*एक कड़वा सच… लेकिन नई शुरुआत का आह्वान*

*एक कड़वा सच… लेकिन नई शुरुआत का आह्वान*

जौनपुर।
देश में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई को लेकर एक बड़ा और प्रेरणादायक संदेश सामने आया है। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा ने आयोग के विभिन्न समूहों के माध्यम से देशभर के पदाधिकारियों और पत्रकार साथियों को संबोधित करते हुए एक ऐसा “कड़वा सच” रखा, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

उन्होंने कहा कि आज देश में पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए कई संगठन सक्रिय हैं। अनेक संगठन ईमानदारी से संघर्ष भी कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है।क्या हम सभी पत्रकार एकजुट हैं।
यही वह कमी है। जिसकी वजह से आज पत्रकारों को प्रताड़ना और अन्याय का सामना करना पड़ता है।

सुरेश कुमार शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पहले भी कई संगठनों से जुड़कर देखा, लेकिन कहीं भी पत्रकारों की पीड़ा को सही मायनों में समझने और उनके लिए ठोस आवाज उठाने का प्रयास नहीं दिखा।
लेकिन जब उन्होंने राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग का दामन थामा, तो उन्हें एक नई उम्मीद दिखाई दी।

आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशिकांत राय और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संदीप कुमार के नेतृत्व में पत्रकारों के हितों की आवाज संसद तक गूंज चुकी है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि और प्रेरणा है।

 एकजुटता ही ताकत है।
उन्होंने सभी पत्रकार साथियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि 
अगर हम सच में पत्रकारिता कर रहे हैं। तो हमें सबसे पहले एकजुट होना पड़ेगा। बार-बार संगठन बदलने से न तो हमारी ताकत बढ़ेगी और न ही हमारी आवाज मजबूत होगी। बल्कि इससे हम बिखरते जाएंगे।

उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो एक समय ऐसा आएगा। जब हम अपनी कमजोरियों को छुपाने के लिए संगठनों की कमियां निकालने में लगेंगे।‌ और यही पत्रकारिता के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा।

 नई ऊर्जा, नया संकल्प
यह संदेश केवल एक बयान नहीं, बल्कि पूरे देश के पत्रकारों के लिए एक जागरण है।
अब समय आ गया है। कि हर पत्रकार अपने अधिकारों के लिए खड़ा हो, संगठित हो और एक मजबूत मंच के साथ आगे बढ़े।

जब पत्रकार एक होंगे, तभी उनकी आवाज सबसे बुलंद होगी।
 जब संगठन मजबूत होगा, तभी पत्रकार सुरक्षित होगा।

यह कड़वा सच ही अब नई क्रांति की शुरुआत बनेगा।

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