रंग-रंगीलो म्हारो राजस्थान कार्यक्रम में दिखा संस्कृति और कला का अद्भुत संगम

रंग-रंगीलो म्हारो राजस्थान कार्यक्रम में दिखा संस्कृति और कला का अद्भुत संगम
मुंबई। मुंबई में ज्ञान गंगोत्री काव्य मंच द्वारा आयोजित “रंग-रंगीलो म्हारो राजस्थान” कार्यक्रम अत्यंत भव्य, गरिमामय और सांस्कृतिक उत्साह से परिपूर्ण रहा। राजस्थान की लोक-संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, रंग-बिरंगे नृत्य एवं मधुर संगीत प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को राजस्थानी रंग में रंग दिया। उपस्थित दर्शकों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक एकता और परंपरा का सुंदर उत्सव बताया। इस आयोजन का सफल नेतृत्व मंच की संस्थापक डॉ. मंजू लोढ़ा  द्वारा किया गया। उनके मार्गदर्शन, समर्पण और सांस्कृतिक दृष्टि ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की। डॉ. मंजू लोढ़ा  के नेतृत्व में ज्ञान गंगोत्री काव्य मंच सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध अभिनेत्री रकुल प्रीत  सिंह का नाम विशेष रूप से जुड़ा रहा। सुप्रसिद्ध लोकगायिका एवं अभिनेत्री इला अरुण जी द्वारा कार्यक्रम हेतु एक विशेष शुभकामना संदेश (वीडियो) प्रेषित किया गया, जिसमें उन्होंने ज्ञान गंगोत्री काव्य मंच के इस सांस्कृतिक प्रयास की सराहना करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
समारोह में सत्कार मूर्ति के रूप में महारानी मंदाकिनी कुमारी एवं ज्योति डी तोमर को सम्मानित किया गया, जो अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जानी जाती हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में रेखाराव, कुमार गौतम एवं विक्की हाडा के नाम उल्लेखनीय रहे। सभी ने मंच के इस प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम की सफलता में सरोज कोठारी, मंजु सुराणा एवं सभी सदस्यों का विशेष योगदान रहा। उनके समर्पण और सतत प्रयासों से आयोजन सुव्यवस्थित और प्रभावशाली रूप में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत मंजू लोढ़ा की पुस्तक संवेदनाओं का सफर तथा यशवी लोढ़ा की पुस्तक टीनएज क्रॉनिकल्स -  का विमोचन हुआ।
ज्ञान गंगोत्री काव्य मंच के सभी सदस्यों ने पूर्ण निष्ठा, अनुशासन और टीम भावना के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में, सभी मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, सम्मानित व्यक्तित्वों, कलाकारों एवं उपस्थित दर्शकों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया गया। सभी के सहयोग और सहभागिता से “रंग-रंगीलो म्हारो राजस्थान” एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक उत्सव के रूप में स्थापित हुआ।

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