराशि प्रदान कर सम्मानित किया गया। शास्त्र सभा के समापन समारोह में स्वागत भाषण डॉ कुमार, धन्यवाद प्राचार्य रविंद्र पैठाने जबिक मंच संचालन व्याकरण विभाग के शिवप्रसाद शुक्ल ने किया। यह जानकारी प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में प्रभारी सूचना जनसंपर्क अधिकारी डॉ रंजय कुमार सिंह द्वारा दी गई।
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