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मैनपुर में मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर का संकल्प साकार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए डॉ. अनील काशी मुरारका

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मैनपुर में मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर का संकल्प साकार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए डॉ. अनील काशी मुरारका  गाजीपुर। मुंबई के प्रख्यात समाजसेवी डॉ. अनील काशी मुरारका ने अप्रैल 2024 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद स्थित मैनपुर गांव में जिस शिव मंदिर का शिलान्यास किया था तथा मंदिर निर्माण के लिए मुरारका परिवार की तरफ से एक बड़ी धनराशि प्रदान की थी, वहां भव्य श्री मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर बनकर तैयार हो गया इस मंदिर निर्माण में गांव के लोगों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा। डाक्टर मुरारका ने आज  पूरी श्रद्धा के साथ गांव वालों के बीच मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए। यही नहीं उन्होंने आगे भी यहां एक भव्य गणेश मंदिर बनवाने का वायदा किया। डॉ मुरारका ने मंदिर निर्माण के लिए सहयोग राशि अपनी मां मीनादेवी काशीप्रसाद मुरारका, बहन मनीषा मुरारका–रुईया एवं अपने पूर्वजों की पावन स्मृति में सीबी मुरारका चैरिटेबल ट्रस्ट मुंबई–लक्ष्मणगढ़ राजस्थान की तरफ से प्रदान किया। डॉ मुरारका को इस गांव तक लाने का पूरा श्रेय इसी गांव के मूल निवासी तथा मुंबई के स्वतंत्र...

*क्या कानून का भय अपराधियों में नहीं है*

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*क्या कानून का भय अपराधियों में नहीं है*       जिस तरह की घटनाएं आजकल भारत देश में हो रही हैं।वह बेहद चिंतनीय हैं। संविधान सबको जीने खाने रहने का मौलिक अधिकार देता है।मगर लगता नहीं कि वह अधिकार शरीफ और सज्जन लोगों को है।जिस तरह के आये दिन समाचार देखने सुनने पढ़ने को मिल रहे हैं।उससे तो नहीं लगता कि शरीफ और सरल सभ्य लोगों को सुचारु रूप से जीने यात्रा करने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का अधिकार है।ऐसी ऐसी हृदयविदारक घटनाएं घटित हो रही हैं कि शब्द नहीं मिल रहे कि क्या कहूॅं। कहीं सामूहिक बलात्कार हो रहे हैं। कहीं सामूहिक बलात्कार के साथ निर्दयता की सारी हदें तोड़ दी जा रही हैं। कहीं तीन तीन साल की बच्चियों के साथ आये दिन बलात्कार और हत्या की खबरें अखबार और टीवी की सुर्खियां बनी हुई हैं।छी: घिन आती है ऐसे विद्रुप समाज को देखकर।बड़े मजे की बात ए है कि ऐसे अपराधियों को बचाने के लिए बड़े बड़े वकील मुकदमा लड़ते हैं।समाज के रसूखदार लोग भी अपने रसूख का उपयोग करते हैं।हर सम्भव प्रयास करते हैं।इसीलिए शायद अपराधी बेखौफ हैं।          घटनाएं तो ...

नसीहत हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी

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नसीहत  हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी नसीहत  हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी।।  बंधी है आंख पर पट्टी जो एक दिन खोल देगी।।  तुम्हारे कारनामे छिप नहीं सकते असंभव है- गलत फ़हमी में मत रहना ये मूरत बोल देगी।। असंभव है कभी पानी में पत्थर गल नहीं सकता।।  लिखा है जो मुकद्दर में कभी भी टल नहीं सकता।।  जरूरी है समन्दर नदियों की औक़ात ही क्या है- अलावा सीप के मोती कहीं भी ढ़ल नहीं सकता।। झुकाकर सर किसी से प्रार्थना करना नहीं सीखे।।  तुम्हारी भूल है क्यो साधना करना नहीं सीखे।।  मैं चातक हूँ मुझे स्वाति के जल से सिर्फ मतलब है- कभी भी बादलों से याचना करना नहीं सीखे।। बगावत कर नहीं सकते जो बुजदिल दर्द सहते हैं।।  बहुत कम लोग है जो धार के विपरीत बहते हैं।।  कभी भी भूल कर परिणाम की चिंता नहीं करते- मेरी आदत है सच्चाई हमेशा खुल के कहते हैं।। कभी सूखी नदी ठहरी कभी बहती रवानी में।।  हज़ारों मोड़ आते हैं सभी की ज़िन्दगानी में।।  कोई रोता कोई हंसता मिला सब की अलग किस्मत- बहुत नज़दीक से देखा है दुनियाँ कहानी में।। --------------9919...

अधूरे रह गये अरमान बाबूजी

अधूरे रह गये अरमान बाबूजी तुम्हें खो कर अधूरे रह गये अरमान बाबूजी।।  है बौने शब्द कर सकते नहीं गुनगान बाबूजी।।  मधुर स्मृतियों को दिल में संजोये आज भी हैं हम- नमन् सत् बार करते हैं मेरे अभिमान बाबूजी।। कोई समता नहीं जग में तुम्हारा प्यार बाबूजी।।  हिमालय थे अडिग कुल के मेरे आधार बाबूजी।।  हृदय आकाश से ऊंचा समन्दर की थी गहराई- छलकता था दृगों से नेह अपरम्पार बाबूजी।। हमारे जन्मदाता और पालन हार बाबूजी।।  समन्दर दिल में लहराता था निर्मल प्यार  बाबूजी।।  पिता परमात्मा का रूप पावन नमन् करते हैं- हमारी नन्हीं आँखों के वृहद संसार बाबूजी।। निरा पतझड़ में मेरे वास्ते मधुमास बाबूजी।।   उपस्थिति आप की होती हमें आभास बाबूजी।।  हे स्मृति शेष तन से है विलग मन में बसे हो तुम- हृदय में आज भी करते हैं मेरे वास बाबूजी।। इरादों के तो सचमुच आप थे चट्टान बाबूजी।।   डिगा पाया नहीं कोई अडिग ईमान बाबूजी।।  मुझे पल पल सताती याद आती है  नमन् सत् सत्- हृदय से प्यार करते हैं सदा सम्मान बाबूजी।। ---------9919667469