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*मुर्धन्य कलमकार,उत्कृष्ट लेखक एवं युवा कवियों के मार्गदर्शक ----- सैन हरिकेश शर्मा नंदवंशी**जन्मदिन की अपार बधाई*

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*मुर्धन्य कलमकार,उत्कृष्ट लेखक एवं युवा कवियों के मार्गदर्शक ----- सैन हरिकेश शर्मा नंदवंशी* *जन्मदिन की अपार बधाई* आदरेय भाईसाहब श्री विनय कुमार शर्मा (दीप)जी (सेवारत बृहन्मुंबई महानगर पालिका एवं स्वास्थ्य विभाग, महाराष्ट्र  सरकार )मूल निवासी फूलपुर, जौनपुर एंव निवास क्षेत्र कलवा मुंबई, महाराष्ट्र,जन्मदिन की अशेष बधाई शुभकामनाये! _________________________ सेवारत सर्वेलेंस मलेरिया निरिक्षक अधिकारी महाराष्ट्र , स्वनिर्मित सामाजिक संगठन सर्व सहयोग सेवा ट्रस्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष,सामाजिक कार्यों में निष्काम  सेवा, राष्ट्र हित के  सामाजिक  सरोकार के अनेकों  संगठनों  के  प्रेरक, समाज  में  व्याप्त  कुरीतियों  के  मुखर  विरोधी,राष्ट्रीय कवि, मूर्धन्य  साहित्यकार, अनेकों  स्थापित  लेखकों, साहित्य  लेखन  पथ  के  पथिको,  अनगिनत  कलमकारो  के  प्रेरणा  स्त्रोत  स्नेहिल  प्रोत्साहक, जब किसी व्यक्ति में ज्ञान लहर की आवेग- प्रति आवेग होने लगती है तब सागर की ...

देश और जिले के उत्कृष्ट लेखक और समाजसेवी कवि विनय शर्मा दीप ------ विनोद कुमार शर्मा "सोनू"

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देश और जिले के उत्कृष्ट लेखक और समाजसेवी कवि विनय शर्मा दीप ------ विनोद कुमार शर्मा "सोनू" मुंबई:जब किसी व्यक्ति में ज्ञान लहर की आवेग- प्रति आवेग होने लगती है तब सागर की भांति सभी को समाहित करने की क्षमता होती है।इसी आत्मविश्वास से ज्ञानवान व्यक्ति परिपूर्ण होता है। डॉ. राम रतन श्रीवास "राधे राधे" ( ब्रांड एंबेसडर पशुपतिनाथ भारत नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव काठमांडू नेपाल) का कहना है मानव संघर्ष के बिना जीवन का यथार्थ से अवगत हो पाना असंभव प्रतीत होता है । मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह समाज में ही रहकर अपने जीवन यापन करता है। हर व्यक्ति का एक उद्देश्य होता है उस उद्देश्य की पूर्ति करने के लिए एवं समाज को नई दिशा और नये आयाम तक ले जाने में अपनी भूमिका निर्धारित करता है इसी को चरितार्थ करते हैं साहित्यिक विद्वान विनय शर्मा दीप जिनका जन्म 18 मार्च 1972 को जिला जौनपुर,उ.प्र. के ग्राम फूलपुर में हुआ। आपके पिता शिक्षाविद् दीप नारायण एस. शर्मा तथा माता श्रीमती शांति देवी (गृहणी) का जीवन साधना शिक्षा से ही जुड़ा रहा जो आपके जीवन में परिलक्षित होता ...

विनय शर्मा दीप को नवीन पाठ्यक्रम से मिली पहचान ......... डॉ. राम रतन श्रीवास "राधे राधे"

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विनय शर्मा दीप को नवीन पाठ्यक्रम से मिली पहचान ......... डॉ. राम रतन श्रीवास "राधे राधे" मुंबई महाराष्ट्र:: जब किसी व्यक्ति में ज्ञान लहर की आवेग- प्रति आवेग होने लगती है तब सागर की भांति सभी को समाहित करने की क्षमता होती है इसी आत्मविश्वास से ज्ञानवान व्यक्ति परिपूर्ण होता है। डॉ. राम रतन श्रीवास "राधे राधे" ( ब्रांड एंबेसडर पशुपतिनाथ भारत नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव काठमांडू नेपाल) का कहना है मानव संघर्ष के बिना जीवन का यथार्थ से अवगत हो पाना असंभव प्रतीत होता है । मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और वह समाज में ही रहकर अपने जीवन यापन करता है। हर व्यक्ति का एक उद्देश्य होता है उस उद्देश्य की पूर्ति करने के लिए एवं समाज को नई दिशा और नई आयाम तक ले जाने में अपनी भूमिका निर्धारित करता है इसी को चरितार्थ करता ऐसे साहित्यिक विद्वान विनय शर्मा दीप का जन्म 18 मार्च 1972 को जिला जौनपुर,उ.प्र. के ग्राम फूलपुर में हुआ। आपके पिता एक शिक्षाविद् दीप नारायण एस. शर्मा माता श्रीमती शांति देवी (गृहणी) का जीवन साधना शिक्षा से ही जुड़ा रहा जिसका आपके जीवन में परिलक्ष...

गुढीपाडवा आणि चैत्रगौरी : परंपरा श्रद्धा आणि माहेरपणाचा सण

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गुढीपाडवा आणि चैत्रगौरी : परंपरा श्रद्धा आणि माहेरपणाचा सण   चैत्र शुद्ध प्रतिपदेपासून मराठी नववर्षाची सुरुवात होते आणि गुढीपाडव्याच्या मंगल पर्वाने घराघरांत उत्साह, आनंद आणि नवचैतन्याचे वातावरण निर्माण होते. गुढीपाडवा हा केवळ नववर्षाचा प्रारंभ नसून विजय, यश, समृद्धी आणि स्वाभिमानाचे प्रतीक मानला जातो. पुराणांनुसार ब्रह्मदेवांनी सृष्टीची निर्मिती याच दिवशी सुरू केली, तर इतिहासात छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या स्वराज्यस्थापनेच्या विजयाशीही या दिवसाची सांगड घातली जाते. म्हणूनच घरावर उभारली जाणारी गुढी ही विजय आणि अभिमानाचे प्रतीक मानली जाते. गुढीपाडव्याबरोबरच चैत्र महिन्यात चैत्रगौरी पूजनालाही विशेष महत्त्व आहे. चैत्र मासातील शुक्ल पक्षातील तृतीयेला गौरीची स्थापना केली जाते. या दिवशी गौरी माहेरी येते, अशी सुंदर समजूत आहे. म्हणूनच हा सोहळा केवळ धार्मिक विधी नसून मुलगी माहेरी येण्याचा जिव्हाळा, माया आणि आपुलकी जपणारा सण आहे. चैत्रगौरीची स्थापना लहानशा पाळण्यात किंवा सुंदर मांडवात केली जाते. तिच्याभोवती फळे, फराळ, गोडधोड, खिरापत आणि विविध नैवेद्य मांडले जातात. घर सजवले जाते, रा...

गुड़ीपाड़वा और चैत्रगौरी: परंपरा,आस्था और ज्ञान का त्योहार

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गुड़ीपाड़वा और चैत्रगौरी: परंपरा,आस्था और ज्ञान का त्योहार   मराठी नव वर्ष की शुरुआत चैत्र शुद्ध प्रतिपदा से होती है और गुढ़ीपाड़वा का शुभ त्योहार घरों में उत्साह,खुशी और नएपन का माहौल बनाता है।गुड़ीपाड़वा न केवल नए साल की शुरुआत है बल्कि इसे विजय,सफलता, समृद्धि और स्वाभिमान का प्रतीक भी माना जाता है।पुराणों के अनुसार,भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन सृष्टि की रचना शुरू की थी, वहीं इतिहास में इस दिन को छत्रपति शिवाजी महाराज की स्वराज्य स्थापना में विजय से भी जोड़ा जाता है।इसीलिए घर पर बनी गुढ़ी को विजय और गौरव का प्रतीक माना जाता है।गुड़ी पाड़वा के साथ-साथ चैत्र माह में चैत्रगौरी पूजा का भी विशेष महत्व है। गौरी की स्थापना चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को की जाती है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन गौरी नैहर आती हैं। इसीलिए यह समारोह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि एक लड़की की घर वापसी की आत्मीयता, प्रेम और स्नेह का उत्सव भी है। चैत्रगौरी को एक छोटे पालने या सुंदर मांडव में स्थापित किया जाता है। उसके चारों ओर फल, नमकीन,मिठाइयाँ,खिरापट और विभिन्न प्रसाद रखे जाते हैं। घर को ...

जौनपुर के ग्रामीण अंचल में किरण तिवारी की दो पुस्तकों का लोकार्पण

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जौनपुर के ग्रामीण अंचल में किरण तिवारी की दो पुस्तकों का लोकार्पण जौनपुर। पुस्तकें ज्ञान का अक्षय भंडार और मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं, जो हमें जीवन भर मार्गदर्शन, शिक्षा और मानसिक सुकून प्रदान करती हैं। ये हमारे व्यक्तित्व को निखारती हैं, रचनात्मकता बढ़ाती हैं, तनाव कम करती हैं और इतिहास व संस्कृतियों से परिचित कराती हैं। पुस्तकें सही-गलत का अंतर सिखाकर हमें बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करती हैं। जनपद के सिकरारा थाना अंतर्गत स्थित सतलपुर गांव में शैल साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित पुस्तक लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह प्रिंसू ने उपरोक्त बातें कही। कार्यक्रम में देश की प्रख्यात साहित्यकार और लेखिका किरण तिवारी की दो पुस्तकों अंतर्द्वंद्व एवं काव्यकिरण का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य सुधाकर उपाध्याय ने किया। ब्लॉक प्रमुख सिकरारा संजय सिंह, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष अमित सिंह तथा डॉ संतोष सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सम्मानित अति...

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सनातन संस्कृति का सेतु – आचार्य पवन त्रिपाठीसद्भाव सहयोग संस्था ने किया प्रमोद मिश्रा का सम्मान

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महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बीच सनातन संस्कृति का सेतु – आचार्य पवन त्रिपाठी सद्भाव सहयोग संस्था ने किया प्रमोद मिश्रा का सम्मान मुंबई। महाराष्ट्र और यूपी की संस्कृति एक है, वह है सनातन संस्कृति, जो दोनों प्रदेशों को जोड़ने का काम करती है। श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और मुंबई भाजपा के महामंत्री आचार्य पवन त्रिपाठी ने सद्भाव-सहयोग संस्था की ओर से भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा के नवनियुक्त अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा के भव्य सत्कार समारोह में यह भावना व्यक्त की। इस दौरान भारी संख्या में उत्तर भारतीय समाज के लोग उपस्थित थे। आचार्य पवन त्रिपाठी ने महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का सांस्कृतिक और सनातन का नाता जोड़ते हुए कहा कि  उत्तर प्रदेश में हम काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं और जब मुंबई में आते हैं, तो बाबुलनाथ में जलाभिषेक और पूजा करते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में मां गंगा हैं, तो महाराष्ट्र में मां गोदावरी है। यूपी में मां विध्यवासिनी की पूजा करते हैं, तो मुंबई में मुंबादेवी और महालक्ष्मी की पूजा करते हैं। वहीं, सिद्धिविनायक विश्व का सबसे प्रसिद्ध गणेश...