प्री-पीएचडी कोर्स वर्क हुआ उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ

प्री-पीएचडी कोर्स वर्क हुआ उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ 
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्री-पीएच. डी. कोर्स 2025 हिन्दी का उद्घाटन मुख्य अतिथि अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. अनुराधा अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि निदेशक, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली प्रो. हितेंद्र मिश्र, अधिष्ठाता, महाविद्यालय विकास प्रो. अजय जेतली एवं विभागाध्यक्ष प्रो. भूरेलाल ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
ज्ञात हो कि कोर्स वर्क के समन्वयक प्रो. बृजेश कुमार पाण्डेय हैं। उन्होंने बताया कि इस सत्र में कुल 54 शोधार्थियों का इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर एवं संबंधित महाविद्यालयों में नामांकन हुआ है । सभी शोधार्थियों को बेहतर एवं मौलिक शोध की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा एवं शुभकामनाएँ दी और कार्यक्रम के संचालन को संभालते हुए कार्यक्रम को सकारात्मक गति दिया।

प्रो. अजय जेतली ने हिंदी विभाग के परम्परा की प्रासंगिकता को ज्ञान सृजन की परम्परा से जोड़ते हुए शोधार्थियों को जिज्ञासु होना उचित बताया और विभाग की परम्परा से प्रेरणा लेते हुए शोधरत रहने की सलाह दी।

प्रो. हितेंद्र मिश्र ने शोध को नई शिक्षा नीति के तहत शोध- प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई दुनियां में साहित्य का मुकाबला विज्ञान ,तकनीकी एवं भाषा से भी है , इस मुकाबले में शोध के माध्यम से अपने ज्ञान को स्थापित करना है ,जो समाज और राष्ट्र के काम आ सके। शोध कार्य में शोध की संभावनाओं की पड़ताल भी ईमानदारी से होनी चाहिये। शोध आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों में शोधार्थियों की सहभागिता को सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया।

प्रो. अनुराधा अग्रवाल ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए शोध एवं रिसर्च के अर्थ के महत्व को व्याख्यायित किया और चैट जीपीटी और गूगल आदि साधन से बचते हुए शोध की मौलिकता पर बल देने की बात कही। प्री-पीएच. डी. कोर्स की प्रासंगिकता बताते हुए कहती हैं कि यह कोर्स एक सीखने की प्रक्रिया है। महाश्वेता देवी के कहानी लेखन के माध्यम से शोध की महत्ता बताती हैं।

अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रो. भूरेलाल ने पूर्व के वक्तव्यों को समीक्षात्मक रूप से व्याख्यायित करते हुए शोध की गुणवत्ता को बेहतर करने की चिंता जाहिर की ।
सभी अतिथियों का आभार ज्ञापन करते हुए प्रो. अमरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि पूर्व की निर्धारित शोध परिकल्पना को जरूरत पड़ने पर अवश्य सुधारा और बढ़ाया जा सकता है ।


इस अवसर पर प्रो. शिवप्रसाद शुक्ल,प्रो. कुमार वीरेंद्र, प्रो. राकेश सिंह, डा. अमृता , डॉ. सुरभि,   डॉ गाजुला राजू, डॉ जनार्दन , डॉ वीरेंद्र मीणा, पुलिस संयोजक राजीव रंजन(हरियाणा) एवं समस्त शोधार्थी उपस्थित रहें ।

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