बाबू आरएन सिंह की जयंती पर, 20 दिव्यांगों को मिला तिपहिया इलेक्ट्रिक साइकिल का उपहार

बाबू आरएन सिंह की जयंती पर, 20 दिव्यांगों को मिला तिपहिया इलेक्ट्रिक साइकिल का  उपहार 
मुंबई। उत्तर भारतीय संघ के पूर्व अध्यक्ष बाबू आरएन सिंह की 78वीं जयंती सेवा, संवेदना और समाज के प्रति समर्पण के संदेश के साथ मनाई गई। नववर्ष के शुभ अवसर पर बांद्रा पूर्व स्थित उत्तर भारतीय संघ भवन में आयोजित कार्यक्रम में 20 दिव्यांगजनों को तिपहिया इलेक्ट्रिक साइकिल भेंट कर उन्हें आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई गई। कार्यक्रम में संघ के ट्रस्टी, पदाधिकारी, सदस्यगण और बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय समाज के लोग उपस्थित रहे। भावनात्मक माहौल के बीच समाजसेवा की प्रेरक मिसालें सामने आईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेश्याम तिवारी ने कहा कि उत्तर भारतीय संघ के संस्थापक स्वर्गीय बांकेराम तिवारी का संघ भवन का सपना उनके जीवनकाल में पूरा नहीं हो सका, लेकिन बाबू आरएन सिंह ने पूरे समाज को साथ लेकर उस सपने को साकार किया। आज उत्तर भारतीय संघ न केवल मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र में एक सशक्त और प्रतिनिधि संस्था के रूप में पहचाना जाता है।
उन्होंने कहा कि बाबू आरएन सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र संतोष आरएन सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग संघ से जुड़ रहे हैं, जिससे संस्था और अधिक मजबूत हो रही है।
तिवारी ने यह भी बताया कि बाबू आरएन सिंह की जयंती केवल उनकी कर्मभूमि मुंबई में ही नहीं, बल्कि उनकी जन्मभूमि गोरखपुर के भरौली गांव में भी मनाई गई, जहां गरीब परिवारों को एक हजार कंबल वितरित किए गए। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि बाबू आरएन सिंह जैसे लोग कभी मरते नहीं, वे समाज के दिलों में हमेशा जीवित रहते हैं। जब भी उत्तर भारतीय संघ का इतिहास लिखा जाएगा, उनका नाम पहले पन्ने पर होगा। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेश्याम तिवारी, विशेष ट्रस्टी अमरजीत सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा बाबू आरएन सिंह की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर उनके सामाजिक जीवन और योगदान पर आधारित वृत्तचित्र फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
समारोह को आध्यात्मिक रंग देते हुए लोकगायक सुरेश शुक्ला और उनकी टीम ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए, जिससे पूरा वातावरण श्रद्धा और भक्ति से सराबोर हो गया। यह आयोजन न सिर्फ एक महान समाजसेवी को श्रद्धांजलि था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का प्रेरक संदेश भी।

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