पुणे की घटना, आखिर समाज कब सबक सीखेगा ?– अनिल बारी ,समाज चिंतक
पुणे की घटना, आखिर समाज कब सबक सीखेगा ? – अनिल बारी ,समाज चिंतक जब किसी माँ की गोद से उसका बेटा छिन जाता है, तब केवल एक इंसान की मृत्यु नहीं होती, बल्कि एक परिवार के सपने, उम्मीदें और खुशियाँ भी उसी के साथ दम तोड़ देती हैं।"पुणे की हालिया घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक ऐसा मामला, जिसने हर माता-पिता, हर युवा और पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इस मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निर्णय न्यायालय करेगा, इसलिए किसी भी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं है। लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई ऐसे प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करना समय की मांग है। जिस घर में कुछ दिनों बाद शहनाइयाँ बजने वाली थीं, जहाँ विवाह की तैयारियाँ चल रही थीं, जहाँ माता-पिता अपने बेटे के नए जीवन के सपने देख रहे थे, आज उसी घर में सन्नाटा, आँसू और मातम है। दूसरी ओर एक और परिवार भी गंभीर संकट से गुजर रहा है। यह केवल दो परिवारों की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है। केतन के पिता का दर्द मीडिया में दिए गए अपने सार्वजनिक बयान में केतन के पिता विशाल अ...