नेंह से एक दिया देशवा के किसान जवान के नाउं जरावा।।
*नेंह से एक दिया देशवा के किसान जवान के नाउं जरावा।।* *----छंदकार एडवोकेट गिरीश श्रीवास्तव* बालक बृद्ध भरे मनमोद विनोद करैइ मिलि के नर नारी।। छाई खुशी घर बाहर भीतर नाचत गावत दैइ दैइ तारी।। छाड़ि अकास धरा तरई मुसुकात गिरीश झरैइ उजियारी।। राति अमावस क तम भागैइ भाग सुभाग मनावा देवारी।। झालर छाड़ि विदेशी स्वदेशी दिया मटिया क सबैइ अपनावा।। साफ सफाई करा उर क सुर से सुर मेलि के मंत्र जगावा।। आवा गिरीश सबैइ मिलि के अन्हियार धरा कैइ दूर भगावा।। नेंह से एक दिया देशवा के किसान जवान के नाउं जरावा।। हीरा बिकैइ भल मोती बिकैइ सोनवा चनियां पैइसा कैइ खेला।। लाई मिठाई ल बर्तन ल लक्ष्मी अउ गनेस गिरीश क चेला।। भीड़ जुरी देहि मोर छोलाइग शोर अपार बा रेली क रेला।। लागि बजार बा भल गुलज़ार बा देखा धना धनतेरस मेला।। साफ सफाई करा घर बाहर बेचा कबाड़ घरे क पुरानी।। थाली कटोरी गिलास ल चम्मच लूट मची बा दुकानी दुकानी।। देखा सुमेरा निहोर गिरीश बजारे में घूमैइ दूनौ परानी।। गांऊ क मेला उमा घर बैठि करैइ अपने घर क निगरानी।। झारत पोछत चउक पूर...