*तोड़ फोड़ की संस्कृति गतिमान है*

*तोड़ फोड़ की संस्कृति गतिमान है*
     तोड़ फोड़ की संस्कृति हालांकि नई नहीं है।पहले भी भी अवैध मकान दुकान तोड़े जाते थे।पहले भी सांसद विधायक फोड़े जाते थे।ऐसा नहीं है कि आज यह सब पहली बार हो रहा है।आज का विपक्ष जिस तरह से आज हाय तौबा मचाए हुए है।हॅंसी आती है।पहले भी बहुत सी इमारतें धाराशाई हुई हैं। बहुत सी दुकानें तोड़ी गई हैं।बहुत से फेरी वाले मारे गये हैं।फुटपाथ पर से भगाये गये हैं। बहुत सी पार्टियों का वजूद तक खत्म कर दिया गया है।इसके बावजूद आज का विपक्ष ऐसे हाय तौबा मचा रहा है।जैसे यह सब वर्तमान सरकार की देन है।
      २०१४ के बाद से अवैध इमारतों दुकानों पर बुलडोजर का कहर कुछ अधिक जरूर हुआ है।मगर गलत नहीं हुआ है।जब भी बुलडोजर चला है तो सरकारी जमीन खाली करवाने के लिए चला है।अवैध कब्जा हटवाने के लिए चला है। सरकार की जमीन होते हुए भी सरकारी कार्यालय भाड़े पर चलते हैं।और सरकारी जमीनों पर भू माफिया कब्जा करके या करवा के बैठे हैं।यदि सरकार अपनी जमीन खाली करवा रही है तो इसमें गलत क्या है। उत्तर प्रदेश में अपराधियों द्वारा अप्रत्याशित रूप से हथियाई गई जमीन को यदि सरकार ने वहाॅं अवैध रूप से खड़े ढाॅंचे को बुलडोजर द्वारा तुड़वा कर अपने कब्जे में ले लिया तो इसमें गलत क्या है।इसी तरह तकरीबन सभी महानगरों में अवैध कब्जाधारियों को यदि भागाया जा रहा है तो, इसमें गलत क्या है।अभी हाल ही में मुंबई महानगर के बांद्रा पूर्व में रेल पटरी के मध्य बने सैकड़ों घरों को सरकार ने खाली करवाया है तो इसमें गलत क्या है। 
     विरोध करने वाले तो कह रहे हैं कि इतने वर्षों से लोग वहाॅं रह रहे थे।जब हटवाना था तो बनने क्यों दिए। बनवाया किसी और ने सवाल किसी और से करना बेमानी नहीं तो और क्या है।यह सवाल तो उनसे करिए।जिसने रेलवे की जमीन पर रेलवे पटरी के मध्य में आप सबको बसाया।एक गलती तो उसने की,सरकारी जमीन पर सबको बसने दिया।दूसरी सबसे बड़ी ग़लती वहाॅं पर बसने वालों ने की है। क्यों बसे ऐसी जमीन पर।जो कल खाली करा दी जाएगी।अब गलती करके मेवा मिशिरी खाये हो तो उसके दुष्परिणाम भी भुगतो। शोरगुल करके कुछ हासिल नहीं होगा।क्योंकि समय बदल गया है।तारे जमीन पर औंधे मुंह गिर पड़े हैं।मेरा मत है,जो भी लोग प्रापर्टी खरीदें,वैध खरीदें।जिससे न आपको तकलीफ हो न आपके बाल बच्चों को।न सरकार को न आने जाने वालों को।जब किसी का बना बनाया आशियाना उजड़ता है तो बहुत नुकसानदायक होता है। सामाजिक शारिरिक आर्थिक तीनों की हानि होती है।इसलिए काम वो करो जिससे सबकुछ बचा रहे।अभी हाल ही में पालघर जिला के नालासोपारा में फेरी वालों द्वारा कब्जा किया हुआ फुटपाथ खाली कराने गये विरोधी पक्ष के नगरसेवकों द्वारा फेरीवालों के साथ हाथापाई का विडियो वायरल हो रहा है।पक्ष विपक्ष सब अपनी दलीलें दे रहे हैं।कोई कह रहा है जनप्रतिनिधि को इस तरह नहीं करना चाहिए। मैं कहता हूॅं उन लोगों से जो सड़क गटर फुटपाथ कब्जा करके बैठे हैं,उनको भी ऐसा नहीं करना चाहिए।बार बार बीएमसी वाले भगाते हैं।घूम घूम कर पुनः फेरी वाले आ जाते हैं।जब एकबार खाली कराया गया तो पुनः नहीं आना चाहिए न।गलती खुद क्यों,दोष और दो यह कौन सा सही तरीका है।न वो ही सही है न ये ही।इसलिए वहाॅं न सही हुआ है न गलत हुआ है।
       २०१४ के पहले भी पार्टियाॅं टूटी हैं। कांग्रेस कइयों बार टूटी है।शिवसेना कई बार टूटी है।जनता दल टूटा तो कई दल बने। लेकिन आज जब दल टूट रहे हैं।नेतागण अषाढ़ी मेंढक की तरह इस तालाब से उस तालाब उछल कूद कर रहे हैं तो,विपक्ष सरकार पर आरोप पे आरोप गढ़ रहा है।अब आप अपने नेता को नहीं सम्हाल पा रहे हो,अपने नेता को तवज्जो नहीं दे रहे हो,तो इसमें सरकार का क्या दोष।आप ही अपने नेता को बिकाऊं,चोर, गद्दार आदि कह कहरके सम्बोधित कर रहे हो तो,इसमें सरकार का क्या दोष। उन्हें समझा बुझाकर कर अपने पाले में रखने की बजाय गाली दे रहे हो,धमकी दे रहे हो तो भला बताओ कौन रुकेगा।सभी को अपना सुख दुख देखने का अधिकार है।सब स्वतंत्रत हैं।बंधुवा मजदूर तो नहीं हैं।न ही गुलाम ही हैं।जिसको जहाॅं सुविधा होगी वहाॅं जायेगा।वहाॅं रहेगा। हॅंसी तो कांग्रेसियों पर आती है।जब भाजपा को तोड़ू फोड़ू पार्टी कहते हैं।अपना इतिहास भूल गये। एकबार ए ही तरण तारणी गंगा बने हुए थे।अन्य पार्टियों के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर गौरवान्वित होते थे।कई राज्यों में तो ये पार्टी की पार्टी अपने में मिला लिए हैं।आज यही लोग टूट फूट पर विरहगाथा सुना रहे हैं।संविधान की आयतें सुना रहे हैं।और भूल रहे हैं कि यही संविधान ए सब करने की इजाजत देता है।और इसी संविधान को लागू कांग्रेस ने किया था।बनवाया भी कांग्रेस ने ही था।और गुणगान भी गाते नहीं थकती है।और आज कह रही है लोकतंत्र की हत्या हो रही है।ऐसा लग रहा जैसे ये सब पहली बार हो रहा है।यहाॅं वह कहावत चरितार्थ हो रही है कि हम करें तो रासलीला,और करे तो चरित्रहीन।ए डबल ढोलकी नहीं चलेगी।आज जो भी हो रहा है सबमें कांग्रेस ही दोषी है।जब संविधान बन रहा था तभी इन विषयों पर ध्यान दिए होते तो आज ए दिन देखने को नहीं मिलते।तोड़ फोड़ की प्रक्रिया निर्वाध रूप से गतिमान है।जिनको सम्हलना है सही समय पर उचित निर्णय लेकर तोड़ फोड़ से बचिए।और पर आरोप लगाने से बेहतर है कि कुछ बेहतर करिए।विधवा विलाप सुन सुनकर जनता ऊब चुकी है।कुछ नया करिए।जो देशहित में हो।जनहित में हो।जैसे आज भाजपा बुलंदी छू रही है।वैसे ही कुछ आप सभी विपक्ष वाले भी करिए।
       भाजपा और अन्य पार्टियों में एक जो बहुत बड़ा अंतर है वो ए कि भाजपा विपक्ष में रहते हुए कभी भी देश विरोधियों के साथ खड़ी नजर नहीं आई।हमेशा देश के साथ खड़ी रही।कभी भी सेना से सबूत नहीं माॅंगी।कभी भी आतंकियों के बचाव में नहीं खड़ी हुई।यहाॅं तक कि कर्नल पुरोहित साध्वी प्रज्ञा स्वामी निश्चलानंद जी के साथ भी तबतक नहीं आई जब तक वो निर्दोष साबित नहीं हो गये।यहीं अंतर आज भाजपा को शीर्ष पर ले जाकर बैठाया हुआ है।और सभी विपक्षी तड़फड़ाने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे।जनता कितनी भी गई गुजरी हो मगर देश के साथ उसका जुड़ाव रहता ही रहता है।नेताओं की तरह जनता नहीं बदलती।जनता उसी तरह देश से जुड़ी रहती है जैसे माॅं के नार से शिशु।जिस दिन विपक्ष को यह बात समझ में आ जायेगी। देश विरोधियों के प्रेम में पागल होना बंद कर देगी।शायद जनता भी आपको नोटिस करने लगे।और सभी विपक्षी पार्टियां तोड़ फोड़ रूपी संक्रामक बीमारी से बच जायें।
       पं.जमदग्निपुरी

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