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बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट पुणे इकाई की गोष्ठी संपन्न

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बाबू शोभनाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट पुणे इकाई की गोष्ठी संपन्न  पुणे  साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था बाबू शोभानाथ सिंह मेमोरियल ट्रस्ट पुणे इकाई के तत्वावधान में शनिवार २५ जुलाई 2026 शन को मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई।गोष्ठी की अध्यक्षता अयोध्या प्रसाद द्विवेदी ने की और मुख्य अतिथि के रूप में उर्वशी श्रीवास्तव उपस्थित रहीं।कार्यक्रम संयोजन सत्यभामा सिंह ने किया जिसमें पुणे के गणमान्य कवि और कवयित्री उपस्थित रहे।सर्वप्रथम पुणे के बेहतरीन कवि अवनीश कुमार ने सरस्वती वंदना की,फिर क्रमशः अलका अग्रवाल ने बरसात पर एक रचना पढ़ी। सुप्रसिद्ध ग़ज़लकारा  इंदिरा पूनावाला ने गजल पढ़ी।विजया बाला स्याल ने दिल को छूने वाली एक मर्मस्पर्शी रचना सुनाई। संस्था की राष्ट्रीय सचिव सत्यभामा ने भी समसामयिक विषय पर एक गजल प्रस्तुत किया।अवनीश कुमार ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं जिनमें उन्होंने एक नदी के बारे में गहन विचार रखा और संस्कृति से जुड़ी हुई बातें साझा कीं।उर्वशी ने सस्वर कंठ से बहुत खूबसूरत भजन गाया जिसमें शिव भक्ति पूरी ऊर्जा से समाहित हो गई थी।डॉ ज्...

राज्यपाल के हाथों डॉ. प्रशान्त सिंह को 'उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान'

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राज्यपाल के हाथों डॉ. प्रशान्त सिंह को 'उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान' जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के  दीक्षांत समारोह में राष्ट्रीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जमुहाई जौनपुर  के समाजशास्त्र विभाग के डॉ. प्रशान्त  सिंह को राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय के हाथों 'उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान' प्रदान किया गया। समारोह विश्वविद्यालय परिसर में पूरी गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं मेधावी छात्र-छात्राओं को पदक प्रदान किए गए।डॉ. प्रशान्त  सिंह विगत 6  वर्षों से समाजशास्त्र के अध्यापन से जुड़े हैं। शिक्षण, शोध एवं प्रकाशन के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। अपनी सरल शिक्षण-शैली तथा विद्यार्थियों के प्रति सहज उपलब्धता के लिए वे महाविद्यालय में विशेष रूप से जाने जाते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है।सम्मान प्राप्त होने पर डॉ. प्रशान्त  ने कहा -"यह क्षण मेरे लिए सौभाग्य का है। इसका श्रेय मेरे माता-पिता के आशीर्वाद, गुरुजनों के मार्गदर्शन, सहकर्मियो...

कृपाशंकर सिंह समाज की भलाई और देश की सेवा करने वाले नेता : लल्लन तिवारी

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कृपाशंकर सिंह समाज की भलाई और देश की सेवा करने वाले नेता : लल्लन तिवारी  कृपाशंकर सिंह अपने काम और वचनों के प्रति पूरी तरह से ईमानदार रहते हैं। जिस काम का उन्होंने बीड़ा उठा लिया, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। कठिन परिस्थिति में भी वह हिम्मत और संयम से काम लेते हैं। यही एक अच्छे नेता का लक्षण है। महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्यमंत्री कृपाशंकर सिंह के जन्मदिन (31 जुलाई) के संदर्भ में दिए गए साक्षात्कार में देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राहुल एजुकेशन के चेयरमैन लल्लन तिवारी ने उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा कि कृपाशंकर सिंह ने अपने जीवन में संघर्षों का डटकर मुकाबला किया और यही कारण है कि वह और ताकत के साथ आज खड़े हैं। कृपाशंकर सिंह कालजयी नेता है। कुछ वर्ष पहले उन्होंने जिस तरह से मृत्यु से भी कड़ा मुकाबला किया और विजेता के रूप में बाहर आए वह किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं है। श्री तिवारी ने कहा कि कृपाशंकर सिंह समाज और देश के भले के लिए काम करने वाले नेता हैं। हर व्यक्ति का सम्मान करते हैं और हरसंभव मदद भी करते हैं। एक बार कोई व्यक्ति उनसे मिल ले तो उन्हें उसका नाम हमेश...

164 सृजन संवाद में कथाकार-संपादक शंकर के रचनाकर्म पर गंभीर विमर्श

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164 सृजन संवाद में कथाकार-संपादक शंकर के रचनाकर्म पर गंभीर विमर्श जमशेदपुर, झारखण्ड। साहित्य, सिनेमा और कला को समर्पित संस्था ‘सृजन संवाद’ के 164वें ऑनलाइन आयोजन में वरिष्ठ कथाकार-संपादक शंकर के रचनाकर्म पर विस्तृत एवं गंभीर चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण स्ट्रीमयार्ड एवं फेसबुक लाइव के माध्यम से सायं 7:00 बजे से किया गया। स्ट्रीम यार्ड का संचालन अनुराग रंजन ने किया।  कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत वक्तव्य से हुआ, डॉ. विजय शर्मा ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों, वक्ताओं एवं श्रोताओं का स्वागत करते हुए शंकर के साहित्यिक योगदान को भारतीय कथा-साहित्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। साथ ही उनसे अपने जुड़ाव के किस्से को भी साझा किया। उन्होंने संवादियों को शुभकामनाएं दीं। इसके बाद अर्चना अनुपम ने कथाकार शंकर का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने शंकर के जीवन, साहित्यिक यात्रा, प्रमुख कृतियों तथा हिंदी कथा-साहित्य में उनके विशिष्ट स्थान पर प्रकाश डालते हुए बताया, शंकर ने अपने लेखन में समाज, मनुष्य और बदलते समय की जटिलताओं को अत्यंत संवेदनशीलता एव...

प्रेग्नेंसी में हो रही देरी तो IVF के पहले जानिए दूसरे विकल्प--IVF उन निःसंतान दम्पत्तियों के लिए वरदान है, जिनके लिए संतान प्राप्ति के सारे दरवाज़े बंद हो गए हो

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प्रेग्नेंसी में हो रही देरी तो IVF के पहले जानिए दूसरे विकल्प-- IVF उन निःसंतान दम्पत्तियों के लिए वरदान है, जिनके लिए संतान प्राप्ति के सारे दरवाज़े बंद हो गए हो आजकल शादी के छ महीने बाद ही दंपत्ति Ivf के बारे में गुगल करने लगते हैं। नतीज़ा उन्हें उसीसे संबंधित फीड भी मिलते रहते हैं। जिससे डॉक्टर के पास पहुंचने के पहले ही उनका झुकाव ivf की तरफ़ ही रहता है।  आधुनिक तकनीक और ए आई की वजह से ivf की सफलता दरों में भी वृद्धि हुई है। पहले जहां  ३५ वर्ष से कम आयु में सफलता दर २० से ३० % था अब ५० से ६०% हो गया है। इसकी सफलता दरों में वृद्धि की एक वजह ये भी है कि अब लोग जल्दी ही धैर्य खो देते हैं और सीधे ivf का रुख अपनाते हैं। बीतें 30वर्षों में ivf से इलाज कराने वालों की संख्या 200% बढ़ी है। Ivf से जुड़ी स्वास्थ संबंधी प्रमुख जटिलताओं और दूसरे आसान रास्तों को समझ कर ही फैसला लेने में समझदारी है। १) पहला तो ivf अत्यंत ही खर्चीला रास्ता है  और गर्भाधान के पहले और उसके बाद  पूरे  ९ महीने तक दवाईयों व सुइयों का सिलसिला शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला होता...

*काक्रोच से हार गये नाहर*

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*काक्रोच से हार गये नाहर*         सन दो हजार चौदह में भारत एक ऐसे शासक के हाॅंथ में गया जो दृढ़ निश्चयी, कठोर निर्णय लेने वाला,५६ इंची सीना ठोककर कहता था कि मैं सियार नहीं शेर हूॅं।मेरी डिक्शनरी में पीछे हटना नहीं लिखा है।और कहा ही नहीं विगत दस वर्ष तक करके भी दिखाया।कई ऐसे मौके आये जहाॅं इस सरकार ने वही किया जो देश हित में जरूरी था।विपक्ष बहुत दबाव बनाया,मगर परिणाम वही आया जो सरकार ने चाहा।मगर इस बार हार गई,एक कल के छोकरे के आगे घुटने टेक दी।         सन दो हजार चौदह के बाद कई आंदोलन हुए।छ: छ: महीने चले।मगर सरकार कभी पीछे नहीं हटी।छात्र आंदोलन भी हुए,तब भी सरकार पीछे नहीं हटी।मजबूती के साथ सभी आंदोलनों की हवा निकाल दी। चाहे शाहीन बाग में चला सीएए हो,चाहे किसान आंदोलन हो। किसान आंदोलन तो वर्षों चला। जेएनयू में छात्र आंदोलन हुआ।मगर सरकार सबकी हवा निकाल कर घर जाने को मजबूर कर दिया। लेकिन इस बार आखिर ऐसा क्या हुआ।कि वही मजबूत सरकार आज हताश है।यही सोनम बांगचुंग पिछले अर्से लद्दाख में आंदोलन किया था तो यही सरकार देशद्रोही बताकर गिरफ्तार करके...

*कारगिल विजय दिवस मनाया गया*

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*कारगिल विजय दिवस मनाया गया* दिनांक  27 जुलाई 2026 को माटुंगा स्थित सेवा मंडल एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित श्रीमती मणिबेन एम. पी. शाह महिला कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय माटुंगा (स्वायत्त) में एन.सी.सी. कंपनी 3 यूनिट द्वारा कारगिल विजय दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम में 33 कैडेट्स ने लेफ्टिनेंट सुवर्णा जोशी  के मार्गदर्शन में भाग लिया। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अर्चना पत्की , मैनेजमेंट के सेक्रेटरी श्री वसंत खेतानी, डॉ. शिल्पा  चरनकर सहित शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में वीर जवानों के फोटो के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, एवं पुष्पांजलि के माध्यम से कारगिल युद्ध के वीर शहीदों के साहस और बलिदान को नमन किया गया। प्रिंसिपल डॉ अर्चना पत्की ने बच्चों को कारगिल युद्ध में बलिदान होने वाले शहीद जवानों के बारे में बताया। इस कार्यक्रम ने कैडेट्स में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।