काव्यसृजन दिल्ली इकाई द्वारा काव्यगोष्ठी संपन्न
काव्यसृजन दिल्ली इकाई द्वारा काव्यगोष्ठी संपन्न
काव्यसृजन परिवार के दिल्ली इकाई द्वारा गूगल मीट पर भव्य काव्यगोष्ठी का आयोजन महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर किया गया जिसमें अलग-अलग जगह से काफी संख्या में कवि और श्रोतागण उपस्थित रहे। काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ओम प्रकाश तिवारी जी ने की। कार्यक्रम की शुरुआत छठी कक्षा के छात्र आर्नव तिवारी द्वारा माँ सरस्वती के वंदना से हुई। पहले कवि के रूप में युवा कवि एवं शिक्षक हरि नारायण जी ग्रामीण एवं शहरी परिवेश के बीच भिन्नता को लेकर अपनी कविता पढ़ी, भारतीय सेना पर पढ़ी गई उनकी रचना भी मन को हिला कर रख दी जबकि जौनपुर से जुड़े कवि राजेश कुमार पांडेय जी के कविताओं पर भी लोग खूब झूमे। कविता के महफ़िल में एक से एक रचनाओं के बाद अगले कवि के अरुण दुबे 'अविकल' जी द्वारा महाशिवरात्रि पर विशेष रचना पढ़ी गई जो लोगों द्वारा खूब पसंद की गई। दिल्ली इकाई के महासचिव संजीव कुमार घोष 'नीर' ने भी अपनी बेहतरीन प्रस्तुति दी। कवि विनोद कुमार शुक्ला के कविताओं के साथ निरंतर झूमते हुए एक अलग ही आनंद की अनुभूति हुई वहीं कवि विनय शर्मा दीप जी के छंद जो फागुनी रंग में रंगे हुए थे और प्रभु कृष्ण एवं राधा के प्रसंग को लेकर रहे, भी बेहतरीन रहे। उनकी प्रस्तुति हमेशा की तरह इस बार भी लाजवाब रही। मुंबई से जुड़े कवि बीरेंद्र यादव जी की कविताएं गूढ़ एवं गहरी भावाभियक्ति लिए हुए रहीं, अध्यक्ष के शब्दों में कहा जाय तो बीरेंद्र की कविताएं श्रोताओं को उद्वेलित कर पाने में सक्षम हैं। कवि संजीव द्विवेदी जी की रचना महाशिवरात्रि पर रही और प्रस्तुति बढ़िया रही। काव्यसृजन परिवार के संस्थापक पं. शिवप्रकाश जमदग्निपुरी की कविता फागुन और फागुन में बचपना की याद तरोताजा कर गई, लोग वाह-वाह कह उठे। काव्यसृजन दिल्ली इकाई के अध्यक्ष, कवि एवं चित्रकार पंकज तिवारी ने श्री महाकालेश्वर जी को ध्यान करते हुए अपनी कविता पढ़ी। संचालन भी इनके द्वारा ही किया गया।काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि ओम प्रकाश तिवारी जी के कविताओं में अनुभव का खूब सारा पिटारा रहा, बड़े ही शांत शैली में शानदार गीत पढ़ा गया उनके द्वारा। अध्यक्षीय वक्तव्य में सभी के रचनाओं पर उनके द्वारा समीक्षात्मक टिप्पणी भी की गई। धन्यवाद ज्ञापन बड़े ही सहज भाव में संस्थापक पं. शिवप्रकाश जमदग्निपुरी द्वारा दिया गया।
Comments
Post a Comment