*अनुरोध मत करना।**-------- मुक्तक कार गिरीश कुमार गिरीश*
*अनुरोध मत करना।* *-------- मुक्तक कार गिरीश कुमार गिरीश* रहस्यों से भरी उलझी हुई है गूढ़ है भाषा।। सुलझ जाये तो जानूँ मैं हो पूरी काश अभिलाषा।। मुहब्बत प्यार और मनुहार लिखना तो सरल है पर - कभी लिख ही नहीं सकता कोई स्पष्ट परिभाषा।। मेरे इज़हार से पहले ही वो इन्कार कर बैठे।। सुकोमल दिल को अपने बेवजह बेजार कर बैठे।। सुकूँ और चैन गायब दृग विकल बेचैन रहते हैं- हुई है भूल मुझसे पत्थरों से प्यार कर बैठे।। प्रगति की राह में बाधा कभी अवरोध मत करना।। बिखर जाओगे तिनके सा कभी प्रतिरोध मत करना।। तुम्हारे सर पटकने से तो हासिल कुछ नहीं होगा- सुनेगें ही नहीं पत्थर कभी अनुरोध मत करना।। -------------------9919667469