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Prof. V. Ravi Completes Two years as Principal of Sri Venkateswara College

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Prof. V. Ravi Completes Two years as Principal of Sri Venkateswara College Delhi, Vikas Mishra On the completion of two years of Prof. V. Ravi serving as the Principal of Sri Venkateswara College, University of Delhi, the College fraternity extended their heartfelt congratulations and best wishes to him. On this occasion, under the leadership of the Administrative Officer, staff members from the administration, accounts department, and establishment branch met the Principal to congratulate him on his successful and remarkable tenure and appreciated his effective leadership. Administrative Officer Pawan Kumar Pandey, in his message, said: “Sir, your visionary leadership, unwavering dedication, and strong commitment to academic excellence have significantly contributed to the progress and development of the institution. Under your capable guidance, the College has achieved many notable milestones and continues to inspire both students and staff. These two years stand as a tes...

*दिन वह....अब दूर नहीं है....!**----- जितेन्द्र कुमार दुबे*

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*दिन वह....अब दूर नहीं है....!* *----- जितेन्द्र कुमार दुबे* पता नहीं क्यों.....? उसने कह दिया.... कि मुझमें कोई सऊर नहीं है.... मान भी लिया आसानी से.... दुनियावालों ने इसको....क्योंकि.... सही-गलत का निर्णय करने का... यहाँ किसी के पास भी.....! समय भरपूर नहीं है.... पर इतना तो यक़ीन है मुझको कि... दुनिया वालों ने ही उसे.... कुछ ऐसा ही समझाया होगा... पाठ यही हर पल पढ़ाया होगा.... इसलिये मानता हूँ मैं यही....कि.... इसमें उसका...कोई कसूर नहीं है... खूब मालूम है उसको....कि... दुनिया में यार उसका....! कत्तई मशहूर नही है.... लेकिन संग इसके जानती है... ख़ूब अच्छे से वह यह भी... कि...उसकी ही बंद आँखों में...! कैद है....नाज़ुक यार उसका... और....लाख कह ले दुनिया....पर... यार उसका.....मफ़रूर नहीं है.... हुनर कमजोर हो सकता है मेरा...! पर पता है उसको....यह कि.... प्यार से....पलायन का तो.....! इस पगले के यहाँ, कोई दस्तूर नहीं है..... तमाम दगाबाजियाँ देखी है, दुनिया भर में उसने.... पर....मुझे मालूम है यह कि... वफादारी पर खुद की....! वह कत्तई मगरूर नहीं है.... फ़िर आप ही बताओ मित्रों.... सौदा सस्...

प्रकृति के संरक्षण में छोटी-छोटी पहल भी बड़े बदलाव ला सकती है : प्रोफेसर सरिता श्रीवास्तव

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प्रकृति के संरक्षण में छोटी-छोटी पहल भी बड़े बदलाव ला सकती है : प्रोफेसर सरिता श्रीवास्तव  प्रोफेसर सरिता श्रीवास्तव # अथर्वन फाउंडेशन की सदस्य प्रो.सरिता श्रीवास्तव ने वृक्षारोपण कर जन्मदिन मनाया  अश्वनी तिवारी  प्रयागराज। शनिवार को अथर्वन फाउंडेशन के सौजन्य से चैथम लाइंस, एनसीसी फील्ड में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के साथ ही फाउंडेशन की सक्रिय सदस्य प्रोफेसर डॉ. सरिता श्रीवास्तव का जन्मदिन भी उत्साहपूर्वक मनाया गया। उक्त अवसर पर वृक्षारोपण करने के पश्चात् डॉ. सरिता श्रीवास्तव द्वारा संस्था को भेंट किए ट्री गार्ड्स से संरक्षित किया गया। इसी क्रम में संस्था सदस्य डॉ. प्रियंवदा मिश्रा संप्रति: स.अ.किसान इण्टर कॉलेज सरायख़्वाजा, जौनपुर के जन्मदिन पर पौधारोपण किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष बृजेश मिश्रा, उपाध्यक्ष डॉ. रश्मि भार्गव व शैलेन्द्र सिंह की गौरवमयी उपस्थिति रही एवं कार्यक्रम समन्वयक संस्था सचिव डॉ. कंचन मिश्रा द्वारा किया गया। उक्त अवसर पर हेमंत कुमार, अर्चना गुप्ता ,कल्पना,राखी, प्रीति ,अर्चना वर्धन,...

*रक्तदान से जनसेवा की नई क्रांति: मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट छत्तीसगढ़ का धमाकेदार आगाज़*

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*रक्तदान से जनसेवा की नई क्रांति: मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट छत्तीसगढ़ का धमाकेदार आगाज़* रिपोर्टर, सुरेश कुमार शर्मा  छत्तीसगढ़ राज्य, की धरती से आज एक ऐसी प्रेरणादायक पहल की शुरुआत हुई है। जिसने समाजसेवा के क्षेत्र में नई ऊर्जा भर दी है। मां धर्मा देवी फाउंडेशन ट्रस्ट छत्तीसगढ़, रायपुर ने अपने रक्तदाता सदस्यता अभियान का भव्य शुभारंभ करते हुए मानवता की सेवा का एक सशक्त संदेश दिया है। इस अभियान की शुरुआत श्री नारायण हॉस्पिटल में हुई, जहां ट्रस्ट के प्रदेश महामंत्री जे. संतोष के परिवार ने मिसाल कायम करते हुए स्वयं आगे आकर रक्तदान किया। उनकी धर्मपत्नी जामी नारायनमा और पुत्र जामी तारकेश राव ने रक्तदान कर यह साबित कर दिया कि सेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से होती है। यह तो सिर्फ एक शुरुआत नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। ट्रस्ट के इस कदम ने न केवल अपने सदस्यों के दिलों में गर्व और जोश भर दिया है। बल्कि अन्य सामाजिक संगठनों के बीच भी हलचल मचा दी है। *गर्व का विषय क्यों* परिवार सहित सेवा की मिसाल पेश करना रक्तदान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प संगठन के हर सदस्य में सेवा ...

पति और बच्चों की लंबी उम्र का वरदान मांगने का पर्व गणगौर– डॉ मंजू लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

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पति और बच्चों की लंबी उम्र का वरदान मांगने का पर्व गणगौर – डॉ मंजू लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार पति प्रेम का प्रतीक है गणगौर, चिर पुरातन और चिर नूतन है गणगौर, फागुन कृष्ण की एकम से क्षेत्र शुक्ला की तृतीय तक होती है गणगौर पूजा,  माता जानकी ने भी मनचाहा वर पाने किया था गौरी पूजन, मां पार्वती ने की घोर तपस्या शिवजी  को वर रूप पाने  की खातिर, शिवजी ने प्रसन्न होकर मां पार्वती से ब्याह रचाया, पत्नी को इतना स्नेह और सम्मान दिया उसे अपना आधा अंग ही बना लिया, राजस्थान की सूखी माटी में वसंत के आते ही उत्साह और उल्लास की धूम मच जाती हैं, कुंवारी कन्याएं 16 दिन तक बड़े मनोयोग से शिवजी को अपना जीजा मानते हुए सुंदर रंग बिरंगे वस्त्र पहनकर होली के दूसरे दिन से ही करने लगती है ईसर और गोरा की पूजा, शीतला सप्तमी या अष्टमी को बड़ी गणगौर बिठाई जाती हैं, चिकनी मिट्टी से शिव (ईसरजी) पार्वती (गणगौर) कानीराम (कृष्णा) रोआं (सुभद्रा) और मालिन की मूर्तियां बनाई जाती हैं उनका श्रृंगार  किया जाता हैं। सुबह दोपहर रात को गीत गाए जाते हैं। वंश के फैलाव के प्रतीक दूब और फूल लाये जाते हैं, ...

निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता के लिए राजकुमार सिंह को तरुण कला संगम पत्रकारिता पुरस्कार

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निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता के लिए राजकुमार सिंह को तरुण कला संगम पत्रकारिता पुरस्कार  मुंबई। महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था तरुण कला संगम द्वारा नवभारत टाइम्स के सहायक संपादक राजकुमार सिंह को वर्ष 2025 का तरुण कला संगम पत्रकारिता पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ सचदेव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के माध्यम से राजकुमार सिंह ने आम जनमानस को जगाने तथा राजनीति से जुड़े लोगों को सही दिशा दिखाने का काम किया है । इस बैठक में वरिष्ठ पत्रकार राघवेंद्र द्विवेदी तथा वरिष्ठ पत्रकार ब्रजमोहन पांडे  शामिल रहे। उत्कृष्ट पत्रकारिता के चलते गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार समेत दर्जनों पुरस्कार से अलंकृत राजकुमार सिंह पहले ऐसे पत्रकार रहे, जिन्होंने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2017 में,बाबूराव विष्णू पराडकर उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार में मिले 51,000 रुपए को तत्काल मुख्यमंत्री सहायता निधि में  जमा कर दिया था ताकि गरीब मरीजों का उपचार हो सके। तरुण कला संगम के संस्थापक अध्यक...

युवा २०२६ के अवसर पर हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का ‘शांति निकेतन’ पर गौरव पाण्डेय का संबोधन

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युवा २०२६ के अवसर पर  हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का ‘शांति निकेतन’ पर गौरव पाण्डेय का संबोधन  आज हमारे समय में जब सारी समस्याओं के समाधान शहरों के नाम बदलकर खोजे जा रहे हैं और चारों ओर युद्ध-युद्ध का शोर है ऐसी स्थिति में ‘शांति निकेतन’ शब्द सुनना और इस पर बात करना भी सुकून देने वाला है। ‘शांति निकेतन’ यह शब्द सुनने में ही कितना सुकून भरा है जैसे कोई सपनों की जगह । रवीन्द्रनाथ ठाकुर के सपनों का-विश्वनीड़- शांति निकेतन । जहाँ शिक्षा प्रकृति, कला, लोक और विश्व-संवाद के साथ जुड़ी थी । जिसका आदर्श था—“यत्र विश्वं भवत्येकनीडम्” अर्थात् जहाँ सारा संसार एक घोंसले के समान हो जाता है। मूल शांतिनिकेतन वृक्षों की छाया में ही रचा बसा था । यह केवल एक परिसर नहीं बल्कि सांस्कृतिक प्रयोग-भूमि था। आगे चलकर यही परिसर विश्व-भारती विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हुआ, जब 1930 में द्विवेदी जी शांति निकेतन पहुँचे, तब वे अपने साथ शास्त्रीय अनुशासन लेकर आए । लेकिन यहाँ उन्हें एक ऐसा वातावरण मिला, जहाँ— शिक्षा प्रकृति के बीच होती थी। जहाँ भारतीय परंपरा का सम्मान था, लेकिन संकीर्णता नहीं थी । वि...