वर्धमान तप की 100वीं ओली की पूर्णता पर पंचाह्निका तपोत्सव का भव्य आयोजन

वर्धमान तप की 100वीं ओली की पूर्णता पर पंचाह्निका तपोत्सव का भव्य आयोजन
अहमदाबाद। जैन धर्म की तप, त्याग और संयम की गौरवशाली परंपरा को उजागर करती एक अत्यंत पावन धार्मिक घटना के रूप में रामनगर, साबरमती स्थित श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ जिनालय के पार्श्वनाथ आराधना भवन में पंचाह्निका तपोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। यह तपोत्सव 108 फुट के आदिनाथ दादा के प्रेरक, जंबूद्वीप, नागेश्वर, मांडवगढ़ एवं माणिभद्र तीर्थों के उद्धारक व मार्गदर्शक गुरुदेव प.पू. आ. भ. श्री अशोकसागर सूरीश्वरजी म.सा. के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यदक्ष एवं विनयी प.पू. आ. म. श्री सौम्यचंद्रसागर सूरीश्वरजी म.सा., वर्धमान तप के आराधक प.पू. आ. म. श्री विवेकचंद्रसागर सूरीश्वरजी म.सा., प्रवर्तक प.पू. श्री धैर्यचंद्रसागरजी म.सा. तथा प.पू. सा. श्री वसंतप्रभाश्रीजी म.सा. की शिष्या, भीष्म तपस्विनी प.पू. सा. श्री गिरांशु श्रीजी म.सा. की दिव्य तपशक्ति से वर्धमान तप की 100वीं ओली की पूर्णता का मंगल अवसर मनाया गया। इस पावन प्रसंग पर पारणा श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपप्रमुख ट्रस्टी संजय जीवनलाल शाह एवं महिला विभाग की उपप्रमुख अल्पा संजय शाह के वरद हस्तों से संपन्न हुआ। यह शुभ अवसर 01 फरवरी 2026 (रविवार) को श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया गया। अल्पायु से आरंभ की गई कठोर तपश्चर्या, अखंड आराधना एवं संयममय जीवन के माध्यम से तपस्विनी श्री का जीवन आज समाज के लिए प्रेरणा का जीवंत प्रतीक बन चुका है। पंचाह्निका तपोत्सव के दौरान तपवंदना, अनुमोदना, विनंती, श्रमण–श्रमणियों का वंदन, पाँच छोड़े का उद्यापन सहित विविध तप आराधनाओं का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर अनेक साधु-साध्वी भगवंतों की पावन उपस्थिति से संपूर्ण वातावरण भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि के भावों से ओत-प्रोत हो गया। तपस्विनी श्री द्वारा संपन्न 108 उपवास गुणसंवरण, 7400 दीर्घ आयंबिल, 18 मासक्षमण एवं अन्य दुर्लभ तपश्चर्याओं ने जैन समाज में तप-महिमा, संयम और आध्यात्मिक उन्नति के मूल्यों को और अधिक सुदृढ़ किया है। साथ ही प.पू. सा. श्री गिरांशु म.सा. की वाक्पटुता एवं प्रवचन प्रभाव ने समाज में धर्मजागृति को नई दिशा प्रदान की है। इस पावन अवसर पर साबरमती संघ अध्यक्ष जयंतीभाई संघवी (रत्नमणि), धर्मे ट्रस्ट के ट्रस्टी श्री धर्मेशभाई शाक,  जशवंतलाल नेमचंद शाह सहित अनेक साधु-साध्वी, जैन ट्रस्टी, संघ पदाधिकारी, धर्मप्रेमी महानुभाव एवं संस्था सदस्य उपस्थित रहे। हजारों की संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति से यह तपोत्सव अत्यंत भव्य एवं स्मरणीय बना।

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