*ए तो अभी आगाज है*
*ए तो अभी आगाज है* अहंकार सबका टूटता है।रावण का टूटा,कंस का टूटा, मुगलों का टूटा, ब्रितानियों का टूटा,कांग्रेस का टूटा। तृणमूल का टूटा,राजद का टूटा,बीआर एस का टूटा,आप का टूटा।जिस जिस ने सनातन के साथ अहंकार में आकर धोखा किया सबका अहंकार टूटा। भाजपा में भी अहंकार का बीजारोपण हो गया है।इसलिए अब उसकी बारी आ गई है।इस अहंकार टूटने पर एक पौराणिक कथा याद आ गई। जब सृष्टि की रचना परम ब्रह्म परमेश्वर श्रीहरि विष्णु जी ने की तो सबके रहने खाने की व्यवस्था भी की।जिसका जैसा तन था,उसी हिसाब से खाने की व्यवस्था भी बनाई।सबको यथा योग्य बाॅंट दिया।मगर श्रीहरि विष्णु जी ने अपने लिए कुछ नहीं रखा।श्रीहरि के अनन्य भक्त ऋषि नारद जी ने जब यह देखा कि प्रभू ने सबकुछ बाॅंट दिया।अपने लिए तो कुछ रखा ही नहीं।तो आरत होकर भगवान से पूछे।भगवन वैसे तो आप सबके साथ न्याय ही करते हैं।पर अपने साथ अन्याय क्यूॅं।श्रीहरि जी मुस्कुराते हुए बोले,नारद मैं समझा नहीं।नारद जी विह्वल होकर बोले,भगवन आपने सबको खाने की व्यवस्था तो किये।मगर अपने लिए कुछ छोड़े ही नहीं।प्रभू आ...