महाशिवरात्रि : शिव और पार्वती का विवाह महोत्स–डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

महाशिवरात्रि : शिव और पार्वती का विवाह महोत्स
–डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

ॐ नमः शिवाय… ॐ नमः शिवाय…
भव भय हारक, जग उद्धारक,
नमो नमः शिवाय…

हे देवभूमि के साक्षीजन!
आज कैलाश में मंगल बेला है।
जहाँ तप और त्याग ने श्रृंगार पहना है,
जहाँ शक्ति को शिव मिला है —
आज शिव–पार्वती विवाह महोत्सव है।

माँ पार्वती को ब्याहने,
शिवजी की बारात चली।
ढोल-नगाड़े, बैंड-बाजे,
शहनाई मधुर तान छली॥

भोले भंडारी की बारात निराली,
सबसे अनोखी, सबसे निराली।
भूत-प्रेत, पिशाच, गंधर्व, यक्ष,
नंदी संग चले, सवारी सजी॥

“अरे वाह! कैसी निराली बारात है!
ना राजा, ना रथ, ना सोने का मुकुट,
पर जिनके चरणों में
तीनों लोक नतमस्तक हैं ।”

अप्सराएँ, किन्नर संग थे,
पशु-पक्षी, नाग भी साथ थे।
भस्म रमे, जटाधारी,
त्रिनेत्रधारी शिवनाथ थे॥

देख बाराती सास-ससुर घबराए,
मन में शंका बादल बन आए।
कन्या के भाग्य की चिंता लिए,
नेत्रों में प्रश्न उतर आए॥

यह कैसा वर है बेटी का?
न राजमहल, न वैभव है।
पर… तप, त्याग और करुणा में
इससे श्रेष्ठ कौन है?

भोले ने तब असली रूप दिखाया,
तेज पुंज से जग जगमगाया।
करुणा, सौम्य, दिव्य प्रकाश,
देख सभी का मन हर्षाया॥

धरा मुस्काई, मेघ बरसे,
अंबर पुष्प-वृष्टि करने लगा।
देव, दानव, ऋषि, मुनि,
मंगल गीत गाने लगा॥

मुक्तामणि, पद्म सुगंध बही,
दिशा-दिशा आलोकित हुई।
हवन कुंड में ज्वाला जगी,
मंत्रोच्चार से धरती धनी हुई॥

सात फेरे, पाणिग्रहण,
साक्षी बना त्रिभुवन सारा।
शिव–शक्ति का पावन मिलन,
जग को मिला नव उजियारा॥

शिव–पार्वती हुए एक दूजे के,
धरा–गगन पुलकित हुए।
यह दिन मंगलमय बन गया,
महाशिवरात्रि महापावन हुए॥

हर हर महादेव!
जय माँ पार्वती!

जहाँ शिव हैं — वहाँ शून्य भी पूर्ण है।
जहाँ शक्ति है — वहाँ सृष्टि है।
यही है शिव–शक्ति का संदेश।

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