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अशोक कुमार शर्मा का ढाई माह बाद भी नहीं लगा सुराग

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अशोक कुमार शर्मा का ढाई माह बाद भी नहीं लगा सुराग जौनपुर। जनपद के बदलापुर तहसील अंतर्गत स्थित ओंका गाँव निवासी अशोक कुमार शर्मा 15 अप्रैल, 2026 को लखनऊ के केजीएमयू से अचानक लापता हो गए। तब से उनके परिजन लगातार उनकी तलाश कर रहे हैं, परंतु अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है। साढ़े पांच  फुट लंबे अशोक कुमार शर्मा उस समय काले रंग का हॉफपैंट और भूरे रंग का टी शर्ट पहने हुए थे। जिस भी व्यक्ति को अशोक कुमार शर्मा के बारे में जानकारी मिली, वह थाना प्रभारी चौक लखनऊ से मोबाइल क्रमांक 9454 4038 47 या 97 21 18 30 55 पर संपर्क कर सकता है। श्री शर्मा का सुराग बताने वाले को उचित इनाम भी दिया जाएगा।

एक जीवित विश्वविद्यालय का स्वरूप है स्त्री — डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

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एक जीवित विश्वविद्यालय का स्वरूप है स्त्री  —  डॉ मंजू मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार माना कि महिलाएँ आज भी रसायन विज्ञान, भौतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, प्रबंधन, बैंकिंग और अनेक क्षेत्रों में संख्या के आधार पर पुरुषों से कम दिखाई देती हैं… लेकिन फिर भी इन सभी क्षेत्रों के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों, प्रबंधकों और विद्वानों की पहली गुरु, पहली पाठशाला और पहली प्रयोगशाला एक स्त्री ही होती है — माँ। वह प्रयोगशाला जहाँ इंसान गढ़े जाते हैं… जहाँ संस्कारों की नींव रखी जाती है, जहाँ प्रेम, त्याग, अनुशासन और मानवता का निर्माण होता है। स्त्रियाँ जन्मजात विदुषी होती हैं। वह लक्ष्मी भी हैं, अन्नपूर्णा भी हैं, सरस्वती भी हैं… और समय आने पर दुर्गा भी बन जाती हैं। जिसे दुनिया अक्सर केवल “घर संभालना” कहकर छोटा समझ लेती है, असल में वही सबसे बड़ा प्रबंधन है। एक पुरुष शायद घर चला सकता है, पर एक स्त्री पूरे घर में जीवन भर देती है। वह दीवारों को घर और घर को परिवार बनाती है। इतिहास गवाह है कि संसार के बड़े-बड़े वीर, महापुरुष और युग निर्माता भी किसी स्त्री की गोद में ही संस...

*सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफ़ेसर डॉ अनन्त मिश्र जी की कलम से....*पूर्व विभागाध्यक्ष *दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय*

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*सुप्रसिद्ध साहित्यकार प्रोफ़ेसर डॉ अनन्त मिश्र जी की कलम से....* पूर्व विभागाध्यक्ष  *दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय* पता नहीं भारतीय संस्कृति भारत और विदेश में फैलेगी कि नहीं, पर भारत में प्रकृति तो नष्ट हो जाएगी, ऐसा लगता है। हम लोग पूर्वांचल के निवासी जो आज़ादी के पहले जन्मे थे, और अब भी जीवित हैं, वे देख रहे हैं कि हमारे गाँवों के बाग-बगीचे, उपवन और नदियों तथा टूटी-फूटी कंकड़ की सड़कों के किनारे लगे विशाल वृक्ष सब के सब काट दिए गए। जो पेड़ लग भी रहे हैं, वे अभी या तो बड़े नहीं हुए हैं, या उनकी प्रजाति बौनी है। भोग-विलास और तेज़ रफ़्तार में चलने वाली गाड़ियों के लिए अत्यंत चौड़ी, लगभग हवाई अड्डे की पट्टी की तरह सड़कें और पुल बनाने के फेर में वृक्षों की इतनी कटान हो रही है कि मनुष्यों के लिए छाया और पक्षियों के बसेरों के लिए कोई स्थान नहीं रह गया है। इस पूर्वांचल में ज़रा सी गर्मी बढ़ती नहीं थी कि थोड़ी-बहुत बारिश हो जाती थी। लोगों का पंखों से काम चल जाता था। गाँव में बच्चे, बूढ़े दोपहरी में बड़े-बड़े बागों में बैठे-लेटे रहते थे। लोगों के पास वैभव कम था पर सु...

छात्रों को फर्श से अर्श पर पहुंचाने का निःशुल्क नीट कोचिंग देते हैं डॉ मिथिलेश कुमार बिंद

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छात्रों को फर्श से अर्श पर पहुंचाने का निःशुल्क नीट कोचिंग देते हैं डॉ मिथिलेश कुमार बिंद भदोही। ग्राम सभा हरिचंद पुर भीटी हंडिया प्रयागराज के रहने वाले डॉ मिथिलेश कुमार बिंद चर्म रोग विशेषज्ञ स्वरूप रानी हॉस्पिटल प्रयागराज में कार्यरत है।इस समय पूरे भदोही में चर्चा का विषय बने हुए हैं इनकी सोच हर वर्ष लगभग 100 बच्चों को ममता चैरिटेबल ट्रस्ट एंड स्किन केयर हॉस्पिटल सुभाष नगर भदोही के प्रांगण में एक सुपर 25 क्लासेस खोलकर निशुल्क नीट की तैयारी स्वयं और प्रशिक्षित प्रोफेसर डॉक्टर्स से नीट  विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देते हैं।बी एस वी एस न्यूज़ के साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य है कि जौनपुर, प्रयागराज, भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर ,जैसे शहरों में सुपर 25 प्रशिक्षण केंद्र खोलकर बच्चों के भविष्य का निर्माण करें।बच्चों के भविष्य और देश के निर्माण में सहायक महान समाजसेवी डॉ मिथिलेश कुमार बिंद को बहुचर्चित संगठन बिंद समाज विकास संघ ने अपनी टीम के साथ पहुंचकर बच्चों को मेडल और डॉ मिथिलेश कुमार बिंद  को, संघ का स्मृति चिन्ह दीवाल घड़ी से ...

जमशेदपुर में आयोजित हुई 162वीं ‘सृजन संवाद कविता पाठ गोष्ठी’

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जमशेदपुर में आयोजित हुई 162वीं ‘सृजन संवाद कविता पाठ गोष्ठी’ झारखण्ड। जमशेदपुर में 23 मई 2026 को सायं 6 बजे से सृजन संवाद द्वारा 162वीं गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. विजय शर्मा ने अपने संबोधन  से अतिथियों और श्रोताओं का स्वागत किया। तत्पश्चात् डॉ. प्रियंका सिंह ने कवियों का परिचय देते हुए उनके साहित्यिक योगदान और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर सुपरिचित कवयित्री सविता सिंह तथा कवि यतीश कुमार ने अपनी प्रभावशाली कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन परमानंद रमन द्वारा किया गया। सृजन संवाद के 15 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक संक्षिप्त वीडियो भी प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम के अंत में डॉ. विजय शर्मा ने विशिष्ट अतिथियों, फेसबुक के दर्शकों और आयोजन में सहायकों के प्रति भी अपना आभार व्यक्त किया।

समरस फाउंडेशन ने किया गौरव उमेश तिवारी का सम्मान

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समरस फाउंडेशन ने किया गौरव उमेश तिवारी का सम्मान मुंबई। मुंबई की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समरस फाउंडेशन द्वारा आज सोइथा, जौनपुर के ब्लॉक प्रमुख डॉ उमेश तिवारी के सुपुत्र गौरव तिवारी का सम्मान किया गया। इस अवसर पर संस्था के चेयरमैन डॉ किशोर सिंह, महासचिव वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, उपाध्यक्ष मानिकचंद यादव, रामकृपाल शर्मा, पूरव गांधी,अनिल कनौजिया तथा शमशाद भाई उपस्थित रहे। देहरादून से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद गौरव तिवारी मुंबई में Waaree RTL में एसोसिएट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं।

*पं.जमदग्निपुरी जी के सम्मान में काव्यगोष्ठी का आयोजन*

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*पं.जमदग्निपुरी जी के सम्मान में काव्यगोष्ठी का आयोजन* जौनपुर  २२-५-२०२६ दिन शुक्रवार को स्थानीय श्री गौरी शंकर संस्कृत महाविद्यालय सुजानगंज जौनपुर में सायं चार बजे से आठ बजे तक पं.जमदग्निपुरी के सम्मान में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता पं.जमदग्निपुरी जी ने की मुख्य अतिथि मोही जी ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। सर्वप्रथम पं.जमदग्निपुरी का सम्मान किया गया। तदोपरांत डॉ० प्रेम शंकर द्विवेदी ने घरवा में विघटन का डारि के दीवार नारी माई बाप औरत के बीच मरद पिसता सुनाया। मोही ने लाख रोका मगर इश्क रुकता नहीं, जमदग्निपुरी ने देत्या केउ हमसे मिलाई हो विदाई जग से होखे बाटे हो,डॉ० मिथिलेश त्रिपाठी ने शिक्षक युग निर्माता,कवि कंचुकी ने बसेरे पर मेरे बुलडोजर तुम्हारा,पंचदीप ने जो पढ़ेगा नहीं वो बढ़ेगा नहीं सुनाया।गोष्ठी का अद्भुत संचालन शिवानन्द चौबे ने किया। आभार डॉ प्रेमशंकर द्विवेदी भास्कर जी ने प्रकट किया।