भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ने ज़श्न-ए-सुख़न किया आयोजित
भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ने ज़श्न-ए-सुख़न किया आयोजित
मुंबई
साहित्यिक संस्था भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ठाणे के तत्वावधान में साहित्यिक सहल ' ज़श्न-ए-सुख़न ' मिश्रावाड़ी भताने गांव ,नियर-नंदनवन रिसार्ट, विरार पूर्व जिला पालघर में आयोजित किया गया।इस कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी संस्था के उपसचिव श्री सुशील कुमार शुक्ल 'नाचीज' जी की थी।यह स्थान श्री शुक्ल जी के ससुर का होने के नाते उन्हें अच्छी तरह ज्ञात है।उनहोंने इसे विकसित करने में भी खूब भूमिका निभाई है।तैयारियां लगभग एक महीने से चल रही थी।सबसे पहले नाचीज जी के साथ रघुवंशी जी,अनिल राही और शिवपूजन सिंह ने स्थान का दौरा किया।यह स्थान विरार हाई-वे से २-३ किमी पर है।स्थान बहुत ही रमणीक और मौसम अत्यंत गुनगुना होने से रात रुकने का प्लान भी तैयार किया गया।
उक्त कार्यक्रम में भारतीय जन भाषा प्रचार समिति के साथ संगीत साहित्य मंच,नवकुंभ साहित्य सेवा संस्थान एवं काव्य सृजन परिवार साहित्यिक संस्था मुंबई ने सहभागिता सुनिश्चित की।जाने और आने के लिए बस की विशेष व्यवस्था रही।खान, पान,अल्पाहार और चाय-पान की दिव्य व्यवस्था आदरणीय सुशील कुमार शुक्ल जी ने बखूबी निभाई।सभी संस्थाओं का यह मिला-जुला कार्यक्रम अपने आप में अद्वितीय रहा।आपसी तालमेल और समन्वय का यह जीता-जागता उदाहरण पहले कभी नहीं देखने को मिला।भारतीय जन- भाषा के चेयरमैन रामप्यारे सिंह 'रघुवंशी' का सम विचारी संस्थाओं को लेकर चलने का ध्येय अद्भुत रहा है।वहीं संस्था के नोजवान अध्यक्ष विनय कुमार सिंह 'विनम्र' की भूमिका भी काबिल-ए- तारीफ रही।प्रमुख सहयोगियों में अनिल 'राही' ,नरसिंह हैरान जौनपुरी, डा.आनंदी सिंह रावत,अधि.अनिल शर्मा, लालबहादुर 'कमल' का नाम विशेष रहा।उपस्थित साहित्यकारों में संयोजक श्री रामजीत गुप्त,त्रिलोचन सिंह अरोरा,रेखा किंगर 'रोशनी' संजय द्विवेदी, सदाशिव चतुर्वेदी 'मधुर','अरुण प्रकाश मिश्र 'अनुरागी', 'आत्मिक' श्रीधर मिश्र, प्रमिला शर्मा,सुमन सारस्वत, शोभा 'स्वप्निल' लक्ष्मी यादव का नाम प्रमुख रहा।श्रोताओं में दर्शना रामप्यारे सिंह,रचना द्विवेदी,पुष्पा चतुर्वेदी,शशी सिंह, प्रीतिमा सिंह,उर्मिला सिंह,पूनम सिंह,मीना सिंह, रामसहाय सिंह,हरीलाल यादव,मनोज बी सिंह,अनन्या यादव प्रमुख रूप से उपस्थित थे।काव्यगोष्ठी के पश्चात एक अनूठे कार्यक्रम का आयोजन भी अचानक किया गया जिसके बारे में किसी को पता नहीं था।वह था संस्था चेयरमैन रामप्यारे 'रघुवंशी' और दर्शना सिंह की शादी की 50 वीं वर्षगांठ (गोल्डेन जुबली इयर)।शादी के अद्भुत जोड़े में सजे युगल का म़त्रोच्चार के साथ एक दूसरे को पुष्प हार पहनाकर पुन: विवाह के बंधन में बांधा गया।यह दृश्य अत्यंत अलौकिक था।दोनों ने केक काटकर सबका मुंह मीठाकराया।
दूसरे दिन सुबह योग कार्यक्रम में स्वास्थ्य के कुछ टिप्स दिए गये । अल्पहार के पश्चात हौजी और अन्य खेलों का खास आयोजन का लोगों ने खूब लुत्फ उठाया।लंच के पश्चात होली स्नेह मिलन और पुरस्कार वितरण किया गया। हास परिहास के साथ खूब धूमधाम के साथ कार्यक्रम का अंत राष्ट्रगान और नरसि़ह हैरान के आभार प्रदर्शन के साथ समाप्त हुआ।
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