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आप्पासाहेब यशोदा जगन्नाथ बागल सर तर्फे आभार व धन्यवाद.

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आप्पासाहेब यशोदा जगन्नाथ बागल सर तर्फे आभार व धन्यवाद.  मुंबई :घाटकोपर पश्चिम येथील सहकार मित्र सुरेश डावरे महापालिका माध्यमिक  शिक्षक व कर्मचारी सहकारी पतसंस्थेत काल शनिवार, दिनांक 30  मे 2026  रोजी सहकार मित्र सुरेश डावरे महापालिका माध्यमिक शिक्षक व कर्मचारी सहकारी पतसंस्थेचे सन्माननीय सभासद श्री. रमाकांत जाधव  सर यांनी बृहन्मुंबई महानगरपालिका माध्यमिक विभाग चे नायगांव मनपा माध्यमिक शाळेचे ज्येष्ठ शिक्षक आप्पासाहेब यशोदा जगन्नाथ बागल सर यांच्या सेवापूर्तीच्या निमित्ताने संस्थेमध्ये उपस्थित राहून शाल श्रीफळ देऊन त्यांच्या  सन्मान केला. याप्रसंगी सन्माननीय संस्थापक अध्यक्ष श्री. सुरेश डावरे सर आणि सौ.विद्या सुरेश डावरे मॅडम  व सर्व संचालक मंडळ व कर्मचारी वृंद यांच्या उपस्थितीत हा सन्मान करण्यातआला. त्याबद्दल श्री रमाकांत जाधव व इतर सर्वांचे बागल सर यांनी सर्वांचे मनःपूर्वक आभार व धन्यवाद व्यक्त आज आपण आपल्या प्रदीर्घ सेवाप्रवासातून अधिकृतपणे निवृत्त होत आहात. अनेक वर्षांच्या कर्तव्यनिष्ठ, प्रामाणिक आणि यशस्वी सेवेनंतर आयुष्यातील...

अंत भला तो सब भला

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अंत भला तो सब भला इस प्रकार की सेवा संपन्नता के सुअवसर पर स्कूल की तरफ से आदर्श प्रिंसिपल श्री अंबरसिंग मगर सर की सेवा संपूर्ति  मौके पर उन्हें खुशी-खुशी विदाई दी गई। बृहन्मुंबई महानगर पालिका, माध्यमिक शिक्षा विभाग में एस . जी.बर्वे नगर म्युनिसिपल सेकेंडरी स्कूल, घाटकोपर (पश्चिम) के आदर्श प्रिंसिपल श्री अंबरसिंग सुभद्रा सुकदेव मगर सर सरकारी तय उम्र के अनुसार आज 31 मई, 2026 को सेवानिवृत्त हुए। इसलिए स्कूल के शिक्षकों  एवं कर्मचारियों ने उन्हें एक यादगार और खुशनुमा माहौल में विदाई दी। भले ही स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां थीं और स्कूल के टीचर्स और स्टाफ जनगणना और वोटर लिस्ट में सुधार के काम में बिज़ी थे, फिर भी कल शनिवार,30 मई, 2026 को सारा स्टाफ सिर्फ  प्रिंसिपल श्री अंबरसिंग मगर के स्नेह की वजह से स्कूल में मौजूद था, क्योंकि यह मगर सर के सर्विस करियर का आखिरी दिन था। स्कूल समयानुसार वे प्रातः 7:00 बजे  स्कूल में उपस्थित हुए । आते ही उनका बड़े  गर्म जोशी के साथ स्वागत किया गया। उन्होंने  स्कूल को नमन किया इस स्कूल के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पि...

वरिष्ठ समाजसेविका सरस्वती सिंह का दु:खद निधन ।

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वरिष्ठ समाजसेविका सरस्वती सिंह का दु:खद निधन  मुंबई :मुलुंड की वरिष्ठ समाजसेविका  श्रीमती सरस्वती जय सिंह(83) का शनिवार, दिनांक 30/05/2026 को दोपहर 3:30 बजे दु:खद निधन हो गया। मुलुंड पश्चिम स्थित सी -हिल व्यू ज्येति  बिल्डिंग में उनका लोगों ने अंतिम दर्शन किया  तत्पश्चात अंतिम यात्रा निकली। मुलुंड पश्चिम स्थित श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े सुपुत्र अशोक सिंह ने मुखाग्नि दी। श्रीमती सिंह अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गई हैं। मुलुंड के सुप्रसिद्ध साई मेडिकल के संचालक राजेश कुमार सिंह (राजू  भाई) की वे माताजी एवं समाजसेवी मोहित सिंह ,केतक सिंह की वे दादी माँ थीं। श्मशान भूमि में  सिंह परिवार  के संबंधियों में  समाजसेवी महानंद रामकृपाल सिंह, डॉ सचिन सिंह, नवीन सिंह, विनोद सिंह, रमेश सिंह, धर्मेंद्र सिंह, जीतेंद्र सिंह, सुभाष सिंह, एन. के.सिंह, भगवान दास सिंह, पारस सिंह, रामराज सिंह तथा पारिवारिक संबंधियों में सेवीनिवृत अधीक्षक बीरेंद्र पाठक,समाजसेवी शीतला प्रसाद सिंह,राकेश  वर्मा , निर्मल जैन, राम अय्यर,श्रीकृ...

भायंदर के काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों के लिए लगाया गया कूलर

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भायंदर के काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों के लिए लगाया गया कूलर भायंदर। विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर , वाराणसी की तर्ज पर भायंदर पूर्व के आरएनपी पार्क में प्रख्यात समाजसेवी तथा राहुल एजुकेशन के चेयरमैन पंडित लल्लन तिवारी द्वारा अपने माता-पिता की स्मृति में बनाए गए काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की सुविधा के लिए कूलर लगाया गया। आज पंडित लल्लन तिवारी ने मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए इसका शुभारंभ किया। इस अवसर पर समाजसेवी सुनील तावड़े, श्री राम सेवा समिति के अध्यक्ष श्रीराम दुबे, संतोष मिश्रा, विवेक मिश्रा समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। ज्ञातव्य है कि यह मंदिर यहां के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां पर भगवान शंकर के अलावा अन्य देवी देवताओं की भी मूर्तियां स्थापित की गई है। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि, स्थापना दिवस, होली तथा अन्य त्योहारों पर यहां धूमधाम से भजन कीर्तन तथा भंडारा का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसके अलावा प्रत्येक शनिवार को सुंदरकांड पाठ तथा खिचड़ी वितरण का कार्यक्रम किया जाता है।

याची साठी केला अट्टाहास, शेवटचा दिवस गोड व्हावा! युक्तीप्रमाणे आदर्श मुलुख्याध्यापक श्री. अंबरसिंग मगर सर यांच्या सेवा पूर्ती निमित्त शाळेच्या वतीने आनंददायी निरोप!

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याची साठी केला अट्टाहास, शेवटचा दिवस गोड व्हावा!  युक्तीप्रमाणे आदर्श मुलुख्याध्यापक श्री. अंबरसिंग मगर सर यांच्या सेवा पूर्ती निमित्त शाळेच्या वतीने आनंददायी निरोप!   बृहन्मुंबई महानगरपालिका माध्यमिक शिक्षण विभागातील स गो बर्वेनगर मनपा माध्यमिक शाळा घाटकोपर पश्चिम येथील आदर्श मुख्याध्यापक श्री.अंबरसिंग सुभद्रा सुकदेव मगर सर, दिनांक 31 मे 2026 रोजी नियत वयोमानानुसार सेवा निवृत्त होत असल्याने शाळेतील शिक्षक आणि कर्मचारी यांच्या वतीने अविस्मरणीय आणि आनंददायी वातावरणात त्यांना निरोप देण्यात आला. शाळांना उन्हाळी सुट्टी सुरू असतांना आणि तसेच शालेय शिक्षक कर्मचारी यांना जनगणना, मतदान यादी दुरुस्ती च्या कामात व्यग्र असतांना देखील केवळ श्री अंबरसिंग मगर यांच्यावरील प्रेमाखातर मगर सरांचा सेवा कारकिर्दीतील शेवटचा दिवस असल्याकारणाने सर्व कर्मचारी आज शाळेत उपस्थित होते. सकाळी ठीक 7 वाजता शालेय वेळेनुसार मगर सरांचे अत्यंत उत्साहात स्वागत करण्यात आले. ज्या शाळेसाठी आपले संपूर्ण आयुष्य खर्ची घातले त्या शाळेला नतमस्तक होत शाळेला वंदन केले. आणि मुख्याध्यापक कार्यालयात मोर्चा व...

हीटवेव में अपने जान की बाजी लगाकर जनगणना कर रहे हैं प्रगणक

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हीटवेव में अपने जान की बाजी लगाकर जनगणना कर रहे हैं  प्रगणक गिनती नहीं ये इंसानों की, ये तो भारत की पहचान है। हर एक नागरिक इस देश का, इस माटी की जान है। जनगणना तो बस एक बहाना है,  पूरे विश्व को अपनी ताकत दिखाना है। भारतीय जनगणना का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। प्राचीन साहित्य 'ऋग्वेद' से  ज्ञात होता है कि 800-600 ईसा पूर्व के दौरान किसी न किसी रूप में जनसंख्या गणना के स्थान पर  जनगणना की जाती थी। कौटिल्य के अर्थशास्त्र, जो  लगभग 321-296 ईसा  पूर्व में लिखा गया था जिसमें कराधान के उद्देश्य से राजनीति के एक उपाय के रूप में जनगणना पर जोर दिया गया था।स्वतंत्रता पूर्व 1872 में ब्रिटिश वायसराय लार्ड मेयो के अधीन जनगणना हुई थी। लेकिन भारत की संपूर्ण जनगणना 1881में रिपन के समय हुई थी। उसके बाद हर, 10 वर्ष में जनगणना होती रही है। 1949 के पश्चात भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त द्वारा कराई जाती है। 1951के बाद की सभी जनगणनाएं 1948 की जनगणना अधिनियम के तहत कराई गई। 1948 का भारतीय जनगणना अधिनियम केंद्र सरकार...

स्वतंत्रता संग्राम से आज तक हिंदी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान : शशिमोहन सिंह क्षेम

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स्वतंत्रता संग्राम से आज तक हिंदी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान :  शशिमोहन सिंह क्षेम जौनपुर। हिंदी पत्रकारिता का स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक देश व समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उक्त विचार जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष शशिमोहन सिंह क्षेम ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहाकि आज देश के लाखों युवा हिंदी समाचार पत्रों को पढ़कर उनसे ज्ञान अर्जित करके विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं। उन्होंने आज के दौर में पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रही गिरावट पर भी चिंता व्यक्त की। श्री क्षेम ने कहाकि आज उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय भी समाचार पत्रों में प्रकाशित समस्याओं पर संज्ञान लेकर कार्यवाही भी रहा है। ऐसे में पत्रकारों को सजग होकर कलम चलाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार रामश्रृंगार शुक्ल गदेला ने कहाकि दो सौ वर्षाें पूर्व पं. जुगल किशोर ने कलकत्ता से उदन्त मार्तण्ड नामक पत्र प्रकाशित करके हिंदी पत्रकारिता की नींव डाली थी। उस समय देश गुलामी की ...