हृदयांगन संस्था ने डॉ नीरजकांत सोती को दिया श्रद्धांजलि
हृदयांगन संस्था ने डॉ नीरजकांत सोती को दिया श्रद्धांजलि
बिजनौर
राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था हृदयांगन के संस्थापक एवं महासचिव विधु भूषण त्रिवेदी विद्यावाचस्पति वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि ब्रहलीन डा० नीरज कान्त सोती 'भैया जी' की आरिष्टी (तेरहवीं संस्कार) में 9 जनवरी 2026 बिजनौर उत्तर प्रदेश आकर संस्था की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की।उनके साथ देहरादून से डा० विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू राष्ट्रीय अध्यक्ष हृदयांगन संस्था एवं संयोजिका हृदयांगन विथिका,श्रीमती कविता बिष्ट 'नेह' प्रांतीय अध्यक्ष उत्तराखंड,सत्येन्द्र कुमार शर्मा, आजीवन सदस्य देहरादून से श्रीमती रूबी कंचन,श्रीमती मीरा लखनऊ से रमेशचन्द्र शर्मा बिजनौर डा० सत्य प्रकाश पाण्डेय संयोजक डा० सत्या होप टाक समूह उपस्थित रहे।संस्था के राष्ट्रीय मिडिया सचिव विनय दीप शर्मा से वार्ता के दौरान डा० विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संयोजिका हृदयांगन विथिका ने बताया कि डा० नीरज कान्त सोती भैय्या का आकस्मिक निधन वाराणसी में दिनांक 28 दिसंबर 2025 को मध्यरात्रि में हो गया था। वे काशी बनारसिया मीट 2 कार्यक्रम में आनंदम, वाराणसी गये हुये थे।
उनके आकस्मिक निधन से हम सभी ही नहीं कई संस्थाएं,हजारों साहित्यकार कवि विद्वतजन स्तब्ध रह गये।वे हृदयांगन संस्था समूह में मार्गदर्शक,संरक्षक, चुनाव अधिकारी राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्य लेखा नियंत्रक के पदों में रहकर हृदयांगन संस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।हृदयांगन वीथिका पर अनेको सम- सामयिक विषयों पर एवं भरत चरित पर उनके व्याख्यान सदैव याद किये जायेंगे।हृदयांगन वीथिका के एकल काव्यपाठ में तो वे लोकप्रिय कवि के रूप में अपनी पहचान बनाई। सबके चहेते लाडले भैयाजी ने सुन्दरकाण्ड दृश्यावली नामक सुप्रसिद्ध खण्ड काव्य लिखा। डा० विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू ने बताया कि नीरज भैया उनके साहित्यिक गुरु रहे।जिनके मार्गदर्शन में स्वर्ण मंजूषा दोहावली पुस्तक प्रकाशित हुई। हृदयांगन संस्था के वार्षिक महोत्सव मुंबई, देहरादून, शुक्ला खेड़ा धाम उन्नाव एवं अनेकों कार्यक्रम में आप तन मन धन से शामिल रहे। वर्तमान में हृदयांगन वीथिका आभासी पटल पर एक वर्ष तक के लिए श्री रामचरित मानस का संपूर्ण पाठ का भावपूर्ण उद्बोधन कर रहे थे।नीरज कान्त सोती भैयाजी का न रहना व्यक्तिगत रूप से और साहित्य जगत में अपूर्णीय क्षति है।हृदयांगन के संस्थापक ने बिजनौर में शोक सभा आयोजित किया जिसमें सभी उपस्थित विद्वतजनों ने अपने विचार व्यक्त किए। संस्थापक ने यह भी प्रस्ताव पारित किया कि नीरज कान्त सोती भैया का स्थान कभी भी रिक्त नहीं हो सकता।अतः उन्होंने तत्काल प्रभाव से श्रीमती सुषमा सोती (धर्मपत्नी ब्रह्मलीन डा० नीरज कान्त सोती) को हृदयांगन साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पंजीकृत संस्था की राष्ट्रीय संयोजिका नामित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के लिए हृदयांगन संस्था का सर्वोच्च सम्मान "नीरज कान्त सोती भैयाजी स्मृति सम्मान 2026"
श्रीमती सुषमा सोती को प्रदान किया जायेगा। सभी उपस्थित विद्वतजनों ने इन प्रस्तावों का करतल ध्वनि से समर्थन किया।।
अंत में विधु भूषण त्रिवेदी संस्थापक महोदय एवं डा० विद्युत प्रभा चतुर्वेदी मंजू राष्ट्रीय अध्यक्ष हृदयांगन ने संस्था की ओर से अंगवस्त्र, पुष्प एवं शाल ओढ़ाकर आदरणीया सुषमा सोती का भावपूर्ण सांत्वना देते हुए कहा कि हृदयांगन संस्था समूह का पूरा परिवार दुःख की इस घड़ी में आपके साथ है।
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