प्रागैतिहासिक उपकरणों का अध्ययन मानव के संज्ञानात्मक एवं सांस्कृतिक विकास को समझने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है: प्रो.अजीत चतुर्वेदी
प्रागैतिहासिक उपकरणों का अध्ययन मानव के संज्ञानात्मक एवं सांस्कृतिक विकास को समझने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है: प्रो.अजीत चतुर्वेदी वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा शताब्दी समारोह (2025–2026) के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “स्टोरीज़ इन स्टोन: ए वर्कशॉपऑन प्रीहिस्टोरिक लिथिक्स” का उद्घाटन गुरुवार को भारती सभागार, बीएचयू में संपन्न हुआ। यह कार्यशाला प्रागैतिहासिक पत्थर उपकरणों के अध्ययन तथा मानव व्यवहार के पुनर्निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में पुरातत्व के अंतःविषयक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सुषमा घिल्डियाल, अधिष्ठाता, कला संकाय ने की। उन्होंने समकालीन परिप्रेक्ष्य में पुरातात्त्विक शोध की प्रासंगिकता पर बल देते हुए युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. प्रदीप क...