*खर्राटों का शोर*

*खर्राटों का शोर* 
 *सोते* समय अधिकतर लोगों के मुॅंह या नाक से निकलने वाली खर्राटों की तेज ,  भयंकर , कर्कश या  भोंपू-सी  सीटी जैसी आवाज अगर सुनी जाए तो मन में बेचैनी , घबराहट , झुंझलाहट पैदा होना स्वाभाविक है । घर में यदि कोई सोते हुए खर्राटे लेता है तो घर के लोग परेशान , यदि रेल के सफर में कोई खर्राटे लेता है तो  रेल यात्री परेशान और कई लोग तो कार , बस या हवाई सफर में भी खर्राटे लेते हैं और अपने पड़ोसियों को परेशान करते हैं  । कुछ लोगों के खर्राटों की आवाज़ इतनी जबरदस्त होती हैं कि वह दूर तक गूंजायमान होते हुए अन्य लोगों का भी ध्यान आकर्षित  कर चौंका देती है  । खर्राटे लेने वाला तो गहरी नींद में सोया रहता है लेकिन जो जाग  रहा है या खराटें सुन रहा है उसकी तो नींद ही उड़ जाती है । मन में उत्पन्न  झुंझलाहट , छटपटाहट उसे छेड़ने या  जगाने को मजबूर हो जाती है । खर्राटों की ध्वनि के साथ-साथ निकलने वाली सरसराहट , फुसफुसाहट और गड़गड़ाहट हर व्यक्ति को डराती है । खर्राटों के दौरान सांस भी कुछ सेकेंड के लिए रुक-रुक कर चलती है और फिर एक झटके से बाहर निकलती है ।  खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को  ये जानकारी नहीं होती । वह तो गहरी निद्रा में लीन रहता है जिसे घोड़े बेचकर सोना कहते हैं और यदि उस दौरान उसे जगा दिया जाए तो किसी को ग्लानि महसूस होती है तो किसी को क्रोध आता  है और उसकी क्रोध की सीमा अपार होती है । वह लड़ने- झगड़ने पर उतारू हो जाता है ।
                यूं तो सभी लोग ही खर्राटे लेते हैं । कई अन्य जीवधारी भी खर्राटे लेते हैं । सांस लेते समय श्वास  नली से आवाज निकलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।लेकिन मोटे  वजनदार लोगों में खर्राटों का शोर पूरे वातावरण को कर्कश ध्वनि  से गुंजायमान बना देता है । कुछ ऐसे लोग जो शराब का सेवन करते हैं या जिनके नाक या गले की संरचना के कारण मांस-पेशियां
ढीली रहती हैं या सोने की गलत मुद्रा के कारण भी मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं और सांस लेते समय हवा के दबाव से आवाज खर्राटों में परिवर्तित हो जाती है । पीठ के बल सोने वालों में भी ऐसा हो सकता है  । अत्यधिक थकान या  गहरी नींद के कारण भी खर्राटों का बढ़ जाना लाजमी है । ऐसे  लोगों की गले और नाक के पीछे की मांसपेशियां लचीली हो जाती हैं और  सांस लेते समय हवा के दबाव के कारण दब जाती है या उसमें रुकावट हो जाती है या फिर कंपन्न  उत्पन्न होती है । डॉक्टर के अनुसार खर्राटों की इस गंभीर बीमारी को " *स्लीप एपनिया* "  कहा जाता है  । ऐसे लोगों की साॅंसें कुछ सेकेंड के लिए झटका ले - ले कर चलती  हैं । कुछ लोगों को घुटन महसूस होती है । कुछ लोग हाॅंफते हैं ,  किसी का मुॅंह सूख जाता है या गले में  भी तकलीफ हो जाती है । जब सांस नली रुकती है तो शरीर व मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती जिससे नींद का चक्र टूट जाता है और ऐसा व्यक्ति नींद में हड़बड़ाकर उठता है । कई बार सर्दी-ज़ुकाम के कारण , गले में टॉन्सिल्स के बढ़े होने के कारण नाक बंद हो जाती है या साइनस एलर्जी होने के कारण व्यक्ति सांस लेने में असमर्थ होता है  । वह मुॅंह से साॅंस लेता है तब भी खर्राटों की जोरदार आवाजें आती हैं या कुछ लोगों को बड़बड़ाते  भी सुना है। यह एक शारीरिक विकार है जिसका पूर्णतया उपचार असंभव है ।
               खर्राटों के जोश को कम करने के लिए जीवन शैली में बदलाव या विशेषज्ञ की सलाह से ही समाधान हो सकता है । मोटे व्यक्ति अपने वजन को नियंत्रण में रखें ,  शराब  या नशे का सेवन न करें , करवट लेकर सोए , नाक साफ रखें , सिर को भी सोते समय ऊंँचा रखें  , तभी तेज खर्राटों से राहत मिल सकती है । कुछ विशेष विटामिन्स की कमी के कारण भी खर्राटे आते हैं तो डॉक्टर की सलाह से  खर्राटों के शोर को कम किया जा सकता है। 
*खर्राटे पहचान हैं , काया नहीं  स्वस्थ।*
*संगी बदलें करवटें , अगला सोया मस्त।।*
            - *डॉ त्रिलोक चंद फतेहपुरी* 
                   अटेली, हरियाणा।

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