*पर्व ज्योतिष पंडित और लोग**------ जमदग्निपुरी*
*पर्व ज्योतिष पंडित और लोग*
*------ जमदग्निपुरी*
हमारा देश भारत पर्वों उत्सवों का देश है।लोग अपनी जिंदगी में खुशी यदि मनाते हैं तो वह पर्व ही है।जिसके कारण लोग थोड़ा खुशी मना लेते हैं।एक दूसरे से हिल मिल लेते हैं। हमारे पूर्वजों ने ऋषि मुनियों ने एक से बढ़कर एक पर्व बनाये हैं।जिसके जरिए लोग ज़िन्दगी की भाग दौड़ से थोड़ा सुकून पाते हैं।बच्चे बूढ़े युवा सब खुशी में झूम लेते हैं। आनंदित हो लेते हैं।हर पर्व का मजा ही निराला है।जैसे विजय दशमी को ही ले लीजिए।जगह जगह मेला लगता है।रामलीला होती है।भरत मिलाप होता है।विजय दशमी से लेकर दीपावली तक लोग आनंद के सागर में गोते लगाते रहते हैं।तीज कजरी को ले लीजिए ऐसे अनेक पर्व हैं।नव संवत वर्ष को ही ले लीजिए भारत भर में मनाया जाता है।लोग खुशी में उपवास रखते हैं भगवत भक्ति में लीन हो जाते हैं।ए अलग तरह का ही आनंद है।होली का तो अनुपमीय आनंद है।क्या बूढ़ा क्या जवान,क्या बच्चा महिला सब एक ही रंग में रंग जाते हैं।सब मगन मस्त किलोल करते हैं।इसी तरह वर्ष के बारहों मास कोई न कोई पर्व आता ही है।किसी किसी महीने में तो दो दो तीन तीन पर्व हो जाते हैं।ऐसा विश्व में कहीं नहीं होता।ईद क्रिसमस थर्टी फर्स्ट आदि धार्मिक अनेक प्रकाश पर्व हमारे भारत में मनायें जाते हैं।इसके अलावा राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस साथ में अनेक महापुरुषों के जन्म दिवस भी पर्व के रूप में मनाये जाते हैं। जिसमें प्रमुख रूप से गांधी जयंती। छत्रपति शिवाजी महाराज जन्मोत्सव महावीर जयंती आदि आदि।
इसमें कई पर्व अंग्रेजी तारीख से पड़ते हैं। अंग्रेजी तारीख पर पड़ने वाले पर्वों की कोई ज्योतिषीय जरूरत नहीं पड़ती।वो अपनी तय तारीख पर आ ही जाते हैं।और लोग उसका भरपूर आनंद उठाते हैं। लेकिन जो पर्व तिथि अनुसार पड़ते हैं, जिसमें ज्योतिष का बड़ा महत्व है। उसमें उहापोह की स्थिति बनती है।जिसकी जानकारी लेने के लिए लोग ज्ञानी ज्योतिषाचार्य पंडित आदि से सलाह लेते हैं। यहां तक की सरकार भी वही अनुमोदन करती है,जिसे ज्योतिर्विद सम्पादित करते हैं।लोग शुभ मुहूर्त पंडित से पूछते हैं। विवाह मुहूर्त भी पंडित से पूंछते हैं। पंडित बताते भी हैं। लेकिन लोग जब तक दस पंद्रह पंडित से पूंछ नहीं लेते संतुष्ट नहीं होते।जैसे इसी बार ले लो।होली का पर्व उहापोह में पड़ गया।पड़ इसलिए गया की होली के दिन ही चंद्रग्रहण लग गया।शास्त्रीय विधान के अनुसार चंद्रग्रहण के ९ घंटे पहले सूतक लग जाता है।जिसके चलते सभी शुभ कर्म वर्जित हो जाता है।और होली शुभ कर्म है। क्योंकि होली विक्रम संवत की शुरुआत है।नई फसल का आगमन है।वर्ष भर की बुराई को जलाकर फिर खुशी मनाई जाती है। इसलिए सूतक में होली वर्जित है।तो कुल मिलाकर कर ३ मार्च को होली मनाना अशुभ था।ऐसे ही मकर संक्रांति है।जब तक सुर्य मकर राशि में प्रवेश नहीं करते मकर संक्रांति नहीं मनाई जाती है।ऐसे ही हमारे कई धार्मिक पर्व ज्योतिष गड़ना के अनुसार आगे पीछे हो जाते हैं। दर्जनों पंडितों से सलाह लेने के बावजूद भी हमारे यहां के लोग उत्सव मनाने के लिए उतावले हुए रहते हैं।इतने उतावले हुए रहते हैं कि शुभ मुहूर्त का इंतजार भी नहीं कर पाते। और समय से पहले मनाना शुरू कर देते हैं।जैसे कि कल आधे से अधिक सनातनियों ने किया।बार बार कहने के बावजूद भी होली ३ मार्च को मना ही लिए।ऐसा लगता था जैसे यदि ३ मार्च को नहीं मनाते तो होली भाग जाती।ऐसे आज कल हर पर्व में देखा जा रहा है।लोग सौ साईत न एक सुतार वाली नीति अपनाए हुए हैं। जहां जल्दी करना चाहिए वहां नहीं करते।जैसे आज कल विवाह में हो रहा है।लग्न निकल जा रही है पर लोग नाचने में मस्त रहते हैं।लाख कहने के बावजूद लोग किसी का कहना नहीं मान रहे।सब अपने मन की कर रहे हैं।बस नाच रहे हैं और की धुन पर।
इससे ए समझ में आ रहा है कि लोगों को अपनी परम्पराओं से,अपने शास्त्र से,अपने विधान से कुछ लेना देना नहीं है।बस नाचने का अवसर मिलना चाहिए।सब नाचने के लिए आतुर हैं।शुभ मुहूर्त का एक जगह भी इंतजार नहीं करते।और वहीं जहां अधिक जरूरत होती है जल्दी की वहां किसी की सुनते नहीं।बाद में चौराहे पर बैठ कर पंडितों की बुराई बढ़-चढ़कर करेंगे। पंडित के बताए अनुसार चलेंगे नहीं।मगर बुराई करने के लिए डेढ़ पैर पर उपस्थित हो जाते हैं।मेरा मानना है कि जब अपने मन की ही करनी है तो पंडित से सलाह ही मत लो।यदि ले रहे तो पालन करो।संयम बरतो। शास्त्रों की बात मानो।शास्त्र अपने लिए नहीं बने हैं।शास्त्र जनकल्याण और देश हित के लिए बने हैं।शुभ मुहूर्त न मानने का दुष्परिणाम तुरंत नहीं अपितु दीर्घ काल में दिखता है। इसलिए नियमों का पालन करना हम सभी का कर्तव्य है। लेकिन हमने ये देखा है कि अपने पर्वों का मज़ाक़ जितना सनातनी उड़ाते हैं।उतना अन्य धर्मावलम्बी नहीं उड़ाते।वो सब अपने धर्मगुरुओं का ही वचन पालन करते हैं।जैसे ईद है।क्या मजाल है मुस्लिम एक दिन भी आगे पीछे हो जायें।जब तक जामा मस्जिद दिल्ली से मुनादी नहीं होगी ईद नहीं मनाई जाती। लेकिन सनातनी अपने ही ज्योतिष को धता बताकर कूद पड़ते हैं पर्व मनाने के लिए।यह उत्सव धर्मिता छोड़कर सनातन धर्मी बनिए।पर्व कहीं भागे नहीं जा रहे।बस एक दिन खिसक रहा है।अपने धर्म ग्रंथों की अवहेलना मत करिए।उसका गुणगान करिए। गुणगान तभी होगा जब सब लोग निष्ठापूर्वक उसका सम्मान करोगे।उत्सव धर्मी नहीं बनोगे।
हमारे धर्म ग्रंथों का अपमान सरकारें भी खुब कर रही हैं।जब पूर्व घोषित चंद्रग्रहण था तो ३ मार्च के बदले ४ मार्च को होली की छुट्टी घोषित करनी थी।मगर सरकार ने जान बूझकर ३ मार्च को ही छुट्टी घोषित की।यही ईद में नहीं करते।जिस दिन जामा मस्जिद दिल्ली कहती है,उसी दिन छुट्टी घोषित करती है। इसलिए सरकार भी सनातन धर्म को बदनाम करने में और सनातनियों में भ्रम पैदा करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रही है।जबकी सरकार सनातनी बनने का दंभ भी भर रही है।इससे सरकार की दोगली नीति का मुखौटा उजागर होता है।समझना तो सनातनियों को चाहिए।जिस तरह से सरकार ने ३ मार्च को होली की छुट्टी घोषित की इससे लगता है कि सरकार के पास जो ज्योतिषी है वह केवल चरण चारण हैं।यदि नहीं होता तो सरकार ३ मार्च को नहीं चार मार्च को छुट्टी घोषित करती। सरकारी छुट्टी के चलते ही जनता अशुभ मुहूर्त में होली खेलने को विवश हुई।जनता भी एक दिन पहले अशुभ मुहूर्त में होली खेलकर यह बता दी कि जथा राजा तथा प्रजा।
पं. जमदग्निपुरी
धन्यवाद भाई
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