*भारत की प्रगति में योगदान देने वाला आज भी परेशान है*
*भारत की प्रगति में योगदान देने वाला आज भी परेशान है* आजादी के पहले राजतंत्र था तब आमजन बहुत सताये जाते थे।राजाओं से कम जमींदारों से अधिक।एक कहावत है न चाय से अधिक केतली गर्म।उस खंडकाल में ऐसा ही था। जमींदार लोग जनता के साथ अत्याचार करते थे।इसी अत्याचार को खत्म कर आम आदमियों के जीवन में भी खुशहाली आये।इसके लिए भारत के नौजवानों ने क्रांति का विगुल बजा दिया।राजशाही को खत्म करने में अनेकों ने बलिदान दिया।जिसके चलते राजतंत्र खत्म हुआ और प्रजातंत्र स्थापित हुआ। लोगों में खुशी का संचार हुआ। लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात।आम जनता अपना खून बहाती रही। कमरतोड़ मेहनत करती रही।देश का उत्थान हो इसलिए टैक्स भी देती रही।मगर सत्तासीन लोग अपने हर एशो-आराम के लिए काम पर लगे रहे।एक तरफ जनता जानवरों की तरह भोजन कर रही थी तो दूसरी तरफ कथित जनसेवक हर वो ऐशो आराम कर रहे थे।जो एक राजा करता है।विलासिता की सारी हदों को तोड़ रहे थे। कपड़े भारत में न बनते थे उनके न धुलते थे।सरकारी विमान से जहांपनाह सेविंग (दाढ़ी)बनवाने के लिए विदेश जाते थे।अब आप समझ चुके होंगे कि वो जनसेव...