नसीहत हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी
नसीहत हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी नसीहत हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी।। बंधी है आंख पर पट्टी जो एक दिन खोल देगी।। तुम्हारे कारनामे छिप नहीं सकते असंभव है- गलत फ़हमी में मत रहना ये मूरत बोल देगी।। असंभव है कभी पानी में पत्थर गल नहीं सकता।। लिखा है जो मुकद्दर में कभी भी टल नहीं सकता।। जरूरी है समन्दर नदियों की औक़ात ही क्या है- अलावा सीप के मोती कहीं भी ढ़ल नहीं सकता।। झुकाकर सर किसी से प्रार्थना करना नहीं सीखे।। तुम्हारी भूल है क्यो साधना करना नहीं सीखे।। मैं चातक हूँ मुझे स्वाति के जल से सिर्फ मतलब है- कभी भी बादलों से याचना करना नहीं सीखे।। बगावत कर नहीं सकते जो बुजदिल दर्द सहते हैं।। बहुत कम लोग है जो धार के विपरीत बहते हैं।। कभी भी भूल कर परिणाम की चिंता नहीं करते- मेरी आदत है सच्चाई हमेशा खुल के कहते हैं।। कभी सूखी नदी ठहरी कभी बहती रवानी में।। हज़ारों मोड़ आते हैं सभी की ज़िन्दगानी में।। कोई रोता कोई हंसता मिला सब की अलग किस्मत- बहुत नज़दीक से देखा है दुनियाँ कहानी में।। --------------9919...