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संगीत साहित्य मंच की 131वीं काव्यगोष्ठी संपन्न

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संगीत साहित्य मंच की 131वीं  काव्यगोष्ठी संपन्न ठाणे  साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था संगीत साहित्य मंच द्वारा निरंतर की जाने वाली मासिक काव्यगोष्ठी 16 मई 2026 शनिवार को संस्था के मंच संचालक उमेश मिश्र "प्रभाकर" के आवास ठाणे में आयोजित किया गया।मुख्य अतिथि के रूप में जाने माने गजलकार एन बी सिंह  "नादान" की उपस्थिति तथा शिव शंकर सिंह की अध्यक्षता और उमेश मिश्र प्रभाकर के संचालन मे कविगोष्ठी सम्पन्न हुई।कार्यक्रम का शुभारम्भ सदाशिव चतुर्वेदी "मधुर" द्वारा माँ सरस्वती के चरणों मे वंदना स्वरुप प्रथम पुष्प अर्पित  करके  किया गया।गोष्ठी के क्रम में अरुण मिश्र अनुरागी द्वारा "माता शबरी" पर गीत का सुन्दर गायन किया गया।अगली कड़ी में वरिष्ठ कवि अजय सिंह ने "चार संख्या" पर सुन्दर गीत प्रस्तुत किया।इसके बाद मधुर ने बहुत ही सार गर्भित ग़ज़ल "जिंदगी से डर" का गायन किया।अगले क्रम में वरिष्ठ कवि तिलकराज खुराना ने युद्ध के दौरान दुनियां के दिल को दहला देने वाली स्कूल पर बम गिराने की घटना को लेकर लिखी गई रचना का गायन किया।क्रम...

NEET पेपर लीक होने से लाखों युवाओं के सुनहरे सपनों की हत्या : डॉ द्रिगेश यादव

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NEET पेपर लीक होने से लाखों युवाओं के सुनहरे सपनों की हत्या : डॉ द्रिगेश यादव मुंबई। NEET परीक्षा का रद्द होना लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए एक विनाशकारी झटका है। इसके मुख्य दुष्प्रभावों में छात्रों का मानसिक तनाव, कीमती समय की बर्बादी, शैक्षणिक सत्र में देरी, आर्थिक नुकसान और परीक्षा प्रणाली पर से अटूट विश्वास का उठ जाना शामिल है। पूर्वांचल विकास परिवार के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ द्रिगेश यादव का कहना है कि NEET पेपर लीक सिर्फ एक परीक्षा घोटाला ही नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सुनहरे सपनों की हत्या है। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने और अवसाद के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों (जैसे दिल्ली, यूपी, राजस्थान और गोवा) में कई युवा अपनी जान गंवा चुके हैं। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद सरकार का कोई जिम्मेदार मंत्री यह कहने के लिए तैयार नहीं है कि भविष्य में पेपर लीक नहीं होगा। पिछले वर्ष  पेपर लीक होने के बावजूद परीक्षा रद्द नहीं की गई। एक चैनल पर जिस तरह से दिखाया गया कि 2025 में राजस्थान के एक ही परिवार से जुड़े 5 ऐसे बच्चों ने नीट परीक्षा पास की, जो पढ़ने में ब...

पूर्वांचल और महाराष्ट्र के बीच सदियों पुराना नाता : देवेंद्र फडणवीस राहुल लल्लन तिवारी समेत 9 विभूतियों को माटी सम्मान

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पूर्वांचल और महाराष्ट्र के बीच सदियों पुराना नाता :  देवेंद्र फडणवीस  राहुल लल्लन तिवारी समेत 9 विभूतियों को माटी सम्मान  मुंबई। पूर्वांचल की संस्कृति और विरासत से जुड़ी संस्था माटी द्वारा 16 मई को मुंबई विश्वविद्यालय, कालीना के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पूर्वांचल महोत्सव में माटी 9 का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें पूर्वांचल में रचनात्मक और प्रेरणादायक काम कर रहे 9 विभूतियों का सम्मान किया गया। देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राहुल एजुकेशन के सचिव राहुल लल्लन तिवारी को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों माटी सम्मान प्रदान किया गया। उनके अलावा ठाकुर एजुकेशनल ट्रस्ट के चेयरमैन वी के सिंह, पश्चिम रेलवे के जनरल मैनेजर रामआसरे पांडे, वरिष्ठ समाज सेवी शारदा प्रसाद सिंह, डॉ अशोक यादव, अजय हरिनाथ सिंह, फिल्म अभिनेता कुशाल टंडन, राज सिंह और श्रीमती शैलेश श्रीवास्तव को यह सम्मान प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र और पूर्वांचल के बीच सदियों पुराना रिश्ता है। भगवान राम ने वनवास के समय नासिक के पंचवटी में ही सबसे अधिक दिन व्यतीत किय...

जय हो महान् सम्राट पृथ्वीराज जी शत् शत् नमन !----डाॅ.दिनेश चन्द्र सिंह आईएएस, लखनऊ

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जय हो महान् सम्राट पृथ्वीराज जी शत् शत् नमन ! ----डाॅ.दिनेश चन्द्र सिंह आईएएस,               लखनऊ   16.05.2026 महान् सम्राट पृथ्वीराज चौहान (पृथ्वीराज तृतीय) 12वीं सदी के प्रतापी, शूरवीर, पराक्रमी, साहसी,अतुलनीय बल, अदम्य साहस, अपराजेय संकल्प शक्ति, महान् सम्राट एवं एक वीर हिन्दू क्षत्रिय राजा, भारत के अंतिम सम्राट, भारत में पृथ्वीराज चौहान के बाद कोई सम्राट नहीं तथा अपितु राजा एवं शासक हुए हैं।अपनी वीरता,युद्ध कौशल और मोहम्मद गोरी के खिलाफ तराइन के युद्धों (1191- 1192) के लिए प्रसिद्ध है, की जन्म जयंती पर शत् शत् नमन। पृथ्वीराज चौहान का जन्म 16 मई 1166 ई. को हुआ था एवं 1178 ई. में 12 वर्ष की आयु में शासक बने और अजमेर को राजधानी बनाई । शब्दवेधी बाण के सिद्धहस्त योद्धा के रूप में निम्नलिखित पंक्तियां प्रसिद्ध हैं - "चार बांस चौबीस गज अंगुल अष्टप्रमाण। ता ऊपर सुल्तान है मत चूको चौहान।।" जिनके शौर्य और पराक्रम ने दसकों तक मातृभूमि पर शत्रुओं का कदम नहीं पढ़ने दिया। मातृभूमि और सनातन धर्म संस्कृति के रक्षक, शब्दवेधी बाण से मोहम्म...

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का मुंबई में भव्य स्वागत

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जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का मुंबई में भव्य स्वागत मुंबई। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के मुंबई आगमन पर मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर भव्य स्वागत किया गया। उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, सामाजिक प्रतिनिधि, पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरे वातावरण में उत्साह, सम्मान और गर्मजोशी का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। स्वागत के दौरान उपस्थित लोगों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर एवं माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर उत्तर भारतीय भाजपा नेता आर यू सिंह, आरडी यादव, पत्रकार अविनाश पांडेय, राजेश यादव, आरके मिश्रा, अरुण सिंह, नीरज वाजपेयी, मनोज सिंह, पद्माकर सिंह सहित अनेक प्रमुख लोग मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने कहा कि मनोज सिन्हा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास, सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को नई मजबूती मिली है। उनकी कार्यशैली एवं प्रशासनिक क्षमता के कारण देशभर में उनकी अलग पहचान बनी है। इस अवसर पर समर्थकों एवं शुभचिंतकों में खासा उत्साह दिखाई दिया। स्वागत के समय “भारत माता की जय” और “मनोज सिन्हा जिंदाबाद” जैसे...

योगासन......! (हास्य कविता)

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योगासन......! (हास्य कविता) बार-बार देकर भाषन....! गुरुवर ने सिखलाया.... जबरन मुझको योगासन....फिर...  एक दिन अल सुबह में आकर, घर से बाहर मुझे बुलाकर.... पक्का किया मुझे... यह पाठ पढ़ाकर....कि... योगासन से ही रह सकोगे....! तुम स्वस्थ इस धरा पर........ अब...रोज सवेरे जाग-जागकर.... निद्रा को अपनी तड़पाकर... दिया तन को अतिशय कष्ट....! बदले में पाया आनन्द अनंत... और इसी बहाने....मैं.... आया प्रकृति के सन्निकट.... फिर....एक दिन गुरुवर ने.... आकर यह बतलाया....कि.... हर योगासन का बस एक निचोड़, सूर्य नमस्कार का नहीं है कोई जोड़ मोह न इसका मैं पाया छोड़.... बारह आसन.....बारह बार.... कहते जिसको सूर्य नमस्कार... गुरुवर की यह प्रबल प्रतिज्ञा.... कर ली मन से मैंने स्वीकार.... अब मैं यह सूर्य नमस्कार.....! रोज सवेरे करता था.... कभी हाथ जोड़कर हुआ खड़ा, कभी झुकाया नीचे अपना धड़ा.... कभी टाँग मैं  पीछे करता, फिर आगे लेकर आता था.... धरती माँ से कभी चिपकता.... कभी भुजंग सा बन जाता था.... पर गुरुवर की आज्ञा के पालन में, मुझे अति आनन्द भी आता था.... सहसा एक दिन पार्क में.....! देखी बारह ...

आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी का सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, करुणा और भारतीय संस्कृति को समर्पित था : प्रो. मुरलीमनोहर पाठक

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आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी का सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, करुणा और भारतीय संस्कृति को समर्पित था : प्रो. मुरलीमनोहर पाठक नई दिल्ली। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में साहित्य अकादेमी, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से शुक्रवार को श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रख्यात संस्कृत विद्वान्, सांस्कृतिक चिन्तक एवं आध्यात्मिक मनीषी आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की जन्मशती के उपलक्ष्य में एक गरिमामय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने कहा कि ,आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी का सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, करुणा और भारतीय संस्कृति को समर्पित था। उन्होंने कहा कि आचार्य जोशी का जीवन अत्यंत उद्देश्यमय रहा तथा उन्होंने अपने जीवन में कभी विश्राम नहीं किया। वे निरन्तर संस्कृत साहित्य के व्यापक अध्ययन एवं उसके मर्म को आत्मसात करने में संलग्न रहे। प्र...