नेताजी और चट्टे बट्टे...

नेताजी और चट्टे बट्टे...
नेताजी के चट्टे बट्टे,
 मरगिल्ले कुछ हट्टे-कट्टे,
आगे पीछे डोल रहे हैं,
नेता की जय बोल रहे हैं ।

इनके भाषण हैं खटमिट्ठे,
वादों के ये झुट्ठे- मुट्ठे,
कई बार ये कुट्टे- पिट्टे,
लाज-शरम धो चुके निखट्टे,
भाषण में रस घोल रहे हैं,
नेता की जय बोल रहे हैं ।

मोफत का ये माल गटक्के,
दगाबाज मक्कार  हैं पक्के,
गाल टमाटर हट्टे-कट्टे,
हैं पूरे उल्लू के पट्ठे,
हमको सस्ता तोल रहे हैं,
नेता की जय बोल रहे हैं।

जीत गए तो बल्ले-बल्ले,
मौज मनायें खूब निठल्ले,
ऊँची कुर्सी पर जम जाते,
फिर ये मंद-मंद मुस्काते,
 करते झोलम-झोल रहे हैं,
नेता की जय बोल रहे हैं ।

पद के मद में भूल ये जाते,
टिलीलिली हमको दिखलाते,
गटक गए शिक्षक की पेंशन,
खुद पाते हैं दो-दो पेंशन,
इसके लिए नहीं मुँह खुलता,
 मौसेरों का एकमत मिलता,
अब 'दिनेश' भी खौल रहे हैं,
नेता की जय बोल रहे हैं।

            डॉ. दिनेशकुमार
            दि.07-012026

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