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*.‘नारी की राजनैतिक चुनौतियां और नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विषयक निबंध प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत** .*नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकतांत्रिक व्यवस्था को सार्थकता प्रदान करने वाला: सर्वेश कुमार सिंह* *नारी की राजनैतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम विषय पर द्विदिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न*

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 *.‘नारी की राजनैतिक चुनौतियां और नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ विषयक निबंध प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत**  .*नारी शक्ति वंदन अधिनियम  लोकतांत्रिक व्यवस्था को सार्थकता प्रदान करने वाला: सर्वेश कुमार सिंह*   *नारी की राजनैतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम विषय पर द्विदिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न*  लखनऊ, 01 सितम्बर 2026। उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, लखनऊ एवं पं. दीन दयाल उपाध्याय राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजाजीपुरम, लखनऊ के संयुक्त तत्त्वावधान में “नारी की राजनैतिक चुनौतियां एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम” विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं का पुरस्कार वितरण एवं संगोष्ठी मंगलवार को महाविद्यालय परिसर में हुई।  उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान के निदेशक श्री सर्वेश कुमार सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. डॉ. शिवानी श्रीवास्तव ने की तथा संचालन हिन्दी विभाग की प्रभारी प्रो. डॉ. सुरंगमा यादव ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां वीणापाणि की प्रतिमा के समक्ष अतिथियों द्वारा दीप प्रज...

नवागत एसडीएम मड़ियाहूं अजय कुमार उपाध्याय का प्रबुद्ध जन ने किया भव्य स्वागत

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नवागत एसडीएम  मड़ियाहूं अजय कुमार उपाध्याय का प्रबुद्ध जन ने किया भव्य स्वागत मड़ियाहूं, जौनपुर। मड़ियाहूं तहसील के नवनियुक्त उपजिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय का मंगलवार को क्षेत्र के विद्वत एवं शिक्षाविद् समाज ने अंगवस्त्रम भेंट कर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। उल्लेखनीय है कि नवागत एसडीएम अजय कुमार उपाध्याय करीब 17 वर्ष पूर्व मड़ियाहूं तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके व्यक्तित्व, प्रशासनिक दक्षता, कार्यशैली और दूरदर्शिता से क्षेत्र के लोग पूर्व से ही परिचित हैं। इस अवसर पर मड़ियाहूं पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एस. के. पाठक ने कहा कि “अजय कुमार उपाध्याय एक संवेदनशील, कर्मठ और दूरदर्शी प्रशासनिक अधिकारी हैं। मड़ियाहूं से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। उनके अनुभव और कार्यकुशलता का लाभ निश्चित रूप से क्षेत्र की जनता को मिलेगा। उनका पुनः मड़ियाहूं आना हम सभी के लिए प्रसन्नता और गौरव का विषय है।” इस अवसर पर जनता इंटर कॉलेज बरसठी के प्रधानाचार्य डॉ. राजेश त्रिपाठी, दिनकर इंटर कॉलेज जमालापुर के पूर्व प्रधानाचार्य सूर्यभान सिंह, बेलवा इंट...

संस्कृत विद्यालय के संस्थापक व्याकरणाचार्य पंडित राज नारायण मिश्र का निधन

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संस्कृत विद्यालय के संस्थापक व्याकरणाचार्य पंडित राज नारायण मिश्र का निधन जौनपुर। जनपद के महराजगंज थाना क्षेत्र के कोल ग्रामसभा निवासी एवं श्री उमा महेश्वर संस्कृत महाविद्यालय के संस्थापक व पूर्व प्रधानाचार्य, महान विद्वान व्याकरणाचार्य पं. राज नारायण मिश्र का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।उनके पुत्र डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने बताया कि पं. राज नारायण मिश्र का वाराणसी स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हुआ। वह अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से क्षेत्र ने शिक्षा और संस्कृत के क्षेत्र में अपना एक बड़ा विद्वान खो दिया है। पं. राज नारायण मिश्र ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने मिर्जापुर में संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य पद पर कार्य किया, लेकिन क्षेत्र के विकास और ग्रामीण अंचल में बेहतर संस्कृत शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नौकरी छोड़कर अपने पैतृक गांव लौट आए। इसके बाद उन्होंने श्री उमा महेश्वर संस्कृत विद्यालय की नींव रखी।विद्यालय की स्थापना के बाद उन्हो...

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा ताई अजित पवार से मिला जैन समाज का प्रतिनिधिमंडल

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उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा ताई अजित पवार से मिला जैन समाज का प्रतिनिधिमंडल मुंबई। राकांपा (अजित पवार गुट) के महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव व पूर्व राज्य मंत्री डाॅ आसिफ शेख के मार्गदर्शन एवं श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपाध्यक्ष संजय शाह के नेतृत्व में जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा ताई अजित पवार से भेंट कर उनका सम्मान किया। इस अवसर पर जैन समाज की शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ प्रस्तावित जैन शिक्षा संकुल के लिए भूमि उपलब्ध कराने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।  इस अवसर पर श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ, मुंबई के उपाध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह, जैन अल्पसंख्यक सेवा संस्था की महिला अध्यक्ष अल्पा शाह, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार राजदूत संगठन के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष एवं 'लंदन हेराल्ड' के भारत संस्करण प्रमुख राजेश उपाध्याय, युवा समाजसेवी पंकज उपाध्याय ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा ताई अजित पवार का भव्य सम्मान किया। प्रतिनिधिमंडल में जैन समाज के विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने जैन ...

हम भारतीय हैं, पर भारत में ही क्यों नहीं?

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हम भारतीय हैं, पर भारत में ही क्यों नहीं? एक गहरा सत्य है जो हम सबने महसूस किया है। जब हम विदेश की धरती पर होते हैं और कोई पूछता है - Where are you from? तो हमारा जवाब एक ही होता है - We are from India. हम कभी नहीं कहते कि हम महाराष्ट्र से हैं, हम UP के भैया हैं, हम बिहारी हैं, हम मद्रासी हैं, हम गुजराती हैं। वहाँ हमारी पहचान सिर्फ एक है - भारतीय। और दुनिया भी हमें उसी एक नाम से पहचानती है - Indian. फिर सवाल उठता है, वही भारतीय जब अपने ही देश में लौटता है तो उसे टुकड़ों में क्यों बांट दिया जाता है? यहाँ आते ही हम मराठी हो जाते हैं, हिंदी-भाषी हो जाते हैं, उत्तर भारतीय हो जाते हैं, दक्षिण भारतीय हो जाते हैं। यहाँ हम ब्राह्मण, ठाकुर, दलित, सवर्ण, पिछड़ा हो जाते हैं। हिन्दू-मुसलमान हो जाते हैं। ये बंटवारा किसने किया? सच तो यह है कि यह बंटवारा आज का नहीं है। इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। वैदिक काल की वर्ण-व्यवस्था ने काम के आधार पर जो वर्गीकरण किया था, वह धीरे-धीरे जन्म के बंधन में जकड़ गया। फिर मुगल आए, उन्होंने मजहब के नाम पर पहचाना। फिर अंग्रेज आए, उन्होंने तो इस फूट को ही शासन ...

तने नहीं, ये समय के स्तंभ हैं,बीच में जो रिक्त है, वही तो जीवन है।

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तने नहीं, ये समय के स्तंभ हैं, बीच में जो रिक्त है, वही तो जीवन है। हरा भरा जो दिख रहा आगे, वो वर्तमान है, जो ठहरा-ठहरा है, और जो नीला है, गहरा, अथाह, वो भीतर का मन है, जो बहता है। जड़ें उलझी हैं, जैसे स्मृतियाँ, शाखें फैलीं, जैसे आकांक्षाएँ, और इन सबके बीच जो खाली जगह बची, वही तो है जहाँ हम जीते हैं। नीला न तो जल है, न आकाश, वो तो वह शून्य है, जिसे भरने को हम हरा-भरा अर्थ देते हैं। आनंद पाण्डेय "केवल"

"एक घर, एक झील, और पूरा जीवन"

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"एक घर, एक झील, और पूरा जीवन" पहाड़ खड़े हैं, जैसे मौन प्रश्न, झील पड़ी है, जैसे गहरा उत्तर, और किनारे पर एक छोटा सा घर, जैसे मन का एक छोटा सा घर। हम भी तो ऐसे ही जीते हैं, चारों ओर अचल पहाड़-से अहंकार, बीच में एक मन की झील, जो सब कुछ प्रतिबिंबित करती है, पर खुद स्थिर रहती है। वो घर छोटा है, पर पूरा है, क्योंकि उसे पहाड़ों की विशालता चाहिए नहीं, उसे बस झील का साथ चाहिए, और थोड़ी सी धूप। जीवन का सत्य भी यही है बड़ा बनने में नहीं, किनारे पर टिके रहने में है, शांत जल के साथ।  आनंद पाण्डेय "केवल"