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स्वयंसेवकत्व की अखंड यात्रा, ‘विठ्ठल’ से समाजमन के ‘विठ्ठलराव’ तक – प्रदीप बालकृष्ण भोईर, संगठन एवं प्रबंधन शास्त्र के अध्येता

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स्वयंसेवकत्व की अखंड यात्रा, ‘विठ्ठल’ से समाजमन के ‘विठ्ठलराव’ तक  – प्रदीप बालकृष्ण भोईर, संगठन एवं प्रबंधन शास्त्र के अध्येता  कुछ व्यक्तित्व पदों से बड़े होते हैं और कुछ अपने कार्य से। कुछ लोगों की पहचान उनके नाम के साथ जुड़े दायित्वों से होती है, तो कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी सबसे बड़ी पहचान उनका स्वयंसेवकत्व बन जाती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कोकण प्रांत कार्यवाह, शिक्षा क्षेत्र के अध्ययनशील नेतृत्व, समाजजीवन के कुशल समन्वयक और हजारों कार्यकर्ताओं के आत्मीय मार्गदर्शक श्री. विठ्ठल दुधाप्पा कांबले ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन सेवा, समर्पण, संगठन और संस्कारों की सतत साधना का पर्याय बन गया है। उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण करते हुए केवल एक व्यक्ति का परिचय नहीं मिलता, बल्कि संघ संस्कारों से निर्मित उस स्वयंसेवक की यात्रा सामने आती है, जिसने अपने जीवन को राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित कर दिया। एक कार्यक्रम में मंच संचालक ने उनके द्वारा निभाई जा रही अनेक जिम्मेदारियों का उल्लेख किया। भाषण के लिए खड़े होते ही उन्होंने अपनी सहज और ...

महाराष्ट्र के सभी आईटीआई के आधुनिकीकरण हेतु 5,400 करोड़ रुपए की घोषणा

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महाराष्ट्र के सभी आईटीआई के आधुनिकीकरण हेतु 5,400 करोड़ रुपए की घोषणा  सोलापुर । सोलापुर जिले के करमाला स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान का नाम परिवर्तित कर उसे ‘मदनदास देवी शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान’ नाम दिया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सह-सरकार्यवाह स्व. मदनदास देवी की राष्ट्रसेवा, शिक्षा तथा विद्यार्थियों के निर्माण में दिए गए योगदान के सम्मान में आयोजित नामकरण समारोह उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विधायक नारायण आबा पाटील, पूर्व विधायक राम सातपुते, करमाला नगराध्यक्ष श्रीमती मोहिनी सावंत, श्रीमती रश्मी बागल, व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण संचालक सतीश सूर्यवंशी, सह-निदेशक चंद्रशेखर ढेकणे, सह-आयुक्त श्रीमती संगीता खंदारे, व्यवसाय शिक्षा एवं प्रशिक्षण अधिकारी मनोज बिडकर, संस्था प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राठी, स्व. मदनदास देवी के ज्येष्ठ भ्राता खुशालदास देवी एवं राधेश्याम देवी, तथा राष्ट्रीय स्वयंस...

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों "अग्निशिला" विशेषांक का लोकार्पण

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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों "अग्निशिला" विशेषांक का लोकार्पण मुंबई के मलबार हिल स्थित वर्षा सरकारी निवासस्थान पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों "अग्निशिला" हिंदी मासिक के 22 वें स्थापना दिवस विशेषांक का लोकार्पण संपन्न हुआ। गत दो दशकों से "अग्निशिला" मासिक सामाजिक मुद्दों, जनहित, सूचना का अधिकार (RTI) और जनजागरण के क्षेत्र में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संपादक अनिल वेदव्यास गलगली के संपादकीय नेतृत्व में यह मासिक एक सशक्त जनआंदोलन बनकर उभरा है, जो समाज की बेचैनी, समस्याएं और परिवर्तन की आवाज़ को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने "अग्निशिला" की सामाजिक प्रतिबद्धता की सराहना की और संपादक अनिल गलगली को उनके कार्य के लिए बधाई देते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

मैनपुर में मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर का संकल्प साकार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए डॉ. अनील काशी मुरारका

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मैनपुर में मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर का संकल्प साकार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए डॉ. अनील काशी मुरारका  गाजीपुर। मुंबई के प्रख्यात समाजसेवी डॉ. अनील काशी मुरारका ने अप्रैल 2024 में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद स्थित मैनपुर गांव में जिस शिव मंदिर का शिलान्यास किया था तथा मंदिर निर्माण के लिए मुरारका परिवार की तरफ से एक बड़ी धनराशि प्रदान की थी, वहां भव्य श्री मनोकामनेश्वर महादेव मंदिर बनकर तैयार हो गया इस मंदिर निर्माण में गांव के लोगों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा। डाक्टर मुरारका ने आज  पूरी श्रद्धा के साथ गांव वालों के बीच मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए। यही नहीं उन्होंने आगे भी यहां एक भव्य गणेश मंदिर बनवाने का वायदा किया। डॉ मुरारका ने मंदिर निर्माण के लिए सहयोग राशि अपनी मां मीनादेवी काशीप्रसाद मुरारका, बहन मनीषा मुरारका–रुईया एवं अपने पूर्वजों की पावन स्मृति में सीबी मुरारका चैरिटेबल ट्रस्ट मुंबई–लक्ष्मणगढ़ राजस्थान की तरफ से प्रदान किया। डॉ मुरारका को इस गांव तक लाने का पूरा श्रेय इसी गांव के मूल निवासी तथा मुंबई के स्वतंत्र...

*क्या कानून का भय अपराधियों में नहीं है*

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*क्या कानून का भय अपराधियों में नहीं है*       जिस तरह की घटनाएं आजकल भारत देश में हो रही हैं।वह बेहद चिंतनीय हैं। संविधान सबको जीने खाने रहने का मौलिक अधिकार देता है।मगर लगता नहीं कि वह अधिकार शरीफ और सज्जन लोगों को है।जिस तरह के आये दिन समाचार देखने सुनने पढ़ने को मिल रहे हैं।उससे तो नहीं लगता कि शरीफ और सरल सभ्य लोगों को सुचारु रूप से जीने यात्रा करने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने का अधिकार है।ऐसी ऐसी हृदयविदारक घटनाएं घटित हो रही हैं कि शब्द नहीं मिल रहे कि क्या कहूॅं। कहीं सामूहिक बलात्कार हो रहे हैं। कहीं सामूहिक बलात्कार के साथ निर्दयता की सारी हदें तोड़ दी जा रही हैं। कहीं तीन तीन साल की बच्चियों के साथ आये दिन बलात्कार और हत्या की खबरें अखबार और टीवी की सुर्खियां बनी हुई हैं।छी: घिन आती है ऐसे विद्रुप समाज को देखकर।बड़े मजे की बात ए है कि ऐसे अपराधियों को बचाने के लिए बड़े बड़े वकील मुकदमा लड़ते हैं।समाज के रसूखदार लोग भी अपने रसूख का उपयोग करते हैं।हर सम्भव प्रयास करते हैं।इसीलिए शायद अपराधी बेखौफ हैं।          घटनाएं तो ...

नसीहत हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी

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नसीहत  हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी नसीहत  हमको तुम को दुनियाँ को अनमोल देगी।।  बंधी है आंख पर पट्टी जो एक दिन खोल देगी।।  तुम्हारे कारनामे छिप नहीं सकते असंभव है- गलत फ़हमी में मत रहना ये मूरत बोल देगी।। असंभव है कभी पानी में पत्थर गल नहीं सकता।।  लिखा है जो मुकद्दर में कभी भी टल नहीं सकता।।  जरूरी है समन्दर नदियों की औक़ात ही क्या है- अलावा सीप के मोती कहीं भी ढ़ल नहीं सकता।। झुकाकर सर किसी से प्रार्थना करना नहीं सीखे।।  तुम्हारी भूल है क्यो साधना करना नहीं सीखे।।  मैं चातक हूँ मुझे स्वाति के जल से सिर्फ मतलब है- कभी भी बादलों से याचना करना नहीं सीखे।। बगावत कर नहीं सकते जो बुजदिल दर्द सहते हैं।।  बहुत कम लोग है जो धार के विपरीत बहते हैं।।  कभी भी भूल कर परिणाम की चिंता नहीं करते- मेरी आदत है सच्चाई हमेशा खुल के कहते हैं।। कभी सूखी नदी ठहरी कभी बहती रवानी में।।  हज़ारों मोड़ आते हैं सभी की ज़िन्दगानी में।।  कोई रोता कोई हंसता मिला सब की अलग किस्मत- बहुत नज़दीक से देखा है दुनियाँ कहानी में।। --------------9919...

अधूरे रह गये अरमान बाबूजी

अधूरे रह गये अरमान बाबूजी तुम्हें खो कर अधूरे रह गये अरमान बाबूजी।।  है बौने शब्द कर सकते नहीं गुनगान बाबूजी।।  मधुर स्मृतियों को दिल में संजोये आज भी हैं हम- नमन् सत् बार करते हैं मेरे अभिमान बाबूजी।। कोई समता नहीं जग में तुम्हारा प्यार बाबूजी।।  हिमालय थे अडिग कुल के मेरे आधार बाबूजी।।  हृदय आकाश से ऊंचा समन्दर की थी गहराई- छलकता था दृगों से नेह अपरम्पार बाबूजी।। हमारे जन्मदाता और पालन हार बाबूजी।।  समन्दर दिल में लहराता था निर्मल प्यार  बाबूजी।।  पिता परमात्मा का रूप पावन नमन् करते हैं- हमारी नन्हीं आँखों के वृहद संसार बाबूजी।। निरा पतझड़ में मेरे वास्ते मधुमास बाबूजी।।   उपस्थिति आप की होती हमें आभास बाबूजी।।  हे स्मृति शेष तन से है विलग मन में बसे हो तुम- हृदय में आज भी करते हैं मेरे वास बाबूजी।। इरादों के तो सचमुच आप थे चट्टान बाबूजी।।   डिगा पाया नहीं कोई अडिग ईमान बाबूजी।।  मुझे पल पल सताती याद आती है  नमन् सत् सत्- हृदय से प्यार करते हैं सदा सम्मान बाबूजी।। ---------9919667469