आदिवासी बच्चों के लिए लोढ़ा फाउंडेशन का “मानवता का हाथ, सबका साथ” अभियान

आदिवासी बच्चों के लिए लोढ़ा फाउंडेशन का “मानवता का हाथ, सबका साथ” अभियान 
मुंबई। लोढ़ा फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ. मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा की संकल्पना से साकार हुए “मानवता का हाथ, सबका साथ” इस सामाजिक अभियान का शुभारंभ मंगलवार, दि. 9 जून को सायंकाल गामदेवी स्थित धर्म पैलेस, ह्यूजेस रोड में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। राज्य के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की प्रमुख उपस्थिति में इस उपक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। समाज के अनेक घरों में उपयोग में न आने वाली, किंतु अच्छी स्थिति में उपलब्ध पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें बड़ी संख्या में पड़ी रहती हैं। इन वस्तुओं को नया जीवन देते हुए उन्हें आदिवासी समुदाय के जरूरतमंद बच्चों और परिवारों तक पहुंचाने का संकल्प इस अभियान के माध्यम से लिया गया है। संकलित सामग्री की आवश्यक मरम्मत, स्वच्छता एवं पुनः उपयोग के लिए तैयारी कर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा। अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में 100 से अधिक नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।सइस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के साधन, खिलौनों से मिलने वाला आनंद तथा साइकिलों से प्राप्त गतिशीलता ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर की अनुपयोगी वस्तुएं दान कर इस अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर मार्गदर्शन करते हुए कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा, “समाज के प्रत्येक घर में ऐसी अनेक पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें होती हैं, जो भले ही उपयोग में न हों, लेकिन किसी जरूरतमंद बच्चे के लिए अमूल्य साबित हो सकती हैं। ‘मानवता का हाथ, सबका साथ’ यह अभियान केवल वस्तुओं का दान नहीं, बल्कि आनंद, शिक्षा और अवसरों का वितरण करने वाला अभियान है। पालघर के आदिवासी बच्चों से शुरू होने वाला यह आंदोलन समाज के संवेदनशील नागरिकों की सहभागिता से और अधिक व्यापक बनेगा, ऐसा मुझे विश्वास है।”
डॉ. मंजू मंगल प्रभात लोढ़ा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “एक पुरानी पुस्तक किसी बच्चे को शिक्षा का नया अवसर दे सकती है, एक खिलौना उसके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है और एक साइकिल उसके सपनों को नई उड़ान दे सकती है। समाज में उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग कर जरूरतमंदों तक सहायता का हाथ पहुंचाना ही इस पहल के पीछे की प्रेरणा है।” कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वयंसेवी क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति, नागरिक तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे। आदिवासी बच्चों की शिक्षा, खुशी और उज्ज्वल भविष्य के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर सहयोग करने का संदेश इस अभियान के माध्यम से दिया गया। लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से नागरिकों से अपने घरों में उपलब्ध पुरानी पुस्तकें, खिलौने और साइकिलें दान कर इस सामाजिक आंदोलन का हिस्सा बनने का आह्वान किया गया।

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