मूत्र असंयम की जानकारी और बचाव – डॉ संजय पांडे, कोकिलाबेन हॉस्पिटल
मूत्र असंयम की जानकारी और बचाव
– डॉ संजय पांडे, कोकिलाबेन हॉस्पिटल
असंयम (Urinary Incontinence) क्या है?
मूत्र असंयम वह स्थिति है जब बिना इच्छा के मूत्र का रिसाव होता है।
स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस (Stress Incontinence) क्या है?
स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस वह स्थिति है जब खाँसने, छींकने, हँसने, झुकने या किसी शारीरिक मेहनत के दौरान अनैच्छिक रूप से मूत्र का रिसाव होता है।
भारत में स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस कितना आम है?
जनसंख्या अध्ययनों के अनुसार भारत में 10% से 42% महिलाओं में मूत्र असंयम पाया गया है। इसका प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। हर 3 में से लगभग 1 महिला को अपने जीवन में कभी न कभी स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस का सामना करना पड़ता है।
स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस के कारण क्या हैं?
मूत्राशय की गर्दन, मूत्रमार्ग (urethra) का सहारा, और मांसपेशियों का कार्य — ये सभी कंटिनेंस (रोककर रखने की क्षमता) के लिए आवश्यक हैं।
फेशिया (tissue) और मांसपेशियों के बीच के संबंध को नुकसान, नसों की क्षति, या सीधे मांसपेशी को नुकसान से यह क्षमता घट सकती है।
इसके अलावा, मूत्राशय की गर्दन का सामान्य बंद न होना भी असंयम का कारण बन सकता है।
स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस के अलावा और कौन-कौन से प्रकार के असंयम होते हैं?
अर्ज इन्कॉन्टिनेंस (Urge Incontinence) – जब अचानक तेज मूत्र की इच्छा के साथ या उससे ठीक पहले मूत्र का रिसाव हो।
मिक्स्ड इन्कॉन्टिनेंस (Mixed Incontinence) – जब अर्जेंसी और शारीरिक प्रयास (जैसे खाँसना या हँसना) दोनों से मूत्र का रिसाव होता है।
नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस (Nocturnal Enuresis) क्या है?
नींद के दौरान अनैच्छिक रूप से मूत्र का रिसाव होना नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस कहलाता है।
ओवरएक्टिव ब्लैडर (Overactive Bladder) क्या है?
ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम में व्यक्ति को बार-बार मूत्र त्याग की तीव्र इच्छा होती है, रात में बार-बार उठना पड़ता है (नोक्टुरिया) और कभी-कभी अचानक मूत्र का रिसाव भी हो सकता है, जबकि मूत्र संक्रमण या अन्य कोई बीमारी न हो।
क्या स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस को रोका जा सकता है?
हाँ, रोकथाम संभव है। इसके लिए जीवनशैली में बदलाव ज़रूरी है:
फाइबर युक्त आहार लें
धूम्रपान छोड़ें
अतिरिक्त वजन घटाएँ
कैफीन, कोल्ड ड्रिंक, और शराब का सेवन कम करें
केगल (Kegel) व्यायाम करें ताकि पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियाँ मजबूत हों
स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस के लक्षण क्या हैं?
मुख्य लक्षण है — किसी भी शारीरिक गतिविधि जैसे हँसने, खाँसने, दौड़ने, या भारी चीज़ उठाने पर मूत्र का रिसाव होना।
कब डॉक्टर या यूरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए?
अगर मूत्र रिसाव के कारण आपको शर्मिंदगी महसूस होती है, डायपर पहनना पड़ता है, या आप अपनी दैनिक गतिविधियाँ टालने लगती हैं — तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
इन्कॉन्टिनेंस में यूरोलॉजिस्ट की क्या भूमिका है?
यूरोलॉजिस्ट रोगी का इतिहास लेकर जांच करते हैं जैसे —
मूत्र डायरी, यूरोफ्लोमेट्री, और जरूरत पड़ने पर युरोडायनामिक स्टडी।
इन जांचों के आधार पर सही इलाज और उपचार योजना तय की जाती है।
क्या स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस उम्र या लिंग से जुड़ा है?
हाँ। महिलाओं में यह पुरुषों की तुलना में दो गुना अधिक होता है।
प्रसव और रजोनिवृत्ति (menopause) के कारण पेल्विक फ्लोर और मूत्रमार्ग की मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, जिससे रिसाव की संभावना बढ़ जाती है।
स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस का निदान कैसे किया जाता है?
विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री
शारीरिक जाँच
स्ट्रेस टेस्ट (खाँसने या जोर लगाने पर मूत्र रिसाव की जांच)
पेल्विक और रेक्टल परीक्षा
मूत्र व रक्त की जांच
जरूरत पड़ने पर सोनोग्राफी, सिस्टोस्कोपी या युरोडायनामिक टेस्ट किए जा सकते हैं।
क्या स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस ठीक हो सकता है?
हाँ, इसका इलाज उपलब्ध है जिससे इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है या इसके प्रभावों को बहुत कम किया जा सकता है।
अगर इसका इलाज न किया जाए तो क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
त्वचा संबंधी समस्याएँ: लगातार नमी से रैश या संक्रमण
मूत्र संक्रमण: बार-बार यूटीआई हो सकता है
मानसिक तनाव: शर्मिंदगी, आत्मविश्वास में कमी, सामाजिक दूरी और वैवाहिक जीवन पर असर
क्या दवाइयाँ या मेडिटेशन से इलाज हो सकता है?
दवाइयाँ सहायक होती हैं — इन्हें व्यवहारिक उपचार, पेल्विक व्यायाम या सर्जरी के साथ मिलाकर दिया जाता है।
क्या पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज़ मदद करती हैं?
हाँ, ये स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस के इलाज की पहली और मुख्य पंक्ति मानी जाती हैं।
विशेष रूप से प्रसव के बाद ये व्यायाम बहुत उपयोगी हैं।
कब सर्जरी की आवश्यकता होती है?
जब केगल एक्सरसाइज़ और अन्य उपचार असफल हों, और मरीज को हल्के प्रयास पर भी रिसाव या डायपर की जरूरत महसूस हो, तब सर्जरी की जाती है।
स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस के लिए कौन-कौन सी सर्जरी होती है?
कोल्पोसस्पेंशन (Colposuspension)
स्लिंग सर्जरी (Sling Surgery)
वजाइनल मेश सर्जरी (Tape Surgery)
यूरेथ्रल बलकिंग एजेंट्स
आर्टिफिशियल यूरिनरी स्फिंक्टर
स्लिंग सर्जरी क्या होती है?
इसमें मूत्रमार्ग (urethra) के नीचे एक छोटी स्ट्रिप (स्लिंग) लगाई जाती है जो उसे सहारा देती है, ताकि खाँसने या झुकने जैसी गतिविधियों में मूत्र का रिसाव न हो।
समाज और सभी महिलाओं के लिए संदेश:
असंयम को टाला नहीं जा सकता, परंतु इसकी देरी और बढ़ोतरी को रोका जा सकता है।
डर या शर्म के कारण इसे न छुपाएँ।
समझें, जागरूक बनें और अपने मूत्र स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
महिलाएँ अक्सर चुपचाप सहती हैं — पर बदलाव आपके निर्णय से शुरू होता है।
डॉ. संजय पांडे
कंसल्टेंट रोबोटिक रिकंस्ट्रक्टिव यूरोलॉजिस्ट
@ कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई
📧 sanjaypdr@gmail.com
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