*सवर्ण कब तक पिछलग्गू बना रहेगा*

*सवर्ण कब तक पिछलग्गू बना रहेगा*
भाई लोग हम कितना भी कह लें इस सरकार से, कितना भी कर लें इस सरकार के लिए।मगर यह सरकार हम सवर्णों की सबसे बड़ी दुश्मन रही है,है और रहेगी।ध्यान दीजिए मंडल कमीशन इनके समर्थन से लागू हुआ।एस सी एस टी इनके समर्थन से लागू हुआ। काश्मीर से सवर्णौं का पलायन इनके ही समर्थन में हुआ।नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण इनके द्वारा ही हुआ।अब यूजीसी का प्रादुर्भाव भी इनके ही कर कमलों से आया है।जेएनयू में जो देश विरोधी गतिविधियां चल रही हैं।इतने सारे विडियोज चल रहे हैं।एक को भी ए आजतक प्रमाणित नहीं किए।जानते हैं क्यों, क्योंकि उसमें भी इनका ही समर्थन है,पीछे के दरवाजे से।ए तवे को गर्म रखें हुए हैं।जब चाहे रोटी सेंकते रहें। इनकी यही नीति है।अमित शाह और मोदी का भाषण सुनिए।जैसे मनमोहन सिंह ने कहा था कि भारतीय संसाधनों पर प्रथम अधिकार मुसलमानों का है। वैसे ए दोनों कहते हैं कि भारतीय संसाधनों पर पहला अधिकार पिछड़ी जातियों और दलितों का है। ठीक है जो दबे कुचले हैं।उनको दीजिए।वे भी हमारे अपने हैं।उनको भी सुन्दर ज़िन्दगी जीने का हक है। लेकिन किसी का हक मारके नहीं।जैसे सवर्ण अपनी मेहनत काबिलियत से खुद को बनाये हैं।पहले वो भी उस तरह बनने का प्रयास करें।आप देते जा रहे हो।वे सब नशे में सब फूंकते जा रहे हैं। दीजिए हम मना नहीं कर रहे,मगर सवर्णों का रक्त तो मत पीजिए।
     ए कांग्रेस से भी खतरनाक हैं।हम सवर्णों के लिए।इनके जितने नेता हैं या तो बोल नहीं रहे अथवा बोल रहे तो आउ बाउ बक रहे हैं।एक बिहारी कुशवाहा है कोई।वो तो हद ही पार कर दिया।बोल रहा है कि हम सवर्णों के दम से नहीं जीतकर आते हैं।मतलब साफ है।हम इनको कितना भी घी दूध पिला दें।ए हमें बिष से इतर कुछ नहीं देंगे।
इनकी नजर में हम सवर्ण भारत के हैं ही नहीं।तभी तो सबकुछ हमसे छीन कर दलितों पिछड़ों को दे रहे हैं।जैसे इंडी गठबंधन वाले मुसलमानों को अपना वोट बैंक समझते हैं।वैसे ही भाजपा भी हम सवर्णों को अपना वोट बैंक और जरखरीद गुलाम समझती है।पहले हम सवर्णों को सामाजिक स्तर पर थोड़ा, आर्थिक स्तर पर थोड़ा।अब शैक्षणिक स्तर पर तोड़कर एकदम से बरवाद करने पर पूरी तरह तुली हुई है।हमारी भावी पीढ़ियों के पैर में यूजीसी रूपी बेड़ियां डालकर हमें पूरी तरह गुलाम बनाना चाह रही है। इसलिए हम सवर्णों को अब अपनी पार्टी बनानी चाहिए।जैसे ओवैशी ने बनाया हुआ है।उस पार्टी में वर्तमान के जितने भी दोगले सवर्ण,सवर्णद्रोही नेता मंत्री हैं।सबका किसी भी स्थिति में सवर्ण पार्टी में प्रवेश वर्जित हो। राम कसम इन सबको मांगने पर कोई भीख भी नहीं देगा। कांग्रेस आदि तो कुछ सीट पा जा रही है। भाजपा को कोई पूछेगा भी नहीं।सभी पार्टियां संविधान संविधान करती है।मगर संविधान को केवल अपने हिसाब से मानती हैं।
       आरक्षण दस वर्ष के लिए दस प्रतिशत था।मगर खत्म होने की बजाय यह सुरसा की तरह मुंह बाये बढ़ता जा रहा है।और सवर्णों की दुर्गति होती जा रही है।यदि हम सवर्णौं का वोटिंग पर्सेंटेज व अन्य का देखेंगे तो पता चलता है,हर बार सरकार सवर्णों के दम से ही बनती है।आप देखिए इंडी गठबंधन पूरा जोर लगाकर भी यदि सरकार नहीं बना पाई तो सवर्णों के चलते।आज सवर्ण ९०% भाजपा के साथ है। इसलिए भाजपा अहंकारी हो गई है। कांग्रेस की तरह।भाजपा को पता होना चाहिए जिससे दुश्मनी कर रहे हो,उसी के दम पर हो।१०% के चक्कर में ये ९०% की अवहेलना अब सवर्ण समाज स्वीकार नहीं करेगा।अब समय आ गया है भाजपा को भी कांग्रेस की तरह जमीन पर लाने का। बहुत उड़ लिए आसमान में।
पं.जमदग्निपुरी

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