संघर्षों में मुस्कान, सबका सम्मान, कृपाशंकर सिंह की यही पहचान– शिवपूजन पांडे, वरिष्ठ पत्रकार

संघर्षों में मुस्कान, सबका सम्मान, कृपाशंकर सिंह की यही पहचान
– शिवपूजन पांडे, वरिष्ठ पत्रकार

महान व्यक्तियों की पहचान उनके साधारण कार्यों में छिपे असाधारण गुणों से होती है। वे हमेशा विनम्र, दूरदर्शी और कर्तव्यनिष्ठ होते हैं। उनमें दूसरों को समझने की गहरी क्षमता होती है और वे अपनी असफलताओं को सीखने का माध्यम मानते हैं। जिन्होंने कृपाशंकर सिंह को करीब से जाना और पहचाना है, वे अच्छी तरह जानते हैं कि आज के राजनीतिक दौर में ऐसा विनम्र, शालीन और उदार व्यक्तित्व शायद ही किसी नेता का हो। आज भी कृपाशंकर सिंह ने अपनी राजनीतिक शुचिता की विरासत को संभाल कर रखा है।संसार में तीन तरह के लोग होते हैं। निम्न कोटि के लोग बाधाओं (विघ्नों) के डर से कोई भी काम शुरू ही नहीं करते हैं।सामान्य लोग काम शुरू तो कर देते हैं, लेकिन जैसे ही कोई मुश्किल या बाधा आती है, वे उसे बीच में ही छोड़ देते हैं। परंतु श्रेष्ठ लोग जो काम एक बार हाथ में ले लेते हैं, उसे पूरा करने में चाहे बार-बार रुकावटें और कठिनाइयां आएं, वे उसे कभी अधूरा नहीं छोड़ते।

कृपाशंकर सिंह को मैं इसलिए श्रेष्ठ व्यक्ति मानता हूं क्योंकि मैंने कभी भी उन्हें निराशा या हताश नहीं देखा है। पिछले वर्ष उन्होंने जिस तरह से अस्पताल में असहनीय पीड़ा के बावजूद हिम्मत नहीं हारी वह बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन की तरह किसी चमत्कार से कम नहीं थी। किसी को नहीं लगता था कि अब ठीक होने के बावजूद कृपाशंकर सिंह अपनी पुरानी शैली में लोगों के बीच सक्रिय हो पाएंगे। परंतु इसे मां भगवती का आशीर्वाद कहें या भगवान शंकर की कृपा, आज वे पहले से कहीं अधिक ऊर्जा के साथ लोगों के बीच सक्रिय नजर आ रहे हैं। साफ है कि कृपाशंकर सिंह ने कभी भी किसी का दिल नहीं दुखाया है, यही कारण है कि दैवीय शक्तियों ने हमेशा उनके साथ दिया है। जीत और हार तो राजनीति का हिस्सा है, परंतु हार के बाद भी जो व्यक्ति घुटने नहीं टेकता, फिर खड़ा होता है और खुद को अगली लड़ाई के लिए तैयार करता है, वही असली विजेता होता है।

एक दिसंबर 1971 को जौनपुर जनपद के सहोदरपुर गांव से 21 वर्ष का एक लड़का कृपाशंकर रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई के लिए प्रस्थान करता है। 3 दिसंबर को  मुंबई पहुंचने के बाद छोटे-मोटे काम शुरू कर देता है। कालांतर में रसाल फार्मास्यूटिकल तथा स्विट्जरलैंड की कंपनी ROCH प्रोडक्ट में नौकरी करता है और 6 साल बाद अपने गांव लौटता है। मुंबई आने के बाद उसने कसम खा रखी थी कि जब तक परमानेंट नौकरी नहीं करूंगा, तब तक घर नहीं जाऊंगा। कुछ दिन बाद वह फिर मुंबई जाता है। समता सहकारी बैंक के एक कार्यक्रम में उसकी मुलाकात पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा सिंह पाटिल से होती है और यही से कृपाशंकर की  दिशा बदल जाती है। प्रतिभाताई को कृपाशंकर के भीतर छिपी संगठनात्मक क्षमता का अंदाजा हो चुका था। 1988 में श्रीमती प्रतिभा सिंह पाटिल जब महाराष्ट्र की अध्यक्ष बनी तो उन्होंने कृपाशंकर सिंह को प्रदेश संगठन मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी और यहीं से शुरू होती है कृपाशंकर के गौरवपूर्ण राजनीतिक यात्रा की शुरुआत। फिर कृपाशंकर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलती रहीं। शिवाजीराव देशमुख जब प्रदेश अध्यक्ष बने तो कृपाशंकर पूरे चार साल तक प्रदेश महासचिव रहे। 8 जुलाई 1994 को विधान परिषद सदस्य बनाए गए। उनके कार्यों को देखते हुए 1999 में कांग्रेस ने उन्हें भाजपा की गढ़ कहे जाने वाले सांताक्रुज विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया। कृपाशंकर सिंह ने शानदार जीत हासिल की और उन्हें विलासराव देशमुख मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री के रूप में गृह, अन्न एवं औषधि प्रशासन,जेल तथा संसदीय कार्य मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। 3 साल बाद सुशील कुमार शिंदे मंत्रिमंडल में भी मंत्री पद की शपथ ली। 

20 वर्षों के स्वर्णिम राजनीतिक काल में कृपाशंकर सिंह तीन बार विधायक तथा एक बार एमएलसी निर्वाचित हुए। वर्ष 2008 से 2012 तक मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। अगस्त 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार ने जब कश्मीर में आर्टिकल 370 तथा अनुच्छेद 35 A को हटाने का फैसला किया तो कृपाशंकर सिंह खुद को रोक नहीं पाये और उन्होंने इस काम के लिए मोदी सरकार को खुलकर  बधाई दी। यही नहीं उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को भी पत्र लिखकर इस मुद्दे पर विरोध न करने का निवेदन किया। दूसरी तरफ कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार की लगातार आलोचना की जा रही थी। इसी के चलते कृपाशंकर सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और 6 जुलाई 2021 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। भाजपा को कृपाशंकर सिंह की क्षमता और लोकप्रियता का पहले से ही अंदाजा था, यही कारण था कि उन्हें पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष और विस्तारक योजना के संयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर से उन्हें टिकट दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अनेक नेताओं ने उनके लिए जौनपुर में जनसभाएं की। कृपाशंकर सिंह चुनाव भले नहीं जीत पाए परंतु हर व्यक्ति अब स्वीकार करने लगा है कि यदि कृपाशंकर सिंह की विजय हुई होती तो जौनपुर की तस्वीर बदल गई होती। चुनाव में मिली पराजय के बावजूद कृपाशंकर जरा भी विचलित नहीं हैं। वह लगातार जौनपुर के विकास कार्यों में लगे हुए हैं।

कृपाशंकर सिंह  कृपाशंकर सिंह के बारे में कहा जाता है कि वे यारों के यार हैं। अपने करीबी और शुभचिंतकों के हर दुख सुख में वे जरूर पहुंचते हैं। पूरे भारत में आप कहीं भी किसी परेशानी में हों और आपने उन्हें याद किया तो मेरा दावा है कि परेशानी के 10 मिनट के भीतर ही आपको स्थानीय स्तर पर कोई न कोई मददगार जरूर पहुंच जाएगा। शायद ही कोई शहर हो, जहां उनकी जान पहचान के लोग न रहते हों। कृपाशंकर सिंह अजातशत्रु हैं। पक्ष हो या विपक्ष उनका कोई शत्रु नहीं है।

मुंबई के अलावा ठाणे, पालघर, वसई, नालासोपारा, कल्याण, नाशिक हर जगह उनके हजारों समर्थक मौजूद हैं। परिश्रम यात्रा के दौरान, जिस तरह से लोग उनकी यात्राओं में उमड़ रहे थे, उसे देखकर बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषक भी अवाक रह गए। आज पूरे महाराष्ट्र में ऐसा एक भी उत्तर भारतीय नेता नहीं है, जिसके साथ हजारों लोग चलने के लिए तैयार हों।

कृपाशंकर सिंह के बारे में कहा जाता है कि वे यारों के यार हैं। अपने करीबी और शुभचिंतकों के हर दुख सुख में वे जरूर पहुंचते हैं। मुझे याद है पिछले वर्ष उनके अजीज मित्र, जिन्हें वे अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं, राहुल एजुकेशन के चेयरमैन पंडित लल्लन तिवारी की शादी के सालगिरह में दिल्ली से लौट के बाद रात 12 बजे एयरपोर्ट से सीधे उनके घर आए और श्री तिवारी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कांति तिवारी का सम्मान करके उनका आशीर्वाद लिया। मैंने देखा है जौनपुर में जब उनके किसी करीबी मित्र या शुभचिंतक का कोई कार्यक्रम होता है तो सीधे उनके कार्यक्रम में पहुंचते हैं और उसी दिन वापस मुंबई, लखनऊ या दिल्ली चले जाते हैं। पूरे भारत में आप कहीं भी किसी परेशानी में हों और आपने उन्हें याद किया तो मेरा दावा है कि परेशानी के 10 मिनट के भीतर ही आपके पास स्थानीय स्तर पर कोई न कोई मददगार जरूर पहुंच जाएगा। देश का शायद ही कोई शहर हो, जहां उनकी जान पहचान के लोग न रहते हों। कृपाशंकर सिंह अजातशत्रु हैं। पक्ष हो या विपक्ष उनका कोई शत्रु नहीं है। सबका सम्मान करते हैं और सबकी यथासंभव मदद भी करते हैं।

मुंबई के अलावा ठाणे, पालघर, वसई, नालासोपारा, कल्याण, नाशिक हर जगह उनके हजारों समर्थक मौजूद हैं। परिश्रम यात्रा के दौरान, जिस तरह से लोग उनकी यात्राओं में उमड़ रहे थे, उसे देखकर बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषक भी अवाक रह गए। आज पूरे महाराष्ट्र में ऐसा एक भी उत्तर भारतीय नेता नहीं है, जिसके साथ हजारों लोग चलने के लिए तैयार हों। कृपाशंकर सिंह की विनम्रता और शालीनता उनकी सबसे बड़ी ताकत है। हर व्यक्ति का सम्मान करने वाले कृपाशंकर सिंह हमेशा से सहयोगी प्रवृत्ति के रहे। उत्तर भारत से आने वाले हर व्यक्ति के मुंह पर पहला राजनीतिक नाम कृपाशंकर सिंह का रहता है। जब-जब उत्तर भारतीय समाज की बात होती है या उनसे जुड़े मुद्दों पर बात होती है तो कृपाशंकर सिंह के योगदान की चर्चा जरूर होती है। उत्तर प्रदेश को माँ और महाराष्ट्र को मौसी की संज्ञा देने वाले कृपाशंकर सिंह मराठी लोगों के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं। कृपाशंकर सिंह की उम्र भले ढल रही हो परंतु उनका जोश और जज्बा पूरी तरह से बरकरार है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उनके अजीज मित्र हैं। केंद्र में प्रधानमंत्री से लेकर अनेक केंद्रीय मंत्रियों से उनके अच्छे ताल्लुकात हैं। जौनपुर लोकसभा से चुनाव लड़ने के बाद कृपाशंकर आज भी वहां पूरी तरह से सक्रिय हैं। वे सप्ताह में कम से कम दो दिन  जौनपुर के लिए दे रहे हैं। जौनपुर के मतदाता अब स्वीकार करने लगे हैं कि यदि कृपाशंकर की विजय हुई होती तो जौनपुर की तस्वीर कुछ और होती।  बिना किसी पद पर होते हुए भी कृपाशंकर लगातार जौनपुर की बुनियादी समस्याओं के निराकरण और जनपद के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रहे हैं।

31 जुलाई को कृपाशंकर सिंह का जन्मदिन है। जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।

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