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*कुछ लोग बना लिए आपदा को अवसर।बिल्ली के भाग्य से टूट गई सिकहर।।*

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*कुछ लोग बना लिए आपदा को अवसर। बिल्ली के भाग्य से टूट गई सिकहर।।*       इस समय लगभग पूरा विश्व संकट के दौर से गुजर रहा है।कई देश युद्ध की चपेट में हैं।अक्सर वे देश युद्ध की चपेट में हैं।जहाॅं से अधिकाधिक एनर्जी पूरे विश्व को मिलती है।उन्हीं देशों में युद्ध भस्मासुर बनकर विराजमान हो गया है।कई तेल कुएं तालाब हो गये हैं।सप्लाई चेन बरवाद हो गई है।जिससे भारत सहित तमाम देश वगैर युद्ध के ही संकट में आ गये हैं। क्योंकि तेल गैस आदि की सप्लाई बाधित हो गई है।फिर भी चींजे चल रही हैं।आपदा आई है तो जायेगी भी।जो आता है वो जाता है।यही प्रकृति का नियम है।और अकाट्य सत्य भी है।       मगर कुछ चालबाज जैसे व्यक्ति व राजनीतिक दल ऐसे ही अवसरों की तलाश में रहते हैं।सभी जान रहे हैं कि उत्पादन यदि कम होगा तो सप्लाई पर असर पड़ेगा ही पड़ेगा।जो कि इस समय कमोवेश पूरे विश्व में है।लेकिन कुछ लोग बिल्ली की तरह इसी ताक में रहते हैं कि कब सिकहर टूटे।और कब मलाई खाऊॅं।ऐसे लोग आपदा आते ही लग जाते हैं अपने काम पर।बिल्ली जैसे ही सिकहर टूटने पर झपट्टा मारती है।वैसे ही  कुत्सित मानस...

भगवान श्रीराम का चरित्र हमे सिखाता है कि महानता किसी पद या शक्ति से नहीं बल्कि चरित्र की पवित्रता और कर्मों की श्रेष्ठता से प्राप्त होती है -डॉ रंजय कुमार सिंह

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भगवान श्रीराम का  चरित्र हमे सिखाता है कि महानता किसी पद या शक्ति से नहीं बल्कि चरित्र की पवित्रता और कर्मों की श्रेष्ठता से प्राप्त होती है -डॉ रंजय कुमार सिंह  मुंबई। भांडुप स्थित सरस्वती हाई स्कूल तुलशेटपाड़ा में रामनवमी पर्व के उपलक्ष्य में भगवान श्रीराम के आदर्श स्वरूप पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में संयुक्त शिक्षक संघ, अखिल भारतीय नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नासिक परिसर,  राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ रंजय कुमार सिंह ने कहा कि सृष्टि की संरचना को आत्मसात करने वाला सत्य सनातन हिन्दू एक जीवनोपयोगी धर्म है। इस धर्म की अनादि परम्परा में भगवान श्रीराम का चरित्र केवल एक कथा या धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के सर्वोच्च आदर्श का जीवंत उदाहरण है। श्रीराम को "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा गया है, जिसका अर्थ है वह पुरुष जिसने जीवन की प्रत्येक मर्यादा का पूर्ण और सर्वोत्तम पालन किया। उनका जीवन इस सत्य स्वरूप को स्थापित करता है कि मनुष्य यदि धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर अडि...

रामनवमी पर तुलसेतपाढ़ा में विशेष कार्यक्रम आयोजित

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रामनवमी पर तुलसेतपाढ़ा में विशेष कार्यक्रम आयोजित  मुंबई। भांडुप स्थित सरस्वती हाई स्कूल तुलशेटपाड़ा में रामनवमी पर्व के उपलक्ष्य में भगवान श्रीराम के आदर्श स्वरूप पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में संयुक्त शिक्षक संघ, अखिल भारतीय नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नासिक परिसर,  राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ रंजय कुमार सिंह ने कहा कि सृष्टि की संरचना को आत्मसात करने वाला सत्य सनातन हिन्दू एक जीवनोपयोगी धर्म है। इस धर्म की अनादि परम्परा में भगवान श्रीराम का चरित्र केवल एक कथा या धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के सर्वोच्च आदर्श का जीवंत उदाहरण है। श्रीराम को "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा गया है, जिसका अर्थ है वह पुरुष जिसने जीवन की प्रत्येक मर्यादा का पूर्ण और सर्वोत्तम पालन किया। उनका जीवन इस सत्य स्वरूप को स्थापित करता है कि मनुष्य यदि धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर अडिग रहे, तो वह स्वयं को उच्चतर स्तर प्राप्त कर सकता है। शास्त्र की दृष्टि से वाल्मिकी रामायण, रामचरित मानस और पुराणों...

*संसद में गूंजा पत्रकारों का मुद्दा: सुरक्षा कानून की मांग से देशभर के मीडिया संगठनों में हलचल*

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*संसद में गूंजा पत्रकारों का मुद्दा: सुरक्षा कानून की मांग से देशभर के मीडिया संगठनों में हलचल* रिपोर्टर, सुरेश कुमार शर्मा  नई दिल्ली। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक बड़ी आवाज 27 मार्च 2026 को संसद में गूंजी, जब राज्यसभा में पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। यह आवाज केवल एक मांग नहीं, बल्कि देशभर के लाखों पत्रकारों के हक और सम्मान की पुकार बनकर सामने आई। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग, जो लंबे समय से पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए संघर्षरत है। अब अपने मिशन को निर्णायक मोड़ पर ले आया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संदीप कुमार के सतत प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश के होशंगाबाद से राज्यसभा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने संसद में इस गंभीर मुद्दे को उठाकर पूरे सिस्टम को सोचने पर मजबूर कर दिया। पत्रकारिता पेशा नहीं, लोकतंत्र की आत्मा है। सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने राज्यसभा में कहा कि  पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन है। यह लोकतंत्र की आत्मा है, जो सत्ता को जवाबदेह बनाती है। और समाज को जागरूक करती है।  उनके...

*नाई समाज का शेर दहाड़ा: जौनपुर के वंश शर्मा ने UPSC फतह कर रच दिया इतिहास, पूरे देश में गूंजा नाम*

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*नाई समाज का शेर दहाड़ा: जौनपुर के वंश शर्मा ने UPSC फतह कर रच दिया इतिहास, पूरे देश में गूंजा नाम* रिपोर्टर, सुरेश कुमार शर्मा  जौनपुर। एक छोटी सी दुकान, सीमित संसाधन लेकिन हौसले आसमान से भी ऊंचे। जौनपुर के थाना लाइन बाजार क्षेत्र स्थित पॉलिटेक्निक चौराहे से उठी एक कहानी आज पूरे देश में गूंज रही है। नंदवंशी (नाई/सैन/सविता) समाज के होनहार बेटे वंश शर्मा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा क्वालीफाई कर ऐसा परचम लहराया है। कि हर एक दिल गर्व से भर उठा है। जिस परिवार की आजीविका एक छोटी सी हेयर कटिंग की दुकान से चलती हो। उस परिवार के बेटे ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक जीतकर यह साबित कर दिया है।‌ कि  हालात नहीं, हौसले तय करते हैं। मुकाम  इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट के संस्थापक/राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा स्वयं उनके आवास पहुंचे। उन्होंने वंश शर्मा को माला पहनाकर, गोल्ड मेडल एवं सम्मान पत्र देकर भव्य सम्मान किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। यह पल न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव का क्षण बन गया। संघर्ष से स...

उर्दू आख़िर किसकी है?

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उर्दू आख़िर किसकी है? “उर्दू हम पर मुसल्लत की गई है, ये मुसलमानों की भाषा नहीं है”—मुशायरों की महफ़िलों में यह जुमला अक्सर सुनाई देता है। दूसरी तरफ़ हम ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ का फ़ख्र से ज़िक्र करते नहीं थकते। सवाल यह है कि क्या हमारी अदबी महफ़िलें भी उसी तहज़ीब की सही तर्जुमानी कर रही हैं? हक़ीक़त यह है कि जब मुशायरों और अदबी मंचों की नुमाइंदगी पर नज़र डाली जाए, तो ग़ैर-मुस्लिम उर्दू शायरों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई देती है—ख़ास तौर पर वे शायर, जो उर्दू के फ़रोग़ के लिए खामोशी से लगातार काम कर रहे हैं और फ़न के एतिबार से किसी भी तरह कमतर नहीं हैं। दिलचस्प यह है कि जिन महफ़िलों में “बड़े नाम” और भारी-भरकम मेहनताना होता है, वहाँ इन शायरों की शिरकत लगभग नदारद रहती है। जबकि कुछ चुनिंदा, सीमित दायरों में आयोजित महफ़िलों में यही शायर पूरी तादाद में नज़र आते हैं। यह तज़ाद (विरोधाभास) कई सवाल खड़े करता है। सबसे अहम सवाल—आख़िर उर्दू है किसकी? अगर उर्दू वाक़ई सबकी ज़बान है, तो फिर अदबी मंचों पर यह बराबरी क्यों नहीं दिखाई देती? क्या यह माना जाए कि ग़ैर-मुस्लिम शायरों को शायरी का सलीक़ा न...

श्री राम नवमी पर मधुर वाणी और भक्ति का संदेश

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श्री राम नवमी पर मधुर वाणी और भक्ति का संदेश मुंबई:भांडुप पश्चिम लेक रोड स्थित सुप्रसिद्ध मारूति मंदिर में  श्री राम नवमी पर प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ डॉ. अजय रविंद्र कुंभार ने  भक्तों को प्रेरणादायक आध्यात्मिक संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने तुलसीदास जी के एक महत्वपूर्ण संदेश को साझा करते हुए कहा कि जीवन में मधुर वाणी का अत्यंत महत्व है। कठोर शब्द मन में दूरी पैदा करते हैं, जबकि मधुर वाणी प्रेम और भक्ति को बढ़ाती है। उन्होंने भक्तों को क्रोध, अहंकार और कठोर स्वभाव त्यागने तथा सरल, विनम्र और करुणामय स्वभाव अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि शुद्ध वाणी ही शुद्ध मन का प्रतीक है, जो सच्ची भक्ति के लिए आवश्यक है। इस संदेश ने सभी भक्तों को गहराई से प्रभावित किया और वातावरण आध्यात्मिक बन गया। मंदिर ट्रस्टी  परशुराम कोपरकर, संजिवा पुजारी एवं सभी आयोजकों का विशेष आभार व्यक्त किया गया।