माता प्रसाद चतुर्वेदी की पुस्तक अनुभव जीवन के का विमोचन

माता प्रसाद चतुर्वेदी की पुस्तक अनुभव जीवन के का विमोचन
मीरा रोड। विरूंगला केन्द्र में माता प्रसाद चतुर्वेदी की सद्य प्रकाशित कृति 'अनुभव जीवन के' का विमोचन हुआ। उनकी पुस्तक पर बोलते हुए कुसुम त्रिपाठी जी ने कहा कि उनके लेखन में विविधता है। वह अपने आलेखों के द्वारा आज भी एक शिक्षक की भूमिका का सफलता पूर्वक निर्वाह कर रहे हैं। समाज, परिवार, गांव, शहर, जन्मभूमि, कर्मभूमि, बेटी, संपत्ति,बच्चे रिश्ते, मेडिया एवं आधुनिक तकनीक जैसे विषयों को उन्होंने अपने लेख का विषय बनाया है। पुस्तक पर अपने विचार रखते हुए प्रो शीतला प्रसाद दूबे ने कहा कि महत्वपूर्ण यह नही है हम किस विचार धारा से जुड़े हुए हैं, महत्वपूर्ण यह है कि हमारे कार्य में हमारी वैचारिकता कितनी झलकती है। अपनी बात को स्पष्ट करते हुए उन्होंने एक महिला का उदाहरण दिया जो लंबी यात्रा करते हुए पीड़ित और दुखी बच्चों और महिलाओं के लिए पुराने कपड़े का उपयोग कर उनके लिए सहायक बनती है। उन्होंने माता प्रसाद चतुर्वेदी जी की पुस्तक को एक पठनीय पुस्तक बताया। बात को आगे बढाते हुए कमला शंकर मिश्र ने हास्य और विनोद के अपने चिर परिचित अंदाज में अपनी बात रखी और बदलते समय में अच्छी पुस्तकों के पढने की महती आवश्यकता पर जोर दिया। पुस्तक पर अपने महत्वपूर्ण वक्तव्य में  डॉ दयानंद तिवारी जी ने लेखकों से मूल्य परक लेखन की अपील करते हुए चेतावनी दी कि यदि ऐसा नही हुआ तो आने वाले दस वर्षों में हमारे समाज की स्थिति भयावह हो जाएगी और  उसमें बुजुर्गों का जीवन बोझिल बन जाएगा। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में ह्दयेश मयंक ने शिक्षकों की महत्ता पर प्रकाश डालते हूए बताया कि उनके स्कूल के प्रिय शिक्षक जब तक जीवित रहे, तब तक वह गाँव जाने समय आदर के प्रतीक के रूप में उन्हें एक  गंजी और धोती आदर सहित भेट करते रहे। उनका इशारा भी मुल्यों की तरफ था। उन्होंने सवाल किया कि आज इस तरह का आदर भाव शिक्षक बच्चों में क्यों नहीं पैदा कर पा रहे हैं? उन्होंने समाज में बदलाव के लिए पुस्तकों के साथ शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डाला। पुस्तक प्रकाशन के विषय में प्रकाशक राजीव मिश्रा ने कहा कि उनके यहाँ से प्रकाशित पुस्तकों में यह एक मात्र पुस्तक है जिसे उन्होंने आद्योपांत पढा अन्यथा वह पुस्तक पर संस्तुति के लिए पांडुलिपि दूसरों के पास भेज दिया करते हैं। अपने लेखकीय वकतव्य में माता प्रसाद चतुर्वेदी ने सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की और दूसरी पुस्तक के शीघ्र प्रकाशित हो जाने का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम के आरंभ में सरस्वती वंदना और आशीष देने का महत्वपूर्ण कार्य पंडित कमलाशंकर मिश्र ने किया और आभार प्रदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह धर्मेंद्र चतुर्वेदी ने किया। विरूंगला केन्द्र शिक्षकों, लेखकों, संस्था चालकों और माता प्रसाद के शिष्यो से खचाखच भरा था।

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