एकता विकास और युवा नेतृत्व पर भरोसे की जीत : तेजिंदर सिंह तिवाना

एकता विकास और युवा नेतृत्व पर भरोसे की जीत : तेजिंदर सिंह तिवाना 
मुंबई। मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भाजपा के लिए वार्ड 47 की सीट जीतना अत्यंत महत्वपूर्ण था, क्योंकि इस सीट से पार्टी ने मुंबई भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष तेजिंदर सतनाम सिंह तिवाना को उम्मीदवार बनाया था। युवा नेतृत्व का प्रतीक होने के नाते, इस सीट पर जीत भाजपा के लिए सम्मान और प्रतिष्ठा का सवाल थी।
 वार्ड 47 की जटिल और विभिन्न धर्म और समुदाय के मतदाताओं को देखते हुए यह मुकाबला भाजपा के लिए आसान नहीं था। ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यदि इस वार्ड से भाजपा को कोई विजयी बना सकता था, तो वह केवल तेजिंदर सतनाम सिंह तिवाना ही थे।

वार्ड 47 की मतदाता संरचना में लगभग 22% मराठी, 21% दक्षिण भारतीय, 12% ईसाई और 6% मुस्लिम मतदाता शामिल हैं, जिससे यह क्षेत्र UBT या कांग्रेस जैसे प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के लिए आसान विजय का ब्लूप्रिंट बनाता है। वहीं भाजपा के परंपरागत मतदाता भी इस वार्ड में ठीकठाक संख्या 17% उत्तर भारतीय/पंजाबी और 18% गुजराती/राजस्थानी में हैं। लेकिन पुनर्विकास (Redevelopment) के चलते बड़ी संख्या में मतदाता वार्ड से बाहर दूसरे स्थानों पर रहने चले गए, और मतदान का दिन मकर संक्रांति होने के कारण गुजराती मतदाताओं की अनुपस्थिति भी एक बड़ी चुनौती बनी। इन सभी परिस्थितियों के बावजूद भाजपा की यह प्रचंड जीत तेजिंदर सतनाम सिंह तिवाना की मेहनत, स्थानीय स्वीकार्यता और मजबूत जनसंपर्क के कारण संभव हो पाई।
तेजिंदर सतनाम सिंह तिवाना और उनका परिवार पिछले 40 वर्षों से अधिक इस क्षेत्र में निरंतर जनसेवा कर रहा है, यही कारण है कि क्षेत्र की जनता का उनके परिवार से गहरा विश्वास और जुड़ाव रहा है। 
इस जीत का श्रेय भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी जाता है, जिन्होंने इस बार युवाओं पर विश्वास जताया और उन्हें अवसर दिया। युवाओं ने अपनी नई सोच और जोश के साथ इस बीएमसी चुनाव का परिदृश्य ही बदल कर रख दिया।
तेजिंदर का “मदद का ठिकाना” अभियान इस चुनाव की पहचान बन गया। यह अभियान मतदाताओं में ऐसा उत्साह भरने में सफल रहा कि माहौल किसी नगरसेवक चुनाव का नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव जैसा प्रतीत हो रहा था। अभियान के गीत, विज्ञापन फिल्में और सोशल मीडिया पर साझा किया गया कंटेंट जनता से सहज रूप से जुड़ता चला गया। क्योंकि तेजिंदर सतनाम सिंह तिवाना और उनका परिवार बिना किसी पद के भी स्थानीय नागरिकों के लिए दिन रात उपलब्ध रहे, और यही निरंतर सेवा भाव जनता के विश्वास में बदल गया।
तेजिंदर सतनाम सिंग तिवाना की यह जीत सही मायनों में मुंबई की स्पिरिट की जीत है—जहाँ भाषा और प्रांत के आधार पर समाज को बाँटने वाले नरेटिव से ऊपर उठकर जनता ने एक मेहनती, सदा उपलब्ध रहने वाले युवा उम्मीदवार को प्रचंड मतों से विजयी बनाया।

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