नीट यूजी की पुनर्परीक्षा ने डॉक्टर बनने का सपना चकनाचूर कर दिया।-समाजसेवी शिक्षाविद् चंद्रवीर बंशीधर यादव

नीट यूजी की पुनर्परीक्षा ने डॉक्टर बनने का सपना चकनाचूर कर दिया।
-समाजसेवी शिक्षाविद् चंद्रवीर बंशीधर यादव
3 मई, 2026 को नीट यूजी की परीक्षा देने वाले सभी छात्रों को पेपर लीक के चलते 21 जून, 2026 को दूसरी बार परीक्षा देना पड़ा।दूसरी बार की परीक्षा का स्तर पहले की तुलना में थोड़ा अधिक कठिन था,जिससे संभावित रूप से उनके कुल अंकों को प्रभावित किया।परीक्षा रद्द होने और दोबारा तैयारी करने के कारण छात्रों पर गहरा मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक दबाव पड़ा। तैयारी के लंबे चक्र और अनिश्चितता के कारण कई छात्रों को पहले जैसा प्रदर्शन दोबारा कर पाना मुश्किल हो गया।छात्रों को मानसिक,शारीरिक और आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ा है। दोबारा परीक्षा होने से छात्रों को गंभीर मानसिक तनाव और डिप्रेशन का शिकार होना पड़ा है। अनिश्चितता के इस माहौल में कई छात्रों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है और वे मानसिक अवसाद का शिकार हो चुके हैं।छात्रों को एक ही परीक्षा के लिए महीनों तक अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा। जिन छात्रों ने कोचिंग ली थी, उन्हें दोबारा पढ़ाई करने के लिए एक्स्ट्रा फीस और हॉस्टल किराये का खर्च उठाना पड़ा है, जो कई परिवारों के लिए बहुत मुश्किल था।पूरी लगन के साथ परीक्षा देने के बाद जब परिणाम रद्द होते हैं, तो छात्रों का सिस्टम से भरोसा उठ जाता है और उनकी सालों की मेहनत पर पानी फिरने जैसा अहसास होता है। दोबारा आयोजित हुई परीक्षा के लिए छात्रों को नए परीक्षा केंद्र आवंटित किए गये।  दूर-दराज के केंद्रों तक पहुँचने में छात्रों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।भूखे -प्यासे छात्रों के साथ ही उनके माता-पिता को बेवजह सजा मिली।
हुक्मरानों के लिए चार्टड प्लेन तैयार है, हम गरीबों को खाने की प्लेट ही खाली है। 
 दरअसल, इस साल की नीट परीक्षा सिस्टम  ने लाखों मासूमों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। कई छात्रों ने आत्महत्या भी कर ली। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह नीट उत्तीर्ण हर छात्र को नि:शुल्क प्रवेश निश्चित करे।वैसे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने शैक्षणिक वर्ष 2026- 2027 के लिए स्नातक एमबीबीएस पाठ्यक्रमों का जो आधिकारिक सीट मैट्रिक्स जारी किया है, उसके अनुसार इस साल देश भर के कुल 823 मेडिकल कॉलेजों में रिकॉर्ड 1,36,939 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होगी। खास बात यह है कि इन आकड़ों में एम्स की सीटों को शामिल नहीं किया गया है। चिकित्सा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से इस बार कुल 9,911 नई सीटें बढ़ाई गई है। इसके साथ ही देश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या अब 823 पर पहुँच गई है, जिसमें 441 सरकारी और 382 निजी (प्राइवेट) कॉलेज शामिल हैं। वैसे इस सत्र में 25 नए मेडिकल कॉलेज शुरू हो रहे हैं।जिसमें 7 सरकारी हैं और 18 नए निजी कॉलेज हैं। 7 सरकारी नए कॉलेज में 400 सीटें और 18 निजी कॉलेज में 2000 सीटें शामिल हैं। यह सब तब अच्छा लगता जब पेपर लींक न हुआ होता। अतः सरकार को चाहिए कि इस वर्ष नीट उत्तीर्ण हर छात्र के भविष्य के बारे में विचार करें। 
किस तरह 'मरीज़-ए- शब'को रात कटे, सुबह की कोई 'दवा'बतानी होगी।

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