भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य ज्ञान प्रदान

भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य ज्ञान प्रदान
मुंबई। कांदिवली (पूर्व) स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का अंतिम दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और भावविभोर वातावरण में सम्पन्न हुआ। समापन दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि श्रीमद् भागवत कथा आज भी समाज को आध्यात्मिक दिशा देने वाली अमृतधारा है।

स्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल, किशोर एवं दिव्य लीलाओं के माध्यम से श्रद्धालु भक्तों को श्रीमद् भागवत कथा के आध्यात्मिक, नैतिक और जीवनोपयोगी संदेशों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की लीलाएँ केवल कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को कर्म, भक्ति और ज्ञान के संतुलित मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

प्रवचन में ध्रुव, प्रह्लाद, गजेंद्र मोक्ष, गोवर्धन लीला और रास लीला जैसे प्रसंगों के माध्यम से यह प्रतिपादित किया गया कि सच्ची भक्ति अहंकार, माया और लोभ से मुक्ति का मार्ग है। 
स्वामी जी ने कहा कि कलियुग में श्रीमद् भागवत का श्रवण, कीर्तन और स्मरण ही आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम साधन है।

स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि संसार के दुखों का मूल कारण आसक्ति है और परमात्मा की शरण में जाने से ही जीवन में शांति, संतोष और सार्थकता आती है। श्रीमद् भागवत मानव को सेवा, करुणा, प्रेम और समर्पण का संदेश देती है, जो आज के सामाजिक जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

समापन अवसर पर भजन, कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से संपूर्ण परिसर भक्तिरस में डूब गया। श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण जयघोषों के साथ कथा को विदाई दी। आयोजकों ने ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में संस्कार, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का संकल्प दोहराया।

अंत में महाप्रसाद वितरण के साथ श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ का विधिवत समापन हुआ। यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आत्मचिंतन, वैराग्य और भक्ति का अनुपम आध्यात्मिक अनुभव बन गया।

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