*परिवर्तन कल और आज...!*
*परिवर्तन कल और आज...!* आजकल....अपने समाज में.... देखने को नहीं मिलती है... एक सिरे से.... सबको डाँटने वाली जमात... नहीं मिलती है.... हर किसी काम-काज में.... कुछ न कुछ टोकने वाली जमात.. पता नहीं ....शिक्षा का असर है... या फिर....बेरोजगारी का असर है इस विकसित समाज में....अब... दिखती है बस एक नई जमात... जो उलझी हुई है.... खुद काँटों के ताज में.... अंतर नहीं मालूम है इनको.... कौआ - तोता - मैना.... चील और बाज़ में... रखना चाहते हैं ये.... अपना सब कुछ ही....! पिन और ओ टी पी के राज में... तमन्ना इस प्रकार की है इनकी... कि चुप करा देंगे दुनिया को.... अपनी ऊँची आवाज़ में... और क्या कहूँ इसके अलावा... क्या-क्या दिखता है.... इनके व्यवहार में....! कभी दिखते नहीं ये सभी... किसी भी लोक-लाज में.... खुश दिखाते हैं...खुद को... लोगों के सामने...हमेशा ही... चाहे कोढ़ में हों या हों खाज में.... अब कैसे कहूँ प्यारे....! जब कोई डाँटने वाला नहीं होगा घर-परिवार और समाज में.... सचमुच....तब ही विचार करेगी... यह युवा पीढ़ी.....नई पीढ़ी.... क्या परिवर्तन हुआ है...? कल और आज में.... क्या परिवर्तन ह...