डॉ. मंजु गुप्त को श्रीनाथद्वारा में उनकी 16 कृतियों ,साहित्यक सेवा हेतु श्रीमती सुमनलता सिंघल स्मृति सम्मान - 2025 तथा बाल साहित्य विभूषण से पुरस्कृत।

डॉ. मंजु गुप्त  को  श्रीनाथद्वारा में उनकी 16 कृतियों ,साहित्यक सेवा  हेतु   श्रीमती सुमनलता सिंघल   स्मृति सम्मान - 2025 तथा बाल साहित्य विभूषण से पुरस्कृत
हिंदी सेवी साहित्यिक संस्था साहित्य मंडल, नाथद्वारा, राजस्थान द्वारा डॉ.मंजु गुप्त को श्रीमती सुमनलता सिंघल  स्मृति सम्मान 2025 तथा 2100 रूपये की राशि प्रदान करके राष्ट्रीय बाल साहित्य विभूषण सम्मान  ,शाल , श्रीफल ,  प्रभु श्रीनाथद्वारा जी की छवि और मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर  पुरस्कृत किया गया।श्री अंजीव रावत अंजुम ने संचालन करके डॉ मंजु गुप्त का गौरवशाली परिचय पढा।
 डॉ मंजु गुप्त ने साहित्यमण्डल के  आयोजक आ श्यामपुरा जी के संग में उन की   टीम की  गतिशीलता , कर्मठता को नमन करके अभिनन्दन किया। 
श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा स्मृति एवं राष्ट्रीय बाल साहित्य समारोह  व पुरस्कार 5,6,7 जनवरी 2026 साहित्य मंडल श्रीनाथ द्वारा उनके सुपुत्र श्रीश्याम प्रकाश जी के द्वारादिए जाते हैं ।उनके पिता  हिंदी भाषा के पुरोधा श्री भगवती प्रसाद जी देवपुरा जिन्होंने मातृभाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन माँ भारती के सेवा में समर्पित कर दिया, जिन्होंने साहित्य कला और संस्कृतिकी त्रिवेणी  को पुनः जीवित  करने तन -मन  -धन से साहित्यिक संस्था  साहित्य मंडल , श्रीनाथद्वारा राजस्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया ।ऐसे हिंदी पुरोधा कि  द्वादश  पुण्य तिथि  पर तीन दिवसीय साहित्य एवं सांस्कृतिक समारोह  किया गया । जिसमें पूरे भारतवर्ष से 11 राज्य  के 125 साहित्यकारों ने सहभागिता की।
श्री श्याम देवपुरा जी उनके नाम पर गुप्ता नहीं बल्कि उन्हें गुप्ता के बदले गुप्त सही शब्द बताया । उसी वक्त मंजु  ने यह कथन स्वीकार किया और उनका नाम अब डॉ मंजु गुप्त से चर्चित हुआ।
डॉ मंजु गुप्त ने  साहित्य मंडल और शुभचिंतको  का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि  हर सम्मान मानव की ऊर्जा को बढ़ाता है और भव्य साहित्यिक पुरस्कार मिलने से समाज के प्रति और जिम्मेदारी बढ़ गई है। समाज में मूल्यों में गिरावट आई है।  समाज और नई पीढ़ी के मूल्य हित  में बेहतर से बेहतर कृतियाँ रचके और समाज सेवा से संस्कारी, स्वस्थ समाज ,देश   के नवनिर्माण , विकास में वे अपना योगदान देंगी।उनकी आने वाली कृति 'छंद की कोख से ' । इस कृति से उन्होंने  छंद की पुरानी विधा को पुनः जीवित किया।

Comments

Popular posts from this blog

*एन के ई एस स्कूल के विद्यार्थियों ने जीता कबड्डी प्रतियोगिता*

योगेश्वर इंग्लिश स्कूल का 25 वां वार्षिक उत्सव संपन्न

श्रीमती गुजना इंग्लिश हाई स्कूल का 45वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न