केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नासिक परिसर में “संस्कृत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी” का तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नासिक परिसर में “संस्कृत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी”  का तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न 
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय  नासिक परिसर में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “संस्कृत एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रौद्योगिकी” विषय का उद्देश्य संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता तथा आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समन्वय के माध्यम से नवीन शोध एवं नवाचार की दिशा में प्रतिभागियों को प्रेरित करना था। 
समापन  अवसर पर मुख्य  अतिथि एवं  वक्ता के रूप में  हैदराबाद विश्विद्यालय,संस्कृत अध्ययन विभाग की   प्रोफेसर अम्बा कुलकर्णी ने कहा कि  “ए.आई. युग में संगणक भाषाविज्ञान का भविष्य”  में बहुत बड़ा योगदान है उन्होंने संस्कृत व्याकरण की वैज्ञानिक संरचना तथा पाणिनीय परम्परा की तार्किकता को आधुनिक संगणकीय प्रणाली के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं के डिजिटलीकरण एवं भाषा प्रौद्योगिकी के विकास में संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को इस क्षेत्र मेंअनुसंधान हेतु प्रेरित किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नासिक परिसर के निदेशक प्रो. नीलाभ तिवारी ने कहा कि यह कार्यशाला संस्कृत को आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों में नवाचार तथा शोध के प्रति रुचि उत्पन्न करती हैं और भारतीय ज्ञान-परम्परा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में सहायक सिद्ध होती हैं।कार्यशाला के संयोजक डॉ. दाताराम पाठक ने तीनों दिनों की कार्यशाला का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने संस्कृत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्राकृतिक भाषा संसाधन, संगणक भाषाविज्ञान तथा भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी के विविध आयामों पर व्याख्यान दिए। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए तथा उत्कृष्ट सहभागिता करने वाले प्रतिभागियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में परिसर के आचार्यगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी उपस्थित रहेl
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दाताराम पाठक द्वारा किया गया lयह कार्यशाला संस्कृत एवं आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।यह जानकारी प्रेस को जारी एक विज्ञप्ति में  प्रभारी,सूचना जनसंपर्क अधिकारी डॉ रंजय कुमार सिंह ने दी है.

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