७७वें गणतंत्र दिवस पर कथा-कथन संपन्न
७७वें गणतंत्र दिवस पर कथा-कथन संपन्न
महापंडित राहुल सांकृत्यायन फाउण्डेशन, हिंदी प्रचार संस्थान एवं अखिल ब्रह्म विज्ञान संस्थान मुंबई के संयुक्त तत्त्वावधान में २६ जनवरी २०२६, ७७वें गणतंत्र दिवस पर आर के कॉलेज, बचानी नगर, मालाड में स्वरचित कहानी पाठ का भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। आचार्य वीरेन्द्र त्रिपाठी के मंत्रोच्चार के बीच अतिथियों ने कार्यक्रम का प्रारंभ दीपार्चन के साथ किया। कुसुम तिवारी ने सरस्वती वंदना एवं गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. शशिकला पटेल ने की और मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर भारतीय संघ के महामंत्री देवेन्द्र तिवारी, विशिष्ठ अतिथि के रूप में फिल्म निर्देशक दिनेश श्रीवास्तव तथा विशेष अतिथि उद्योगपति अनिल कुमार मिश्र उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों का सम्मान किया गया जिसमें रचनाकार कृपाशंकर मिश्र, साहित्यकार डॉ. रामस्वरूप साहू, समाजसेवी डॉ. परमिंदर पाण्डेय, उद्योग जगत से जुड़े अनिल कुमार मिश्र, लोकमत के वरिष्ठ पत्रकार राकेशमणि त्रिपाठी का गणतंत्र दिवस के अवसर पर इन महान विभूतियों का संस्था के पदाधिकारियों द्वारा शॉल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर स्वरचित कहानी पाठ में सबसे पहले कहानी की विषय वस्तु और रूपरेखा पर हिंदी साहित्य की विविध विधाओं के मूर्धन्य साहित्यकार डाॅ श्रीभगवान तिवारी ने ज्ञानवर्धक विचार प्रस्तुत किया। उनकी कहानी संग्रह की भूमिका पढ़ी गई। तत्पश्चात उनकी कहानी ‘बाँझिन’ की प्रस्तुति डॉ. अमर बहादुर पटेल ने की तथा सफल संचालन किया।‘बाझिन’ कहानी एक मनोविश्लेष्णात्मक कहानी है जो समाज को एक संदेश देती है। पूर्व प्रधानाध्यापक रमेश राय की कहानी ‘गुरुदक्षिणा’ की सराहना की गई। रामसिंह की कहानी ‘माई’ एक मार्मिक और परंपरागत रीतिरिवाजों को दर्शाती है। महापण्डित राहुल सांकृत्यायन की पौत्रवधू इंदिरा पाण्डेय ने राहुल सांकृत्यायन की पत्नी ‘रामदुलारी’ पर अपना संस्मरण सुनाया जो काफी मार्मिक व संवेदनशील रहा। प्रोफेसर कुसुम तिवारी की कहानी ‘दुर्भाग्य’ एक संदेशपरक कहानी थी। डॉ. रामस्वरूप साहू की कहानी ‘नववर्ष की बेला में’ समसामयिक समस्याओं को उजागर करने में सफल कहानी रही। डॉ. अवनीश सिंह की कहानी ‘विवाह से निकाह’ महानगर की समस्याओं पर आधारित कहानी काफी प्रेरणादायी रही। डॉ. रीना राय की कहानी ‘बुढ़ापा’ एक भावनात्मक कहानी थी। कहानीकार सेवासदन प्रसाद ने ‘चेहरे पे चेहरा’ के माध्यम से नारी-विमर्श व नारी सशक्तिकरण को बखूबी दर्शाती हुई कहानी प्रस्तुत की। इसके साथ ही अमिताभ बागी, रविप्रकाश, कृपाशंकर मिश्र ने भी इस कार्यक्रम में अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संयोजन आर. के. कॉलेज के एम डी श्री आर. के. सर के
द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रभाशंकर शुक्ल, विजय तिवारी, डॉ. अशोक सिंह चौहान, बृजेश पाण्डेय तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। देवेन्द्र तिवारी जी ने अपने व्यस्ततम कार्यक्रमों के बीच उपस्थित होकर आश्रम,संस्कृत महाविद्यालय एवं परशुराम मंदिर निर्माणार्थ संकल्प को दुहराया। डाॅ परमिंदर पाण्डेय ने अपनी व्यथा- कथा सुनाते हुए महापण्डित राहुल फाउंडेशन के पुनरुद्धार का वचन दिया।विशिष्ट अतिथि फिल्म डायरेक्टर दिनेश श्रीवास्तव ने तीनों संस्थाओं के प्रचार- प्रसार की जिम्मेदारी ली। हर कार्यक्रम में उपस्थित रहने वाले श्रेया लाइफ साइंसेज के एडमिनिस्ट्रेटर अनिल मिश्र ने कार्यक्रम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। सुव्यवस्थित संचान डॉ. अमर बहादुर पटेल ने किया तथा आचार्य रामव्यास उपाध्याय ने आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान एवं अल्पाहार के पश्चात समारोह संपन्न हुआ।
Comments
Post a Comment