*बिखरे हुए इंडी गठबंधन के दल अब भी गुमराह हैं*
*बिखरे हुए इंडी गठबंधन के दल अब भी गुमराह हैं*
महाराष्ट्र में विगत दिनों ग्राम पंचायत से लेकर नगर पालिका महानगर पालिका के चुनाव हुए हैं। जिसमें भगवा गठबंधन का ९५%के हिसाब से स्ट्राइक रेट रहा है। महाराष्ट्र की लगभग दो एक को छोड़ दिया जाय तो हर संस्थान पर भगवा ब्रिगेड सवार हो गया है। वहीं इंडी गठबंधन बीते कई वर्षों से वही घिसा-पिटा नारा लेकर और तुष्टिकरण की राह पकड़े हुए गुमराह है।और जनता को भी १९वीं सदी का समझकर गुमराह कर रही है।हर बार सरकारी संस्थाओं पर आरोप तो सोशल मिडिया प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया पर बैठ कर लगाती है।मगर एकबार भी चुनाव का बहिष्कार नहीं की।बैलेट पेपर से चुनाव हो।यह मांग करते थे।जब बैलेट पेपर से चुनाव हुआ तब भी हार गये।तो कहने लगे वोट खरीद ली गई।भाई वोट आप भी खरीद लेते।या जब आपको पता था वोट बजार में बिक रही है तो उस बजार को बंद क्यों नहीं करवाये।आपके नेता को उसके दुष्कर्मों के लिए सजा मिलती है,तब तो बड़ा बवाल काटते हो।तो वोट बिक्री पर रोक लगाने के लिए क्यों नहीं धरना प्रदर्शन किए।कोर्ट में क्यों नहीं गये।यदि नहीं किए नहीं गये तो मतलब साफ है कि आप खुद चोर हो।इस भय से कहीं न जाकर बस टीवी आदि प्लेटफार्मों पर ऊल जलूल बातें करके जनता को गुमराह करते हो।
अभी महानगरपालिकाओं का चुनाव हुआ।इंडी गठबंधन अपनी हार यह कहते हुए पहले ही स्वीकार कर लिया कि ईवीएम में गड़बड़ी हो रही है।ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है।जितनी भ्रांतियां फैलाई जा सकती थी फैलाए।ए लोग अपना एजेंडा जनता तक पहुंचाने के बदले,जनता को गुमराह करते रहे।ए भूल गये कि यह जनता २१वीं सदी की है।१९ वीं की नहीं। चुनाव जैसे ही नजदीक आया एक पार्टी भाषा के नाम पर और प्रांत के नाम पर गरीब प्रवासियों को मारना पीटना शुरू कर दी।इसके अलावा उसको खुद को साबित करने के लिए कोई चारा नहीं दिखता।वो खुद के सम्मान के लिए पुरे राज्य की अस्मिता के साथ जोड़ता है।ऐसा लगता है जैसे ए ही राज्य हैं।मगर आज की पढ़ी लिखी समझदार जनता उनके इस कुकृत्य को परे कर भारतीय होने का प्रमाण दिया।और साफ कर दिया कि अब ए फालतू के मुद्दे नहीं चलेंगे।अब मुद्दे वही चलेंगे जो दिखेंगे।इस चुनाव परिणाम से भारत के प्रबुद्ध नागरिकों ने जो सबसे स्पष्ट मत दिया है, वो है भारतियता। नागरिकों ने कह दिया कि हम भले अलग अलग राज्यों से हैं,हम भले अलग रंग और अलग भाषाई हैं,मगर हम सब एक भारतीय हैं।हमारी पहचान भारतीय है।
दूसरा है विकास।आज जनता को विकास जमीन पर दिख रहा है।मूल भूत सुविधाओं में काफी बदलाव जनता को दिख रहा है। इसलिए भगवा ब्रिगेड जनता से कनेक्ट हो रहा है।अब जनता जाति पाति धर्म भाषा पर नहीं,अब राष्ट्रवाद और विकास पर वोट कर रही है।जिसका ताजा उदाहरण २९ महानगरपालिकाओं में से २५ पर भगवा का पहरना है।इंडी गठबंधन जनता में केवल भ्रम फैलाता रहा। वहीं भगवा ब्रिगेड अपना काम गिनाते हुए और सुनहरे सपने दिखाते हुए बढ़ता रहा।जनता उनके किए हुए कार्यों को देखते हुए उनपर भरोसा कर उन्हें जितना दी।और विपक्ष आज भी वही रोना रो रहा है।जिसे जनता हर बार शिरे से नकारते चली आ रही है।विपक्ष को अब यदि चुनाव जीतना है तो घिसे पिटे मुद्दों को समंदर में फेंक कर कुछ प्रमाणित और सुनहरे मुद्दे जनता के मध्य लेकर आये।जो भगवा ब्रिगेड से भी आकर्षक हो। जनोपयोगी हो।अभी तक जितने मुद्दे जनता के बीच लेकर गई है सब स्वउपयोगी लेकर गई है। इसलिए विपक्ष को चाहिए भाषावाद प्रांतवाद जातिवाद व एक खास वर्ग हितैषी न बनकर सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की नीति पर काम करें।वह काम जनता को भी दिखे भी। गुमराह करना बंद करें।और न गुमराह रहें।
पं. जमदग्निपुरी
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