ज्योतिषविद्याशाखा का एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
ज्योतिषविद्याशाखा का एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न।
नासिक :केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नासिक परिसर की ज्योतिष विद्याशाखा द्वारा "भारत की प्राचीन परम्पराओं के संरक्षण और प्रचार प्रसार के ध्येय के साथ भारतीय ज्ञान परम्परा में त्रिस्कन्ध ज्योतिषशास्त्र की भूमिका" विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस कार्यशाला को चार सत्रों में विभाजित किया गया , उद्घाटन सत्र के मुख्यातिथि एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय नागपुर के रत्नागिरि उपकेन्द्र के निदेशक प्रो. दिनकर मराठे ने भारतीय ज्ञान परम्परा में गणित एवं ज्योतिष को भारत के ग्रामीण क्षेत्रों एवं कृषिक्षेत्रो में प्रचलित परम्पराओं मे ज्योतिष और गणित के पक्ष पर बल दिया।इस कार्यशाला मे ज्योतिष अभ्यास केन्द्र के प्रमुख विशिष्टातिथि के रूप में पं अनिलदेवि चांदवडकर महोदय ने चिकित्सा ज्योतिष के विभिन्न पहलूओं को उजागर किया । प्रथम सत्र की अध्यक्षता शिक्षाशास्त्रविभागाध्यक्ष डाॅं. कुमार ने किया । समापन सत्र के मुख्यातिथि के रूप में प्रो दिनकर मराठे ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में ज्योतिष विषय का व्याहारिक पक्ष वर्तमान में प्रचलित है। विशिष्ट अतिथि के रूप में महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान के प्राचार्य एवं सचिव आचार्य रविन्द्र पैठणे ने ज्योतिष के फलितभाग को अनेक शास्त्रीय एवं लोकपरम्पराओं में प्रचलित उद्धरणों से परिपुष्ट करते हुये कहां कि फलित ज्योतिष तपरूपी अनुसन्धान से सटिक फल देता है यह भी एक आध्यात्मिक विज्ञान है । सभा की अध्यक्षता परिसर निदेशक प्रो. नीलाभ तिवारी ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य यह नहीं है कि आप प्रशिक्षित हो जाये बल्कि समाज को ज्योतिष की कालगणना पद्धति से अवगत कराना होगा । कार्यक्रम का संचालन डाॅं.विद्याधर प्रभल और डाॅं.श्रीनिवासमूर्ति ने किया। धन्यवाद ज्ञापन शिवप्रसाद शुक्ल ने किया । कार्यक्रम का संयोजन डाॅं. नवीन तिवारी ने किया । कार्यशाला में 50 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अवसर पर परिसर के प्राध्यापक ,कर्मचारी तथा छात्र उपस्थित थे। यह जानकारी प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में परिसर के प्रभारी,सूचना जनसंपर्क अधिकारी डॉ रंजय कुमार सिंह ने दी।
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