टूटे अरमान लिये बैठे हैं।।
टूटे अरमान लिये बैठे हैं।। टूटे अरमान लिये बैठे हैं।। दिल में तुफान लिये बैठे हैं।। उजड़ा उजड़ा हुआ चमन दिल का- कब से वीरान लिये बैठे हैं।। कुछ भी निश्चित नहीं कि क्या होगा- एक अनुमान लिये बैठे हैं।। बेइमानों की अलग दुनियाँ है- हम तो ईमान लिये बैठे हैं।। फूलों की जगह हाथ में पत्थर- कुछ हैं शैतान लिये बैठे हैं।। पाके सौगात उनके हाथों से- खुद हैं हैरान लिये बैठे हैं।। क्या करेगा अंधेरा मुठ्ठी में- हम तो दिनमान लिये बैठे हैं।। कोई हरकत नहीं होती अब तो- जान बेजान लिये बैठे हैं।। हाले दिल को "गिरीश"मत पूछो- दर्द की खान लिये बैठे।। -----------9919667469