स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

स्वागत है नव वर्ष तुम्हारा
–डॉ मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ साहित्यकार

आओ तुम ऐसे आना
जैसे घर में
नवजात शिशु आता है—
जिसका सुंदर, सलोना मुखड़ा देख
माँ अपनी सारी पीड़ा भूल जाती है।

वैसे ही 2026,
तुम भी ऐसे ही आना,
और
पिछले वर्ष की
सारी कड़वी यादें
भुला देना।

आओ आओ नए वर्ष,
हम पलकें बिछाए
तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।

इस बार कुछ ऐसा आना
कि चारों ओर
खुशियों की हरियाली छा जाए।
न कहीं अराजकता हो,
न कहीं आतंक का साया
हर घर में
खुशियाँ हों
अपरंपार।

रोटी, कपड़ा, मकान के लिए
कोई न तरसे।
सबको मुफ्त दवा मिले,
इलाज सबका सुलभ हो।
शिक्षा अधूरी न रहे,
हर बच्चा पढ़े, बढ़े, सपने गढ़े।

पेड़ लगें,
वातावरण शुद्ध हो,
नदियाँ स्वच्छ बहें,
पहाड़ अडिग रहें।
न भूकंप हो,
न बाढ़,
न कोई बड़ा हादसा—
जीवन स्वर्ग-सा
शांत और सुरक्षित हो।

आओ नए वर्ष,
हमारे मन से भी
ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार
धो देना।
शब्दों में संयम हो,
व्यवहार में करुणा हो,
विचारों में उजास हो
ऐसा कुछ दे जाना।

बच्चे सुरक्षित हों,
स्त्रियाँ निडर हों,
वृद्धों को सम्मान मिले,
यह वरदान दे जाना।

धर्म हो मानवता का,
कर्म हो सेवा का,
और प्रेम हो
सबसे बड़ा उत्सव।

तकनीक प्रगति लाए,
पर मनुष्य
मनुष्य बना रहे
संवेदना कहीं
पीछे न छूट जाए।

और जाते-जाते,
हमें इतना साहस देना
कि हम भी
इस सुंदर वर्ष के
योग्य बन सकें।

हमारी सोच को
और अधिक व्यापक,
और अधिक विशाल बना देना।
हमारे मन को
एक नई ऊँचाई देना।

आओ 2026,
नवजात शिशु की तरह आओ,
मेहमान बनकर नहीं,
घर के सदस्य बनकर आओ।

केवल कैलेंडर नहीं बदलना, 
हमारे दृष्टिकोण को भी 
एक नई दृष्टि देना ।

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